सामाज में लोग पद, पैसे और प्रतिष्ठा की चाह में खो रहे नैतिकता
लखनऊ। पद, पैसा और सोशल स्टेटस की होड़ में नैतिकता और रिश्ते ब्लैक होल में समा रहे हैं—यह कड़वा सच आज शाम राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग में मंचित सामाजिक नाटक ‘ब्लैक होल’ ने दर्शकों के सामने रख दिया।
नाटक की कहानी बेहद मार्मिक है: एक महत्वाकांक्षी अधिकारी कुरु (गुरुदत्त पाण्डेय) और पुरस्कारों की प्यासी कवयित्री पत्नी आशी (रितु श्रीवास्तव) इतने व्यस्त हैं कि बच्चों—विभु और त्रिषा—को समय ही नहीं दे पाते। बेटी त्रिषा (मुस्कान सोनी) ग्लैमर की चकाचौंध में घर छोड़कर भटक जाती है, तो बेटा विभु (आकाश सैनी) प्रेम में ठोकर खाकर हिंसा की राह पर चल पड़ता है।
परिवार का बूढ़ा नौकर भोले काका (महर्षि कपूर निर्देशक सह अभिनेता) सब देखता है, सहता है.और अंत में एक दर्दभरा सवाल छोड़ जाता है:
“पद-प्रतिष्ठा की दौड़ में आप अपनी आँखों के तारे छोड़ ब्लैक होल तक पहुँच गए, जहाँ आपका अस्तित्व ही गुम हो जाएगा!”महर्षि कपूर के सधे निर्देशन में बिम्ब सांस्कृतिक समिति द्वारा मंचित यह नाटक राम किशोर नाग की लेखनी, संस्कृति मंत्रालय की रंगमण्डल योजना और भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से साकार हुआ। मंच पर चमके: रितु श्रीवास्तव, गुरुदत्त पाण्डेय, मुस्कान सोनी, आकाश सैनी, विवेक रंजन सिंह।
दर्शकों को आईना दिखाने वाला यह नाटक याद दिलाता है—सफलता की चकाचौंध में परिवार और मूल्य खोने का खामियाजा कितना भारी पड़ता है। क्या आप भी इस ब्लैक होल की ओर बढ़ रहे हैं? सोचिए… वरना वक्त रहते रुकना मुश्किल हो जाएगा!







