रवीन्द्रालय में साहित्य + संस्कृति का धमाल: शायरी से लेकर ऑर्थोपेडिक किताबें, गुरु गोबिंद सिंह पर चर्चा से अवधी व्यंजनों तक – दिन भर रहा रंगारंग मेला!
लखनऊ, 16 मार्च। रवीन्द्रालय चारबाग का लखनऊ पुस्तक मेला (13-22 मार्च) अब पूरे जोश में है जहां किताबें सिर्फ पढ़ने की नहीं, बल्कि जीने की चीज बन गई हैं! चौथे दिन स्टालों पर पाठक किताबों की दुनिया में खोए नजर आए, तो मंच पर कविताओं, परिचर्चाओं और विमोचनों का सिलसिला चला। सबसे खास? किताबों के बीच ही अवधी व्यंजन उत्सव ने स्वाद की लहर दौड़ा दी!
स्टालों पर क्या चल रहा है?
रोहित बुक: निंदा फाज़ली, राहत इंदौरी, दुष्यंत कुमार, गुलजार, बशीर बद्र, कुमार विश्वास की शायरी संग्रह से लेकर “मैं हिटलर की दासी थी”, “रामायण की महिला पात्र”, AI पर किताबें और रीतिकाल सैक्सुअलिटी जैसे विविध टॉपिक्स।
बुक ग्लोब: अचल प्रियदर्शी की “ब्राण्ड हेमंत”, डॉ. सीताराम इंडिया की “भारतीय महिला राजनीतिज्ञ: संघर्ष से सफलता”, रामनगीना मौर्य की “कार्टून का खजाना” – हर किसी को कुछ न कुछ मिल रहा!
साहित्यिक मंच का रंग:
सुबह ‘काव्या सतत साहित्य यात्रा’ और शारदेय प्रकाशन की गोष्ठी में मनोरमा लाल, करुणा पाण्डेय, अलका प्रमोद, मनु राय जैसे रचनाकारों ने कविताएं सुनाईं। दोपहर में निवेदिता श्री की किताब “दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी” पर मीनू खरे, राजवंत राज, विनीता मिश्रा, रत्ना कौल सहित कई विद्वानों ने गहन चर्चा की।
डॉ. अमरेश मोहन की स्वास्थ्य पुस्तक “Physiotherapy of Life” का विमोचन भी हुआ।
स्वाद का तड़का – अवधी व्यंजन उत्सव
लोक आंगन और नीलाक्षी फाउंडेशन के तहत ज्योति किरन रतन के संयोजन में नीलम वर्मा और मीनाक्षी साहू ने फरे, नून बरी, गुलगुले, आलू कचालू जैसे ट्रेडिशनल अवधी व्यंजनों का लुत्फ कराया। किताब पढ़ते-पढ़ते मुंह में पानी आ गया!
शाम का काव्य समारोह
सुंदरं के आयोजन में वाराणसी के बृजेन्द्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेश’, भोपाल के मनीष श्रीवास्तव ‘बादल’, डॉ. वीएम खरे, डॉ. अभिनव गुप्त, मंजू सक्सेना आदि को सम्मानित किया गया। ओम नीरव, डॉ. योगेश, कृपा शंकर श्रीवास्तव, मनमोहन बाराकोटी जैसे कवियों ने मंच गर्माया।
पुस्तक मेले में किताबें, कविता, विचार और अवधी स्वाद – सब एक साथ! अगर आप लखनऊ में हैं, तो रवीन्द्रालय पहुंचिए – यहां सिर्फ किताबें नहीं, पूरा नवाबी अंदाज मिल रहा है!







