- डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा जातिवीहिन समाज के निर्माण के लिए जातियों का बंधन तोड़ना होगा
- सुभारती विश्वविद्यालय में 21 अंतरजातीय-अंतरधार्मिक जोड़ों को सम्मानित किया गया
मेरठ/लखनऊ: सनातन संगम न्यास (सुभारती इकाई) ने स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में एक अनूठा सम्मान समारोह आयोजित किया, जहां अंतरजातीय-अंतरधार्मिक विवाह करने वाले 21 जोड़ों को सम्मानित किया गया। ये अधिकांश विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य थे, जिन्होंने जाति के बंधन तोड़कर ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के आदर्श को जीवंत किया।
मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश कैबिनेट मंत्री (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) सुनील शर्मा ने कहा, “राजनीति ने समाज को जातियों में बांट दिया है, लेकिन सनातन धर्म कुरीतियों को त्यागकर आगे बढ़ता है। यह कार्यक्रम सनातन के मूल भाव को मजबूत करने वाला है।”
सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने जोर दिया: “जातिविहीन समाज बनाना होगा, तभी देश आगे बढ़ेगा। पूर्वजों की गलतियों के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी होगी और क्षमा भी करनी होगी। यह डॉ. भीमराव अंबेडकर का सपना था – जातिविहीन समाज ही सशक्त राष्ट्र बनाता है।”

कार्यक्रम अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा (भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष) ने डॉ. अतुल कृष्ण की पहल को सराहा, जबकि महानिदेशक मेज. जन. (डॉ.) जी.के. थपलियाल ने याद दिलाया कि महाभारत काल तक अंतर्जातीय विवाह सामान्य थे। अब विकसित भारत के लिए युवाओं को इसी सोच से तैयार करना होगा।
सनातन संगम न्यास चार सूत्रों पर चलता है: सहभोज, नाम से उपनाम हटाना, सहधर्माचरण, और अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाह को प्रोत्साहन। सम्मानित जोड़ों में शामिल थे डॉ. शल्या राज-डॉ. रोहित रविंद्र, डॉ. कृष्णामूर्ति-डॉ. आकांक्षा, डॉ. राहुल बंसल-डॉ. रानी बंसल, और कई अन्य। इस बीच वीर रस कवि डॉ. हरिओम पंवार की ओजस्वी कविताओं ने माहौल में ऊर्जा भर दी। संचालन डॉ. मोनिका मेहरोत्रा ने किया।
बता दें कि यह आयोजन सामाजिक समरसता की मिसाल है जो सिर्फ जाति के नाम पर हो रहे भेदभाव को खत्म कर एकजुट भारत की नींव रखने की दिशा में मजबूत कदम!







