लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट 2026-27 को आम आदमी के लिए निराशाजनक करार देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बजट महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा और मध्यम वर्ग की समस्याओं पर खरा नहीं उतरा।
अखिलेश यादव ने कहा, “हर साल बड़े-बड़े वादे होते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की चीजें आम आदमी की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। महंगाई पर कोई ठोस रोडमैप नहीं है।”
उन्होंने प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरा:
- महंगाई और ईंधन: ईंधन पर टैक्स घटाने और आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी कम करने की मांग की।
- किसान: एमएसपी को कानूनी गारंटी, खाद-बीज-डीजल की बढ़ती लागत पर राहत और फसल बीमा योजना में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात की। कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा खोखला साबित हो रहा है।
- बेरोजगारी: सरकारी भर्तियां समय पर नहीं, पेपर लीक और परीक्षा देरी से युवा निराश। एमएसएमई को सस्ता लोन और खाली पद भरने की मांग।
- शिक्षा-स्वास्थ्य: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर-दवाओं की कमी, स्कूलों में शिक्षक नहीं। शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी गई।
- सामाजिक कल्याण: दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यकों के लिए योजनाओं में कटौती। निजीकरण से आम आदमी पर बोझ बढ़ा।
- उत्तर प्रदेश: यूपी जैसे बड़े राज्य को विशेष पैकेज नहीं, राजनीतिक आधार पर भेदभाव का आरोप।
अखिलेश ने कहा, “बजट में आंकड़ों का खेल है, लेकिन जमीनी सच्चाई अलग है। अगर सरकार मजबूत भारत चाहती है तो गरीब, किसान, युवा और मध्यम वर्ग को प्राथमिकता देनी होगी।”
उन्होंने संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी बजट के हर प्रावधान की जांच करेगी और जहां जनता के हितों की अनदेखी हुई, वहां सड़क से संसद तक आवाज उठाएगी। महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे पर जनआंदोलन की संभावना भी जताई।
अखिलेश यादव ने विपक्ष की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, “लोकतंत्र में आलोचना दुश्मनी नहीं, बल्कि सुधार का रास्ता है। सरकार को इसे स्वीकार करना चाहिए।”
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव की यह तीखी प्रतिक्रिया केंद्रीय बजट 2026 को आम जनता के लिए ‘मायूस करने वाला’ बताती है और सरकार से जमीनी हकीकत पर ध्यान देने की अपील करती है।







