मुंबई, 11 नवंबर 2025: विश्व मधुमेह दिवस से पहले फार्मईज़ी की नई रिपोर्ट “मधुमेह: भारत भर में फैल रहा एक खामोश हत्यारा” ने चिंताजनक आंकड़े जारी किए। जनवरी 2021 से सितंबर 2025 तक के आंकड़ों पर आधारित इस अध्ययन में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 40 लाख से ज़्यादा नैदानिक रिपोर्टों और 1.9 करोड़ दवाओं के ऑर्डर का विश्लेषण किया गया है। ये निष्कर्ष भारत में मधुमेह के बढ़ते बोझ और शीघ्र पहचान व दीर्घकालिक प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3 में से 1 HbA1c परीक्षण के परिणाम मधुमेह की श्रेणी में आते हैं, जबकि 4 में से 1 व्यक्ति में प्रीडायबिटीज़ के लक्षण दिखाई देते हैं। कुल मिलाकर, इसका मतलब है कि जिन लोगों की जाँच की गई, उनमें से आधे से ज़्यादा लोगों में किसी न किसी रूप में रक्त शर्करा की अनियमितता देखी गई – जो देश में मधुमेह के बढ़ते मामलों को रेखांकित करता है।
जनवरी 2021 से सितंबर 2025 तक 29 राज्यों में 40 लाख+ लैब टेस्ट और 1.9 करोड़ दवा ऑर्डर के विश्लेषण से पता चला:
- हर 2 में 1 व्यक्ति में उच्च रक्त शर्करा (51.9% पुरुष, 45.43% महिलाएं)
- 3 में 1 HbA1c टेस्ट मधुमेह रेंज में, 4 में 1 प्रीडायबिटिक
- 30 साल से कम उम्र में भी तेज़ वृद्धि; 60+ में 80% प्रभावित
- दवा ऑर्डर: 2021 में 25% से बढ़कर 2024 में 34% मधुमेह दवाएं
क्षेत्रीय हॉटस्पॉट: पुडुचेरी (63%), ओडिशा (61%), तमिलनाडु (56%), गोवा (54%); हिमाचल सबसे कम (41%)।
सभी उम्र के लोगों में बढ़ती एक मूक महामारी
फार्मईज़ी की रिपोर्ट बताती है कि मधुमेह युवा वयस्कों को तेज़ी से प्रभावित कर रहा है। यहाँ तक कि 30 वर्ष से कम आयु के लोगों में भी, एक महत्वपूर्ण अनुपात में उच्च रक्त शर्करा का स्तर देखा गया। यह स्थिति 60 वर्ष की आयु के बाद चरम पर होती है, और जाँच किए गए 10 में से 8 व्यक्ति मधुमेह या पूर्व-मधुमेह श्रेणी में आते हैं। 30 वर्ष की आयु से उच्च रक्त शर्करा के मामलों में विशेष रूप से तेज़ वृद्धि देखी जाती है, जो दर्शाता है कि कैसे प्रारंभिक जीवनशैली और आहार संबंधी कारक चयापचय स्वास्थ्य को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं।
साथी खतरे: हाई शुगर वालों में 25% थायरॉइड (ज्यादातर हाइपो)
- 33% लिवर समस्या
- 50% किडनी खराबी
- 90% लिपिड असंतुलन (हृदय रोग जोखिम)
फार्मईज़ी बी2सी प्रमुख गौरव वर्मा: “हर 2 में 1 को हाई शुगर। लाखों अनजाने में खतरे में। शुरुआती जांच और जागरूकता ज़रूरी।”
डॉ. अनिमेष चौधरी: “मधुमेह बचपन से रोकें – स्वस्थ आहार, व्यायाम, मानसिक स्वास्थ्य से।”
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