विश्व ग्लूकोमा सप्ताह पर नई दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन; भारत में 1.2 करोड़ प्रभावित, 90% मामले अभी अज्ञात – अपरिवर्तनीय अंधेपन को रोकने की चेतावनी
नई दिल्ली, 12 मार्च 2026। वैश्विक बायोफार्मा कंपनी एबवी ने विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान इंडिया हैबिटेट सेंटर में #DefeatGlaucoma राष्ट्रीय मीडिया कॉन्क्लेव आयोजित कर ‘दृष्टि के मूक चोर’ ग्लूकोमा के खतरों पर रोशनी डाली। यह रोग विश्व स्तर पर अपरिवर्तनीय अंधेपन का प्रमुख कारण है, जो प्रारंभिक चरण में बिना लक्षणों के चुपचाप दृष्टि छीन लेता है।
भारत में अनुमानित 1.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 90% मामले अभी तक निदान नहीं हुए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि समय पर जांच न होने से अपरिवर्तनीय दृष्टि हानि हो सकती है।
एबवी इंडिया के प्रबंध निदेशक सुरेश पट्टाथिल ने कहा, “ग्लूकोमा तब तक छिपा रहता है जब तक काफी दृष्टि नष्ट न हो जाए। हम 75+ वर्षों की नेत्र विशेषज्ञता से शीघ्र पहचान और नियमित जांच को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि लोग अपनी दृष्टि बचा सकें।”
कॉन्क्लेव में प्रमुख नेत्र विशेषज्ञों में डॉ. सुनीता दुबे (श्रॉफ चैरिटी आई हॉस्पिटल), डॉ. हर्ष कुमार (सेंटर फॉर साइट), डॉ. रमनजीत सिहोता (श्रॉफ आई सेंटर) और डॉ. देवेन तुली (नेत्रम आई फाउंडेशन) ने पैनल चर्चा में 40 वर्ष से अधिक उम्र में नियमित नेत्र जांच, अंतःनेत्र दबाव मापन और आजीवन निगरानी पर जोर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत ग्लूकोमा विज़न एक्सपीरियंस डेमो से हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने रोग से प्रभावित दृष्टि का अनुभव किया—परिधीय दृष्टि का क्रमिक क्षय। विशेषज्ञों का मत: सहयोगी प्रयासों से स्क्रीनिंग बढ़ाकर और जागरूकता फैलाकर भारत में ग्लूकोमा-संबंधी अंधेपन को काफी हद तक रोका जा सकता है। बता दें कि 40+ उम्र में नियमित जांच करवाएं और दृष्टि बचाएं, जीवन संवारें! #DefeatGlaucoma







