आखिर वह कौन सी मजबूरियां थी जिसे सुशांत समझ न सकें?

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मशहूर सिने स्टार सुशांत सिंह राजपूत का यूँ चले जाना किसी को भी नहीं समझ में नहीं आ रहा है आखिर वह कौन सी मजबूरियां थी जिसे वह समझ न सकें ! सुशांत सिंह राजपूत द्वारा अवसाद का शिकार होकर आत्महत्या के मामले ने अवसाद की समस्या को एक फिर जीवंत कर दिया है। ऐसा नहीं कि अवसाद किसी को होता ही न हो या गिने-चुने लोग की इसके शिकार होते हों।

जीवन में जिस तरह सुख की परिस्थतियां आती हैं, उसी तरह निराशा के भाव भी आते हैं। अब परिस्थितियां कुछ इस तरह की हो गई हैं जिनमें कुछ लोग अवसार की तीव्रता को सहन नहीं कर पाते। फलस्वरूप वे जान दे देने की हद तक चले जाते हैं। यही वह बिंद है जहां ऐसे लोगों का अवलोकन ज्यादा जरूरी हो जाता है। ठीक उसी तरह जैसे अन्य किसी गम्भीर बीमारी में होता है।

अवसाद के ज्यादा कारण मामलों को सही अर्थों में न लिए जाने के कारण पैदा होते हैं। यानी कभी किसी बात को अनावश्यक रूप से अधिकतम तीव्रता या चरम में ले लिया जाता है जबकि हकीकत में ऐसा होता नहीं है। नतीजा यह होता है कि ऐसी चरम स्थिति में तनाव भी अधिकतम सीमा तक पहुंच जाता है।

और वह सकारात्मक सोच को तो एकदम समाप्त ही कर देता है। याद रखने की बात है जीवन की सफलता का रहस्य उसकी सकारात्मकता में ही है। ऐसा न होने पर ऐसी परिस्थितियां पैदा होती हैं जिनका कोई अर्थ नहीं होता लेकिन अनजाने में ही लोग उनका शिकार हो जाते हैं। जैसा कि अभी हमने कहा, ऐसी परिस्थिति में संबंधित व्यक्ति की देखभाल और जरूरी हो जाती है।

सही मायने में यह काम वे लोग ही कर सकते हैं जो उस व्यक्ति के करीब हों क्योंकि वे ही उसकी मानसिक दशा के बारे में अधिक सूचित रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि अपने आसपास ऐसे लोगों पर विशेष ध्यान रखा जाय जो तनावग्रस्त हों। उनका ख्याल रखना बहुत जरुरी हो जाता है।

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