नई दिल्ली : सीजफायर की घोषणा के बीच अब जवाबी तलवारे चल रही हैं। युद्ध भले ही थमा हो, लेकिन लोगों के ईगो अभी भी चरम पर हैं। ऐसे में कई देश एकजुट होकर उस युद्ध के खिलाफ खड़े हो चुके हैं जो अमेरिका और इजराइल को सुधर जाने का कड़ा संदेश दे रहा है। इसी कड़ी में बीजिंग ने वॉशिंगटन को एक बार फिर करारा जवाब देते हुए साफ संदेश दे दिया है कि अब धमकियों और “एहसान” वाली भाषा का दौर खत्म हो चुका है।

ट्रंप के होर्मुज़ जलडमरूमध्य को “खोलने” वाले दावे पर चीन की प्रवक्ता ने तीखा पलटवार किया और कहा, “होर्मुज़ युद्ध से पहले भी खुला था। समस्या आपने ही बेवजह खड़ी की है।” इसी के साथ ट्रंप द्वारा चीन को ईरान हथियार मामले में दी गई खुली धमकी को भी बीजिंग ने सीधे चुनौती दी है।
ट्रंप ने कल कहा था: “हम अब चीन समेत दुनिया के देशों पर एहसान करते हुए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलना शुरू करने वाले हैं।”
वहीँ आज चीन की प्रवक्ता ने तुरंत और बेहद मजबूती से जवाब दिया: “लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य युद्ध से पहले ही खुला हुआ था। आपने ही दुनिया भर के लिए बेवजह समस्या खड़ी की है।”
यह जवाब न सिर्फ ट्रंप के बयान को खारिज करता है, बल्कि साफ संदेश देता है कि अमेरिका ही क्षेत्रीय तनाव का असली कारण है। चीन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह न तो किसी की धमकी से डरता है और न ही किसी का एहसान मानने को तैयार है।
उधर, एक और बड़े घटनाक्रम में ट्रंप ने चीन को ईरान को हथियार भेजने की तैयारी को लेकर खुली धमकी दी।
रिपोर्टर ने पूछा: “चीन ईरान को हथियार भेजने की तैयारी कर रहा है?”
ट्रंप का जवाब: “अगर चीन ऐसा करता है तो उसे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।”
ट्रंप का यह बयान साफ संकेत दे रहा है कि वे ईरान का साथ देने वाले किसी भी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने को तैयार बैठे हैं। लेकिन चीन और रूस जैसे देशों की मजबूत स्थिति के बीच यह धमकी अब पहले जैसी असरदार नहीं लग रही।
नई दुनिया की सच्चाई: ये दो बड़े घटनाक्रम एक साथ यह बता रहे हैं कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था अब हकीकत बन चुकी है। चीन न केवल ट्रंप की “एहसान” वाली सोच को ठुकरा रहा है, बल्कि ईरान मुद्दे पर भी किसी दबाव को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
बता दें कि अमेरिकी एकध्रुवीयता का दौर अब तेजी से खत्म हो रहा है। चीन का यह करारा और तथ्यपरक जवाब दुनिया भर के उन देशों के लिए प्रेरणा है जो संप्रभुता, स्वतंत्रता और न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था चाहते हैं।






