आम आदमी पार्टी ने उठायी मांग : दिल्ली की तर्ज पर यूपी सरकार भी आधे करे बिजली के दाम

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लखनऊ। आम आदमी पार्टी बिजली के दामों में अक्टूबर माह से की जाने वाली 12 प्रतिशत की बढोत्तरी का कड़ा विरोध करती है और सरकार से मांग करती है कि बिजली बढ़ोतरी के आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। जिला संयोजक गौरव माहेश्वरी ने कहा कि बिजली की दरों में बार-बार वृद्धि आम आदमी के ऊपर किसी अत्याचार से कम नही है। बिजली विभाग का तर्क गलत है कि उसकी लागत अधिक आ रही है। वास्तव में इसका मूल कारण बिजली विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और गलत नीतियां हैं। सरकार और निजी बिजली कंपनियों के बीच सांठ-गांठ के कारण सरकारें उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए जान-बूझकर महंगी बिजली खरीदती है और इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता है ।
जिला संगठन संयोजक कमलेन्द्र सिंह श्रीनेत ने कहा कि ग्रामीण घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की दरों में 260 से 350 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है, जिसके चलते गरीब परिवार बिजली नहीं ले पायेगा। बिजली विभाग चाहता है कि गरीब परिवार रात के अंधेरे में ही अपना जीवन बिताये। वरिष्ठ नेता नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि यूपी में लाइन लॉस भी बहुत अधिक है जो वास्तव में भ्रष्टाचार के कारण ही है। बिजली चोरी को विभाग की मिलीभगत से लाइन लॉस में डाल दिया जाता है और इसकी भरपाई भी आम उपभोक्ता को करना पड़ता हैं ।
आप जिला प्रवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार ने कम दरों पर ही बिजली की उपलब्धता को बढ़ाया है, बिजली कटौती कम करने के लिए कठोर कड़े कदम उठाये और उसके दाम भी आधे किये। दिल्ली में यह भी व्यवस्था की गयी है कि आगामी सितम्बर माह से बिजली दो घण्टे से अधिक की कटौती पर बिजली कंपनियां उपभोक्ता को पेनल्टी के रूप में धनराशि का भुगतान करेगी। उपभोक्ताओं के हित में ये एक क्रान्तिकारी कदम है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली सरकार ऐसा कर सकती है तो प्रदेश सरकार क्यों नहीं? आम आदमी पार्टी मांग करती है कि अक्टूबर माह से होने वाली बिजली बढ़ोत्तरी वापस ली जाए, अन्यथा बिजली दर बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव के विरोध में आप जल्द ही आन्दोलन शुरू करेगी।

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