
काशी में कुछ साल पहले ही शुरू हुई देवदीपावली देखते-देखते दुनिया भर में छा गई है। इस अदभुत आयोजन की सबसे खास बात यह है कि अलग-अलग घाटों, पोखरों, कुंडों को दियों से पाटने की किसी को जिम्मेदारी नहीं देनी होती। सबकुछ स्वतःस्फूर्त हो रहा है। एक घाट को कोई संस्था सजाने में जुटी है तो दूसरे घाट को कोई संघटन सजाता-संवारता है। लोग अपने-अपने घरों से भी दिये लाकर घाटों की सीढ़ियां रोशन कर रहे हैं।
हफ़्तों पहले से घाटों को साफ करने, रंग-रोगन की भी इसी तरह की मुहिम दिखाई देती है। पहले आज के दिन केवल राजेन्द्र प्रसाद घाट पर सांस्कृतिक आयोजन और विशेष गंगा आरती होती थी, लेकिन अब एक साथ कई घाटों पर होने लगी है। अगर यह कहा जाए कि काशी में पूरे साल होने वाले आयोजनों में इसका स्थान सबसे ऊपर हो चला है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।







