शिवपाल से मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में खलबली
सनातन विवाद के बाद छोड़ी थी सपा, अब ‘घर वापसी’ की सुगबुगाहट
लखनऊ, 11 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हाई वोल्टेज ड्रामा तेज हो गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (आरएसएसपी) के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य की समाजवादी पार्टी (सपा) में वापसी की अटकलें जोर पकड़ रही हैं। दूसरी ओर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए बड़ा ऐलान किया है। अगर सपा की सरकार बनी तो गरीब महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये दिए जाएंगे। ये दोनों घटनाक्रम सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं, जहां एक तरफ पुराने साथी की ‘रिकॉन्सिलिएशन – सुलह ‘ की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ वोटरों को लुभाने की नई रणनीति सामने आ रही है।

स्वामी प्रसाद मौर्य: फिर से सपा का दामन थामने की कगार पर?
स्वामी प्रसाद मौर्य का सपा से पुराना नाता रहा है। 2022 में बीजेपी छोड़कर वे अखिलेश यादव के साथ जुड़े थे, लेकिन रामचरितमानस और सनातन धर्म जैसे मुद्दों पर मतभेद के चलते फरवरी 2024 में उन्होंने सपा की प्राथमिक सदस्यता और विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

मौर्य ने अखिलेश पर आरोप लगाया था कि पार्टी नेतृत्व ने उनके विवादास्पद बयानों पर उनका बचाव नहीं किया और भेदभाव किया। इसके बाद उन्होंने अपनी अलग राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी बना ली, जो मुख्य रूप से दलित-पिछड़े वोट बैंक पर केंद्रित है।
हालांकि, हालिया घटनाक्रमों ने सियासी हलकों में सनसनी फैला दी है। शिवपाल यादव से मुलाकात के बाद से ही अटकलें तेज हो गईं कि मौर्य एक बार फिर सपा के साथ आ सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर मौर्य सपा में लौटे तो यह 2027 चुनाव में PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठजोड़ को मजबूती देगा। हालांकि, मौर्य ने हाल ही में अखिलेश पर तंज कसते हुए कहा था कि सपा ‘घड़ियाली आंसू’ बहा रही है, लेकिन आजम खान जैसे नेताओं के लिए सड़क पर नहीं उतरी। क्या यह नाराजगी ठंडी पड़ रही है, या फिर सियासी मजबूरी में ‘घर वापसी’ हो रही है? सियासी गलियारों में यही सवाल गूंज रहे हैं।
अखिलेश का ‘महिला सम्मान’ वादा: 40 हजार रुपये का ऐलान, बिहार से ली सीख
दूसरी तरफ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘एजेंडा आज तक’ कार्यक्रम में 2027 चुनाव को लेकर जोरदार ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार आई तो गरीब महिलाओं को साल में 40 हजार रुपये देंगे।”
यह वादा बिहार चुनाव की हार से प्रेरित लगता है, जहां महागठबंधन ने महिलाओं को 10 हजार रुपये देने का वादा किया था, लेकिन हार गई। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, “अगर 10 हजार से सरकार बनती है, तो हम 40 हजार देंगे। बिहार में माताएं-बहनें अब 10 हजार का इंतजार कर रही हैं, लेकिन हमने तैयारी कर ली है।”

अखिलेश ने वादे का ‘गणित’ भी समझाया। उन्होंने बताया कि सपा सरकार में पहले 500 रुपये की समाजवादी पेंशन दी जाती थी, जो बाद में बढ़कर 2500 रुपये होनी थी। अब बीजेपी के वादों से सीखते हुए उन्होंने हिसाब लगाया: “महिलाओं ने जो पैसा खोया, उसका हिसाब लगाएं तो 3 हजार महीने बनते हैं। 12 महीने में 36 हजार, और बकाया ब्याज जोड़कर 40 हजार।” पैसों का स्रोत पूछने पर उन्होंने व्यंग्य किया, “देश के उद्योगपतियों पर ही तो कर्ज है, हम उनसे उधार लेकर गरीब बहनों को देंगे।”
सपा के आधिकारिक एक्स हैंडल पर भी यह बयान पोस्ट किया गया, जिसे हजारों व्यूज मिल चुके हैं। @yadav_ram42248 यह वादा सपा की ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ का हिस्सा लगता है, जिसका जिक्र अखिलेश पहले भी कर चुके हैं। विपक्षी दलों ने इसे ‘चुनावी जुमला’ बताते हुए सवाल उठाए हैं कि ‘गरीब महिला’ की परिभाषा क्या होगी, जाति आधार पर या आर्थिक स्थिति पर?
ये दोनों घटनाक्रम साफ बता रहे हैं कि 2027 का यूपी चुनाव महिलाओं और पिछड़े वोट बैंक पर केंद्रित होगा। अगर स्वामी मौर्य सपा में लौटे तो यह अखिलेश के लिए बड़ा प्लस पॉइंट होगा, खासकर केशव मौर्य के खिलाफ। वहीं, 40 हजार का वादा महिलाओं को लुभाने का मास्टर स्ट्रोक है। फिलहाल बीजेपी ने अभी चुप्पी साध रखी है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि वे भी जल्द ही काउंटर प्लान लाएंगे।







