Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, June 22
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ज़रा हटके

    बिहार का जलपुरुष: 30 साल की अकेली जंग में पहाड़ चीरकर 3 किमी नहर खोद डाली… लौंगी भुइयां, दशरथ मांझी का सच्चा वारिस!

    ShagunBy ShagunApril 7, 2026 ज़रा हटके No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Bihar's 'Water Man': In a solitary battle spanning 30 years, he carved through a mountain to dig a 3-kilometer canal... Laungi Bhuiyan—the true successor to Dashrath Manjhi!
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 539

    प्रस्तुति : नीतू सिंह

    बिहार की धरती हमेशा से शूरवीरों की जननी रही है। यहां की मिट्टी ने न सिर्फ क्रांतिकारियों को जन्म दिया, बल्कि ऐसे कर्मयोगियों को भी, जो पहाड़ों से लड़कर इतिहास रच देते हैं। दशरथ मांझी ने पत्नी की याद में पहाड़ चीरकर रास्ता बनाया, तो अब गया जिले का 71 वर्षीय लौंगी भुइयां (जिन्हें लोग लौंगी मांझी भी कहते हैं) ने अकेले 30 साल की मेहनत से 3 किलोमीटर लंबी नहर खोदकर साबित कर दिया कि हौसला हो तो असंभव भी संभव हो जाता है।

    Bihar's 'Water Man': In a solitary battle spanning 30 years, he carved through a mountain to dig a 3-kilometer canal... Laungi Bhuiyan—the true successor to Dashrath Manjhi!
    बिहार का जलपुरुष: 30 साल की अकेली जंग में पहाड़ चीरकर 3 किमी नहर खोद डाली… लौंगी भुइयां, दशरथ मांझी का सच्चा वारिस!

    कोठीलवा गांव (लुतुआ पंचायत, बैंकेबाजार प्रखंड, गया) में पानी की भारी किल्लत थी। बारिश का पानी पहाड़ों से बहकर बर्बाद हो जाता, खेत सूखे पड़े रहते और युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर जाते। लौंगी भुइयां ने ये सब देखा और फैसला किया कि “अगर दशरथ मांझी कर सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं?” उन्होंने खुद नक्शा बनाया, कुदाल, चप्पल और दउरी थाम ली और जंगल में मवेशियों को चराते-चराते नहर खोदने लगे। दिन में जब भी समय मिलता, वो पहाड़ी पर चले जाते। कोई साथी नहीं, कोई सरकारी मदद नहीं और सिर्फ़ अकेली लगन और अटूट विश्वास।

    घर की ‘पागलपंथी’ की कहानी

    लौंगी की पत्नी रामरती देवी शुरू में इनकी इस ‘दीवानगी’ से बहुत नाराज थीं। वो कहती थीं, “पागल हो गए हो क्या? घर-परिवार का क्या? बच्चों का पेट कैसे भरेगा?” कई बार उन्होंने खाना तक बंद कर दिया था, ताकि लौंगी काम छोड़ दें। लेकिन लौंगी ने हार नहीं मानी। वो कहते हैं, “मैं जंगल जाता, मवेशी चराता और खोदता रहता। भूखा रहकर भी काम करता। क्योंकि गांव के लिए पानी लाना मेरी मजबूरी बन गया था।” पत्नी की मृत्यु के बाद भी उन्होंने रुकना नहीं सीखा।

    गांव वालों का ताना-मज़ाक से सलाम तक का सफर

    शुरुआती दिनों में गांव वाले उन्हें देखकर हंसते और कहते, “ये पागल हो गया है, पहाड़ खोदने चला है!” कोई मदद को आगे नहीं आया। 30 साल तक अकेले उन्होंने चट्टानें तोड़ीं, मिट्टी हटाई और नहर बनाई। लेकिन जब नहर पूरी हुई और पहाड़ी का पानी खेतों तक पहुंचने लगा, तो वही लोग अब कहते हैं कि “लौंगी ने कई गांवों की किस्मत बदल दी। सरकार को इनके लिए पेंशन और आवास योजना का फायदा देना चाहिए।” आज वो नहर सब्जी, धान और गेहूं की खेती को हरा-भरा रख रही है।

    71 साल की उम्र में भी रुकने का नाम नहीं!

