बरसाना की हुरियारिनें अब पूरी तरह युद्ध स्तर पर तैयार! लाठियों में तेल की चमक, शरीर में घी-दूध की ताकत और मन में राधा-कृष्ण की भक्ति का जुनून- ये है असली लठामार होली का जादू!
मथुरा/बरसाना। विश्व प्रसिद्ध लठामार होली अब बस कुछ दिनों दूर है – और बरसाना की हुरियारिनें इस बार और भी जोशीली, और भी मजबूत नजर आ रही हैं! सालभर घर-गृहस्थी संभालने वाली ये महिलाएं होली के मौके पर अलग ही अवतार धारण कर लेती हैं – जहां लाठी चलाना सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भक्ति, अनुशासन और शारीरिक साधना का रूप बन जाता है।
खान-पान में सख्त अनुशासन, ताकत का है खजाना तैयार
- सुबह-शाम दूध, घी, मक्खन, केसर, बादाम और काजू का नियमित सेवन।
- शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार पर फोकस।
- हुरियारिनों का मानना है – लठामार में सिर्फ ताकत नहीं, मन की एकाग्रता, धैर्य और थकान से मुक्ति भी जरूरी है।
सावित्री गोस्वामी बताती हैं, “लाठी चलाते वक्त थकान का नामोनिशान नहीं रहता – ये दिन हमारे लिए साधना जैसा है!”

सोलह शृंगार और लाठी – दोनों साथ चलते हैं!
इस बार हुरियारिनों ने सोलह शृंगार की तैयारियां भी जोर-शोर से की हैं:पारंपरिक लहंगे-चोली, आभूषण और मेहंदी-काजल सब तैयार।
क्योंकि लठामार होली में लाठी और श्रृंगार दोनों राधारानी की सहचरियों की पहचान हैं!
बीना गोस्वामी कहती हैं, “इस परंपरा का हिस्सा बनना हमारा सौभाग्य है – मन और शरीर दोनों को सालभर इसी दिन के लिए तैयार रखा जाता है।”
2026 में कब-कब और कहां होगी मुख्य होली?
- 24 फरवरी 2026 – लड्डू होली (बरसाना, श्रीजी मंदिर) – लड्डू बरसेंगे!
- 25 फरवरी 2026 – मुख्य लठामार होली (बरसाना, रंगीली गली) – हुरियारिनें लाठियां चलाएंगी!
- 26 फरवरी 2026 – लठामार होली (नंदगांव) – गोपों का पलटवार!
- अनुमानित 10-15 लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे – प्रशासन युद्ध स्तर पर तैयारियां कर रहा है।
सरोज गोस्वामी का कहना है, “लठामार होली भक्ति और अनुशासन का अनोखा मेल है – मन पूरी तरह राधारानी को समर्पित रहता है।” पूजा गोस्वामी जोड़ती हैं, “सालभर इसी दिन का इंतजार रहता है – इसलिए कोई कसर नहीं छोड़ते!”बरसाना अब होली की खुमारी में डूब चुका है।
बता दें कि लाठियां तेल से चमक रही हैं, हुरियारिनें तेजस्वी हो रही हैं – तो आप भी तैयार हो जाइए, क्योंकि ये सिर्फ होली नहीं, राधा-कृष्ण की लीला का जीवंत दृश्य है! राधे-राधे!






