एडोबी के नारायण और फेडएक्स के सुब्रमण्यम ने भारत AI शिखर सम्मेलन में अब तक के सबसे बड़े अमेरिकी कारोबारी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जबकि 67.5 अरब डॉलर का अवसंरचना निवेश कार्यबल की तैयारी पर निर्भर
दिल्ली, 19 फरवरी 2026: कल्पना कीजिए: 120 अमेरिकी टेक दिग्गजों के सीईओ – जिनमें Adobe के चेयरमैन शांतनु नारायण, FedEx के प्रेसिडेंट राज सुब्रमण्यम, Microsoft के प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ और General Catalyst के CEO हेमंत तनेजा जैसे नाम शामिल हैं – एक साथ दिल्ली पहुंचे हैं। ये अब तक का सबसे बड़ा अमेरिकी बिजनेस डेलिगेशन है जो भारत के AI इकोसिस्टम को सुपरचार्ज करने आया है!
ये लोग सिर्फ बातें करने नहीं आए – बल्कि अगले 5 सालों में भारत में AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 67.5 बिलियन डॉलर (करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये!) का निवेश करने की तैयारी में हैं। Microsoft, Amazon, Google जैसी कंपनियां पहले से ही अरबों डॉलर लगा चुकी हैं, और अब ये राशि भारत को ग्लोबल AI हब बनाने की दिशा में एक बड़ा धमाका है।

लेकिन असली कहानी यहां शुरू होती है – इंफ्रास्ट्रक्चर तो बन रहा है, लेकिन टैलेंट?
केपीएमजी की रिपोर्ट चेतावनी दे रही है: 74% भारतीय सीईओ मानते हैं कि अगले 3 सालों में उनकी कंपनी की ग्रोथ इस बात पर टिकी है कि कर्मचारी कितने तैयार हैं AI के लिए। यानी हाई-टेक मशीनें आ रही हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाले हाथ अभी पूरी तरह तैयार नहीं!
India AI Impact Summit 2026 (जिसे MeitY आयोजित कर रहा है) में 35,000+ प्रतिभागी और 50+ मंत्री शामिल हैं। ये 5 दिन का महाकुंभ है जहां AI की दुनिया का फ्यूचर लिखा जा रहा है। USISPF इस अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व कर रहा है।
एक दिलचस्प पैनल में CambrianEdge.ai के फाउंडर और CEO हरजीव सिंह ने मॉडरेट किया, जहां GE Healthcare के CTO गिरीश राघवन, HCL Tech के CTO विजय गुंटूर, LinkedIn के इंडिया हेड कुमारेश पट्टाबिरामन और पूर्व सरकारी सचिव रोहित कुमार सिंह जैसे दिग्गज मौजूद थे।
कुंजी पॉइंट्स जो सामने आए:
- AI लिटरेसी vs AI फ्लुएंसी – ChatGPT यूज करना अलग बात है, लेकिन AI के आउटपुट पर भरोसा कब करना और कब इंसानी दिमाग से सुधारना – यही असली स्किल है।
- भारत AI सप्लाई (12% YoY ग्रोथ) और डिमांड (51% ग्रोथ) में नंबर 1 है, लेकिन 60% कर्मचारियों को रीस्किलिंग चाहिए – और ज्यादातर को इसकी खबर भी नहीं!
- HCL का लक्ष्य: आधे वर्कफोर्स के साथ रेवेन्यू दोगुना करना + 4,000 नई AI वाली जॉब्स क्रिएट करना।
- GE Healthcare के पास FDA-अप्रूव्ड AI सॉल्यूशंस सबसे ज्यादा हैं – और वो कहते हैं: AI निदान को लोकतांत्रिक बना रहा है, लेकिन आखिरी जिम्मेदारी इंसान की ही रहेगी।
- हरजीव सिंह का जोर: “भारत के पास टैलेंट और महत्वाकांक्षा दोनों है। असली जीत इस बात पर है कि हम वर्कफोर्स में AI एक्जीक्यूशन स्किल्स कितनी तेजी से ला पाते हैं।”
Deloitte की रिपोर्ट और भी चौंकाने वाली है: 78% कंपनियां AI टूल्स यूज कर रही हैं, लेकिन सिर्फ 6% कर्मचारी उन्हें कंफर्टेबल महसूस करते हैं। यानी बड़ा इन्वेस्टमेंट आ रहा है, लेकिन अगर लोग तैयार नहीं हुए तो रिटर्न्स सीमित रहेंगे!
CambrianEdge.ai (USISPF का नॉलेज पार्टनर) ने समिट में फ्री 30-दिन एक्सेस दिया अपने AI-पावर्ड मार्केटिंग प्लेटफॉर्म का – जो कंटेंट, रिसर्च और एनालिटिक्स को एक साथ जोड़ता है। ये प्लेटफॉर्म ट्रेनिंग क्लासरूम से नहीं, बल्कि रियल प्रोजेक्ट्स से AI स्किल्स सिखाता है।
बता दें कि भारत AI का ‘गोल्ड रश’ देख रहा है – इंफ्रा में अरबों डॉलर, टॉप ग्लोबल लीडर्स, और एक बड़ा सवाल – क्या हमारी वर्कफोर्स इस स्पीड से मैच कर पाएगी? अगर हां, तो भारत न सिर्फ AI यूजर बनेगा, बल्कि AI क्रिएटर और लीडर बनेगा।






