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    Home»बच्चों की दुनिया

    गायककार गधा और सियार की चालाकी

    ShagunBy ShagunFebruary 24, 2026 बच्चों की दुनिया No Comments3 Mins Read
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    The trick of the singer donkey and the jackal.
    गायककार गधा और सियार की चालाकी - AI
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    एक बार की बात है, एक जंगल के किनारे बसा एक छोटा-सा खेत था, जहाँ एक किसान ने ताज़ा-पक्के तरबूज उगाए थे। उन दिनों एक पतला-पतला गधा जंगल में अकेला भटक रहा था, क्योंकि उसका मालिक उसे छोड़कर शहर चला गया था। भूख से उसकी हड्डियाँ तक दिखाई दे रही थीं।

    तभी उसकी मुलाकात एक चालाक लेकिन भूखे सियार से हुई। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और हँसते हुए कहा, “चलो, साथ में कुछ ढूँढते हैं खाने को।” दोनों की दोस्ती पक्की हो गई।

    कुछ दिनों बाद रात के अँधेरे में वे उस तरबूज वाले खेत तक पहुँचे। तरबूज इतने मीठे और रसीले थे कि दोनों ने मन भरकर खाए। गधा तो जैसे नया जीवन पा गया-उसका शरीर भरने लगा, चमक लौट आई, और वह हर रात उत्सुकता से उस खेत की ओर दौड़ने लगा।

    एक चाँदनी वाली रात, खूब सारे तरबूज खाने के बाद गधा बहुत खुश हो उठा। उसने सियार से कहा, “दोस्त, देखो न! चाँद कितना चमक रहा है, हवा कितनी ठंडी है, और ये तरबूजों की खुशबू… आज तो मेरा दिल गाने को बेकरार है। मैं अपनी आवाज़ में एक सुंदर राग छेड़ूँगा!”

    The trick of the singer donkey and the jackal.
    गायककार गधा और सियार की चालाकी – AI

    सियार ने आँखें फाड़कर कहा, “पागल हुए हो क्या? अगर तुमने रेंकना शुरू किया तो किसान जाग जाएगा। वो लाठी लेकर आएगा और हम दोनों की खैर नहीं!”

    गधा हँसा, “अरे, तुम संगीत नहीं समझते! मेरी आवाज़ में तो मधुरता है, बस तुमने कभी ठीक से सुना नहीं। आज मैं तुम्हें साबित करके दिखाता हूँ कि मैं कितना अच्छा गायक हूँ।”

    सियार ने आखिरी कोशिश की, “भाई, गधे की आवाज़ को कोई राग नहीं कहता। ये तो सिर्फ़ रेंक है! सुनो मेरी बात, चुपचाप चलो यहाँ से।”

    पर गधे को लगा कि सियार उसकी प्रतिभा पर जल रहा है। उसने कहा, “ठीक है, तुम दूर जाकर बैठो। मैं गाता हूँ, और तुम दूर से आनंद लो।”

    सियार ने कहा, “बस यही ठीक रहेगा। मैं बाहर जाकर इंतज़ार करता हूँ। तुम्हारे गीत की धुन सुनकर लौट आऊँगा।” और वह फुर्ती से झाड़ियों की ओर भाग गया।

    अब गधा अकेला खड़ा था। उसने गले को थोड़ा साफ़ किया, आकाश की ओर मुँह उठाया और ज़ोर से रेंकना शुरू कर दिया—ही-हाँ… ही-हाँ… ही-हाँ!

    आवाज़ इतनी तेज़ थी कि दूर-दूर तक गूँज गई। किसान की झोपड़ी में लाइट जल उठी। गुस्से में लाल-पीला होता किसान डंडा उठाकर दौड़ा। गधा अभी भी अपनी ‘मधुर’ धुन में मस्त था, उसे कुछ पता ही नहीं चला।

    किसान ने उसे पकड़ा, जमकर पीटा। गधा दर्द से चीखा, “अरे! मैं तो बस गा रहा था!” लेकिन किसान ने सुना नहीं। उसने गधे को मोटी रस्सी से बाँध दिया और बोला, “सुबह देखता हूँ तुझे!”

    दर्द और शर्म से गधा किसी तरह रस्सी खोलकर भागा। वह उस जगह पहुँचा जहाँ सियार छिपा बैठा था। सियार मुस्कुराया और बोला, “कैसा रहा तेरा संगीत-समारोह?”गधा सिर झुकाए बोला, “मित्र, तुम सही थे। मैंने तुम्हारी बात नहीं मानी, और आज अपनी ही आवाज़ ने मुझे पीटवा दिया।”

    सियार ने हँसते हुए कहा, “कोई बात नहीं, अब समझ गए न? दोस्त की सलाह तभी काम आती है, जब उसे समय रहते सुना जाए।”

    शिक्षा: अपनी क्षमता का आँकलन खुद करना चाहिए, और सच्चे मित्र की चेतावनी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

    Shagun

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