BREAKING: अमेरिका की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ स्ट्रैटेजी: 24 घंटे में 50+ स्टील्थ बीस्ट्स!
नई दिल्ली : अमेरिका ने पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा लड़ाकू विमान – F-22 रैप्टर्स (आसमान के राजा), F-35 लाइटनिंग II (स्टील्थ किलर), और F-16 फाइटिंग फाल्कन्स – पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) भेज दिए हैं!
फ्लाइट ट्रैकर्स ने देखा कि ये जेट्स सीधे ईरान के आसपास के बेस की तरफ जा रहे हैं। ये सब ट्रंप की “डील या डील” वाली पॉलिसी का हिस्सा है—न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करो, वरना… ऑप्शंस ऑल ओपन!
और नेवी का सीन? दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत USS Gerald R. Ford (75+ एयरक्राफ्ट कैरी करने वाला सुपरकैरियर) अब अटलांटिक से होकर मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहा है। पहले से ही USS Abraham Lincoln वहाँ तैनात है दोनों कैरियर्स मिलकर खाड़ी में “डोंट मेस विद अस” का मैसेज दे रहे हैं!
ईरान का जवाब: ‘हमारे पास वो हथियार है जो आपके कैरियर को डुबो देगा!’
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने X (ट्विटर) पर धमाका किया:
“अमेरिका बार-बार कह रहा है कि उसने युद्धपोत भेजे हैं। हाँ, युद्धपोत खतरनाक है, लेकिन उससे ज्यादा खतरनाक वो हथियार है जो इसे समुद्र की तलहटी में भेज सकता है!”
उन्होंने और कहा कि दुनिया की सबसे ताकतवर आर्मी पर ऐसा हमला होगा कि वो दोबारा उठ नहीं पाएगी! ईरान की मिसाइल और ड्रोन कैपेबिलिटी का इशारा साफ है।
जिनेवा टॉक्स: थोड़ी प्रोग्रेस, लेकिन रेड लाइन्स पर अड़चन! जिनेवा में अमेरिका-ईरान की अप्रत्यक्ष बातचीत हुई – ईरान के FM ने कहा “गाइडिंग प्रिंसिपल्स पर समझ बनी, अच्छी प्रोग्रेस”। लेकिन VP JD Vance ने साफ बोल दिया:
“ईरान अभी ट्रंप की रेड लाइन्स (खासकर न्यूक्लियर प्रोग्राम पर पूरी रोक) मानने को तैयार नहीं। हम बात जारी रखेंगे, लेकिन ऑप्शंस ऑल ओपन हैं!”
ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन कह रहा है- डील हो या मिलिट्री एक्शन, लेकिन ईरान को न्यूक्लियर वेपन नहीं बनाने देंगे।
रूस आ गया ईरान के साथ: जॉइंट नेवी ड्रिल से ट्रंप बौखला जाएंगे!
ईरान और रूस ने गुरुवार को ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में जॉइंट नेवी एक्सरसाइज की घोषणा की! मकसद—समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से निपटना… लेकिन असल मैसेज: “अमेरिका, हम भी तैयार हैं!”
ईरान का साथ देने आ गया रूस, नेवी ड्रिल से बौखलाएंगे ट्रंप
तेहरान । ईरान की अर्ध सरकारी फार्स न्यूज़ एजेंसी ने एक रिपोर्ट में बताया कि ईरान और रूस गुरुवार को ओमान सागर और उत्तरी हिंद महासागर में नेवी ड्रिल करेंगे। होर्मुज स्ट्रेट में बीते दिनों ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी मिलिट्री ड्रिल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नेवी कमांडर हसन मघसूदलू ने कहा है कि इसका मकसद दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ाना है। उन्होंने कहा, इसका मकसद समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए तालमेल बनाना है। साथ ही समुद्री आतंकवाद से निपटना, इस जॉइंट एक्सरसाइज के मुख्य लक्ष्यों में से हैं।
होर्मुज स्ट्रेट में IRGC की हालिया ड्रिल्स के बाद ये और बड़ा सिग्नल है।
रूस का साथ ईरान को और मजबूती दे रहा है।कुल मिलाकर: एक तरफ अमेरिका की एयर + नेवी पावर का भारी बिल्डअप, दूसरी तरफ ईरान की धमकियाँ + रूस का बैकअप। डिप्लोमेसी चल रही है, लेकिन अगर टूट गई तो… पूरा रीजन हिल सकता है!







