50 लाख के लिए “जिंदा लाश” का ड्रामा! : दिल्ली के दो कपड़ा व्यापारियों ने रचा ऐसा घिनौना प्लान, सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे
दिल्ली के कपड़ा कारोबारी कमल सोमानी और आशीष खुराना अपने ही नौकर के नाम पर कराया था 50 लाख का बीमा, फर्जी श्मशान रसीद से ठगने की थी साजिश -मौके पर धर लिए गए
ब्रजघाट (गढ़मुक्तेश्वर)। गंगा किनारे श्मशान घाट। दो व्यक्ति चादर में लिपटी “लाश” लेकर पहुंचे। रोते-बिलखते अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे।
जैसे ही पंडित जी ने चादर हटाने को कहा – सबके होश उड़ गए।
चादर में था प्लास्टिक और कपड़े का पुतला!पूछताछ में जो काला सच सामने आया, वो किसी घटिया फिल्म की स्क्रिप्ट से भी ज़्यादा शर्मनाक था।
दिल्ली के सदर बाज़ार के बड़े कपड़ा व्यापारी
- कमल सोमानी
- आशीष खुराना
इन दोनों ने अपने यहाँ काम करने वाले एक गरीब नौकर के नाम पर 50 लाख रुपये का लाइफ इंश्योरेंस कराया था।
प्लान था:
- पुतले का “अंतिम संस्कार” करवाओ
- ब्रजघाट श्मशान घाट की रसीद लो
- उस रसीद के आधार पर मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाओ
- इंश्योरेंस कंपनी से 50 लाख रुपए हड़पो
- और असली नौकर? वो तो जिंदा ही रहेगा, पता भी नहीं चलेगा!
पुलिस ने दोनों को मौके से ही धर दबोचा। दोनों अब जेल में हैं। शुरुआती जाँच में दोनों युवक कई सवालों पर उलझते नज़र आए, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

लोग क्या बोल रहे हैं?
अश्विनी यादव (स्थानीय निवासी): “बहुत शानदार स्कीम बनाई थी साहब, हॉलीवुड भी फेल है! लेकिन भगवान की लाठी में आवाज़ नहीं होती।”
रमेश राज (व्यापारी): “50 लाख के लिए इंसान की लाश तक को खेल बना दिया? ये दिमाग शैतान भी नहीं लगा सकता!”
संजय शर्मा (युवा): “इंश्योरेंस के नाम पर कितनी नीचता पर उतर आए लोग… गरीब की जिंदगी को भी दाँव पर लगा दिया।”
पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ सालों में इंश्योरेंस फ्रॉड के ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन “जिंदा लाश” वाला ड्रामा पहली बार देखा गया।
https://x.com/i/status/1994001036827349140
बीमा फ्रॉड: लालच की गहराई में उतरते इंसान, भारत के कुछ अन्य चौंकाने वाले मामले
बीमा धोखाधड़ी आज एक बड़ा सिरदर्द बन चुकी है। भारत में हर साल इंश्योरेंस कंपनियों को फ्रॉड से करीब 30,400 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
लालच के कारण लोग मौत, बीमारी और गरीबी तक को हथियार बना लेते हैं। ये मामले न सिर्फ कानून तोड़ते हैं, बल्कि समाज के नैतिक स्तर को भी गिराते हैं। आइए, कुछ प्रमुख मामलों पर नजर डालें, जो बताते हैं कि इंसान का लालच कितना नीचे गिर सकता है:
1. मरते-जीते लोगों को ‘बीमा’ करवाकर करोड़ों का घोटाला (सांभल, 2025)क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश के सांभल जिले में 7 साल से चल रहा एक मल्टी-क्रोर फ्रॉड उजागर हुआ। गैंग ने गरीब और बीमार किसानों की पहचान चुराकर उनके नाम पर लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी कीं। पॉलिसी लेने के कुछ महीनों बाद ही फर्जी मौत के सर्टिफिकेट बनवाकर क्लेम किया। मौत की वजह बताई गई हार्ट अटैक, लेकिन ज्यादातर लोग पहले से बीमार थे या मर चुके थे।
नुकसान: SBI लाइफ को UP में ही 7 करोड़, ICICI प्रूडेंशियल को 4.5 करोड़, कनारा HSBC को 7 करोड़ और इंडिया फर्स्ट लाइफ को 10 करोड़ का चूना लगाया। कुल 8 राज्यों में सैकड़ों करोड़ का घोटाला।
लालच का स्तर: गरीबों की मौत को कमाई का जरिया बना दिया। डॉक्टरों, एजेंट्स और गांव के सेंटरों को शामिल कर एक पूरा नेटवर्क खड़ा किया। पुलिस ने कई FIR दर्ज कीं, लेकिन ये दिखाता है कि लालच कैसे कमजोर वर्ग को शिकार बनाता है।
2. फर्जी सड़क हादसों में ‘मारे गए’ सैकड़ों किसान (हरियाणा, 2017-2019)क्या हुआ?
हरियाणा के गांवों में 100 से ज्यादा किसानों को दुर्घटना बीमा कराया गया, जो पहले कभी पॉलिसी नहीं लेते थे। क्लेम के समय सभी की ‘मौत’ सिर पर चोट से बताई गई, और शव अस्पताल में ‘मृत लाया गया’ दिखाया।
जांच में पता चला कि ये सभी हादसे फर्जी थे – गैंग ने जानबूझकर ‘मृत्यु’ का ड्रामा रचा।
नुकसान: करोड़ों का फ्रॉड, जिसमें 3 मोबाइल नंबरों से सारे क्लेम कनेक्ट थे। कंपनियां जैसे भारती AXA ने जांच के बाद पुलिस को सौंपा।
लालच का स्तर: बीमारी और गरीबी का फायदा उठाकर लोगों को ‘मार’ डाला कागजों पर। ये न सिर्फ धोखा है, बल्कि हत्या जैसा अपराध – क्योंकि असली मरीजों को असली इलाज से वंचित किया।
3. 20 साल के युवक को ‘मरा’ घोषित कर 1 करोड़ का क्लेम (पंजाब, 2025)
क्या हुआ? पंजाब में एक गैंग ने 20 साल के विशाल नाम की आईडी चुराकर 4 पॉलिसियां लीं। फिर फर्जी मौत का सर्टिफिकेट, डॉक्यूमेंट्स बनाकर 1 करोड़ का क्लेम करने की कोशिश की। युवक जिंदा था, लेकिन उसकी पहचान का दुरुपयोग कर ‘मौत’ का नाटक रचा।
नुकसान: क्लेम रुक गया, लेकिन जांच से पता चला कि ये एक बड़ा रैकेट था।
लालच का स्तर: जवान इंसान की जिंदगी को खत्म करने का झूठ बोलकर परिवार को बर्बाद करने की साजिश। ये दिखाता है कि फ्रॉड में उम्र कोई मायने नहीं रखती।
अब सवाल सिर्फ यही है –
पैसे के लिए इंसान का स्तर कितना और नीचे गिरेगा?
कभी सोचा था कि किसी दिन “मौत” भी बिकने लगेगी?
(दोनों आरोपी फिलहाल जेल में, केस दर्ज, आगे की जाँच जारी)