    नहर पूरी करने के बाद लौंगी रुके नहीं। अब वो खजरहा जंगल में दो नए तालाब खोद रहे हैं जो लगभग 100 फीट चौड़े और 12 फीट गहरे। मकसद? कई गांवों तक पानी पहुंचाना और मछली पालन शुरू करना। सुबह आंख खुलते ही कुदाल उठाकर निकल पड़ते हैं। वो कहते हैं, “मेरा मकसद सिर्फ अपने गांव तक सीमित नहीं। कई गांवों को पानी चाहिए। मैं यहीं रहूंगा, यहीं मरूंगा।”

    बता दें कि लौंगी महादलित समुदाय से हैं, पढ़े-लिखे नहीं, लेकिन उनके जज्बे ने पूरे बिहार को प्रेरित किया। मीडिया में ‘कैनाल मैन’ और ‘दूसरा दशरथ मांझी’ कहकर उनकी तारीफ हो रही है। पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी समेत कई नेता उनके गांव पहुंच चुके हैं। लेकिन लौंगी अभी भी साधारण झोपड़ी में रहते हैं। उनकी मांग साफ है कि सरकार उन्हें सम्मान और आर्थिक मदद दे, ताकि बुढ़ापे में संघर्ष न करना पड़े।

    बिहार की असली शान हैं लौंगी भुइयां

    लौंगी भुइयां सिर्फ नहर नहीं, उम्मीद की नहर खोद रहे हैं। ऐसे लोग बिहार की असली शान हैं, जो बिना सरकारी सहायता के समाज की सेवा करते हैं। सरकार को न सिर्फ पेंशन और आवास देना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘जल पुरुष’ या ‘कर्मयोगी सम्मान’ जैसे पुरस्कार देकर प्रेरणा का प्रतीक बनाना चाहिए। क्योंकि जब एक 71 साल का बुजुर्ग पहाड़ चीर सकता है, तो हम सबको लगता है कि कुछ भी असंभव नहीं!

    लौंगी भुइयां की कहानी बताती है कि सच्ची मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। आप क्या सोचते हैं? कमेंट में जरूर बताएं कि क्या सरकार को अब इन महानुभावों का ध्यान रखना चाहिए?

    Shagun

    Keep Reading

    Bharat Tiwari Encounter: Major decision by the Bihar government; a retired High Court judge will conduct a judicial inquiry.

    भरत तिवारी एनकाउंटर: बिहार सरकार का बड़ा फैसला, सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज करेंगे न्यायिक जांच

    Shared heritage gave the country 'Amrit' (nectar), while extremism is spreading 'poison'!

    साझी विरासत ने देश को दिया ‘अमृत’ तो कट्टरपंथ दे रहा ‘ज़हर!’

    Idli. For just one rupee—not a bad deal!

    इडली. सिर्फ एक रुपए में, सौदा बुरा नहीं !

    पीओके में भीतरी बगावत बनी पाकिस्तान के लिए सबसे गंभीर चुनौती

    Trump's Stern Message to Iran: 'A Very Good Deal' or 'The Other Path'

    पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत

    Minors turning violent, and childhood losing its innocence: Who, ultimately, is to blame?

    बेटियों के साथ दरिंदगी को लेकर कैसे जी रहा है ये सभ्य समाज!

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद BJP में शामिल हो सकते हैं VFS कैपिटल के MD कुलदीप माइती

    पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद BJP में शामिल हो सकते हैं VFS कैपिटल के MD कुलदीप माइती

    June 22, 2026
    An ocean of yoga enthusiasts surges in Aligarh, embodying the spirit of ‘Yogah Karmasu Kaushalam’ (Yoga is excellence in action).

    ‘योगः कर्मसु कौशलम्’ के साथ अलीगढ़ में उमड़ा योग का महासागर

    June 21, 2026
    Mamta Charitable Trust's Grand Yoga Camp: "Lucknow will practice yoga; Lucknow will become disease-free."

    ममता चैरिटेबल ट्रस्ट का भव्य योग शिविर: “लखनऊ करेगा योग, लखनऊ बनेगा निरोग”

    June 21, 2026
    Bharat Tiwari Encounter: Major decision by the Bihar government; a retired High Court judge will conduct a judicial inquiry.

    भरत तिवारी एनकाउंटर: बिहार सरकार का बड़ा फैसला, सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज करेंगे न्यायिक जांच

    June 21, 2026

    जिन्हें हम बचपन में विलेन समझते थे, वही हमारे जीवन के सबसे बड़े हीरो निकले: फादर्स डे पर Pocket FM की खास पेशकश ‘The Villain Who Raised Me’

    June 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading