लखनऊ। जीवन कोई परफेक्ट स्क्रिप्ट नहीं है। यह कभी पैजामा देता है तो नाड़ा खींच लेता है, कभी शर्ट का बटन तोड़ देता है। फिर भी यह इतना सुंदर है कि इससे इश्क कर लिया जाए। सच्ची खुशी इसी में है कि हम इसे जितना मिला है, उतना मुस्कुराते हुए जिएं।
न घमंड करो, न उदास हो जाओ
अगर उपलब्धियों से घमंड हो रहा है तो अपने से आगे वालों को देख लो। और अगर विपत्तियां अवसाद दे रही हैं तो पीछे वालों को देखो।
हममें से कोई सबसे आगे नहीं है, न ही सबसे पीछे। हम सब बीच में हैं बस अपने-अपने हिस्से की खुशियों और संघर्षों के साथ। जो चीज हमें सबसे ज्यादा तकलीफ दे रही है, वह भी तभी तक है जब तक जीवन है। जीवन चला गया तो वह दुख भी नहीं रहेगा। फिर क्यों न मुस्कुराकर जी लें?
जीवन क्रिकेट है, फुटबॉल नहीं
जीवन फुटबॉल जैसा नहीं, जहां एक चूक के बाद भी दूसरा मौका मिल सकता है। यह क्रिकेट है जो एक बार गेंद विकेट छू गई तो आउट! फिर कितना भी कोशिश कर लो, बैट दोबारा नहीं मिलेगा।
जिंदगी बार-बार बाउंसर फेंकती है। हमारी ड्यूटी है कि उसे रोकते रहें। छक्का-चौका न लगे तो सिंगल ही सही। और अगर सिंगल भी न मिले तो ओवर चाट जाना भी बुरा नहीं। पचास ओवर तो बस इस उम्मीद पर खेले जाते हैं कि कहीं कोई फुलटॉस आ ही जाएगा। मजा खेलने में है, रन तो बाद की बात है।
फेल होने का भी अपना मजा है
कल्पना कीजिए — अखाड़े में हारने वाला पहलवान धूल झाड़कर खड़ा होता है और जीतने वाले को आँख मारकर मुस्कुरा देता है। तुरंत सारे दर्शक उस हारे हुए की तरफ हो जाएंगे। जीवन को ऐसे भी जिया जा सकता है। फेल होने का अपना अलग स्वाद है। यह हमें सिखाता है, तोड़ता नहीं।
स्कूल टॉपर बनना जरूरी नहीं
किसी एक फील्ड में फेल होने का मतलब यह नहीं कि सारे रास्ते बंद हो गए। देश के ज्यादातर प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री या बड़े उद्योगपति स्कूल टॉपर नहीं रहे। फिर भी उन्होंने अपनी पिच पर डटकर खेला और छक्के लगाए। पिच पर डटे रहना ही सबसे महत्वपूर्ण है। कोई न कोई गेंद पर छक्का लग ही जाएगा।
परिवार और समाज के साथ अवसाद का सबसे बड़ा इलाज
अवसाद का दौर हर किसी के जीवन में आता है। लेकिन परिवार और समाज मिलकर हमें हमेशा बाहर निकालते हैं। भारतीय समाज भले सिनेमा में बदनाम हो, हकीकत यह है कि यह किसी को अकेला नहीं छोड़ता। किसी न किसी रूप में साथ खड़ा हो ही जाता है। इसलिए परिवार और समाज से जुड़े रहना सबसे अच्छा निवेश है।अंत में…
यह जिंदगी बहुत खूबसूरत है।
चाहे कितनी भी गेंदें बाउंसर हों, मुस्कुराते हुए कह दो कि “लभ यू जिंदगी!” खेलते रहो। मुस्कुराते रहो। और डटे रहो।
क्योंकि जीवन सिर्फ रनों के लिए नहीं, खेलने के लिए है।







