अजबगढ़ का किला, राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच बसा हुआ है, जो भानगढ़ किले से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह किला अपने रहस्यमयी इतिहास और डरावनी कहानियों के लिए जाना जाता है, जो इसे भानगढ़ की तरह ही रहस्यमय बनाता है। हालांकि, अजबगढ़ के बारे में भानगढ़ जितनी प्रसिद्धि या लिखित जानकारी उपलब्ध नहीं है, फिर भी स्थानीय लोग और कुछ इतिहासकार इसे एक डरावनी और रहस्यमयी जगह मानते हैं।
क्या है अजबगढ़ किले का इतिहास :
अजबगढ़ किला 17वीं शताब्दी में बनवाया गया था और इसे राजपूत शासकों द्वारा निर्मित माना जाता है। यह किला रणनीतिक रूप से सरिस्का के जंगलों में बनाया गया था, ताकि शत्रुओं से रक्षा की जा सके। इसकी बनावट में कई गुप्त रास्ते और सुरंगें शामिल थीं, जो इसे और रहस्यमयी बनाती हैं। ये गुप्त रास्ते संभवतः युद्ध के समय भागने या रसद पहुंचाने के लिए बनाए गए थे।
इस किले में राजा के सैनिक रहा करते थे क्योंकि यह किले की सुरक्षा दीवार से एकदम लगकर बनाए गए हैं। बताया जाता है कि इस किले का निर्माण कार्य राजा माधव सिंह जी के पुत्र राजा अजब सिंह राजावत ने साल 1589 में शुरू करवा दिया था और 5 साल के अंदर के भव्य रूप में ही बनकर तैयार हो गया था।
बताया जाता है कि वर्ष 2012 तक इस किले में वन विभाग की फोरेस्ट गार्ड चौकी थी, उस समय यहां एक वनरक्षक जो उम्रदराज थे वे इसी किले में रहते थे, रात को भी अकेले ही यहां रहते थे।
जानकारों के अनुसार यह अजबगढ़ का किला लगभग 160 सालों तक यहां के राजाओं द्वारा उपयोग में लाया जाता रहा और फिर समय के बदलते परिवेश के साथ में इस परिवार के सारे पूर्वज यहां से कुछ दूर जाकर बस गए।
कहा जाता है कि अजबगढ़ से जुड़े हुए डरावने अनुभव के किस्से अक्सर सुनने में आया करते थे। बताया जाता है कि भारत के सबसे डरावने माने जाने वाले स्थान में से एक भानगढ़ के पास होने की वजह से अजबगढ़ गांव में देखे गए अजीब अनुभव के कारण काफी लोग गांव छोड़कर चले गए थे शायद यही वजह है कि आज भी अजबगढ़ की हवेलियों और कोठियां में उनके मालिक वापस लौटकर नहीं आना चाहते हैं।

अजबगढ़ किले का रहस्य और डरावनी कहानियाँ
खाली पड़े घर और खंडहर: अजबगढ़ गांव और किले के आसपास के घर आज भी खाली और खंडहर के रूप में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ रहने वाले लोग अचानक गायब हो गए या रहस्यमयी परिस्थितियों में मर गए। कुछ लोग इसे श्राप से जोड़ते हैं, हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं है।
गुप्त रास्तों का रहस्य: किले में मौजूद गुप्त सुरंगें और रास्ते आज भी रहस्य बने हुए हैं। कहा जाता है कि ये सुरंगें किले को अन्य स्थानों, शायद भानगढ़ या अन्य किलों से जोड़ती थीं। कुछ लोग मानते हैं कि इन सुरंगों में खजाने छिपे हो सकते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि इनमें भटकती आत्माएँ हैं।
अलौकिक घटनाएँ: स्थानीय लोगों और कुछ पर्यटकों ने दावा किया है कि किले के आसपास अजीब सी आवाजें, जैसे चीखें या कदमों की आहट, सुनाई देती हैं। कुछ लोगों ने रात में अजीब छायाएँ देखने की बात कही है, जिसके कारण लोग अकेले यहाँ जाने से डरते हैं।
शाम के बाद प्रवेश पर रोक: भानगढ़ की तरह ही, अजबगढ़ में भी सूर्यास्त के बाद जाने की मनाही है। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने यहाँ सूर्यास्त के बाद प्रवेश पर प्रतिबंध लगा रखा है, जिससे इसके रहस्यमयी होने की धारणा और मजबूत होती है।
आखिर कहाँ तक जाता है गुप्त सुरंगों का जाल
अजबगढ़ किले का सबसे खतरनाक और रहस्यमयी फीचर इसकी गुप्त सुरंगें हैं। ये सुरंगें किले के नीचे और आसपास के जंगलों में फैली हुई हैं। इनके बारे में कुछ खास बातें:
- अज्ञात गंतव्य: इन सुरंगों का अंतिम छोर कहाँ जाता है, यह आज तक कोई नहीं जान पाया। कुछ का मानना है कि ये भानगढ़ या अन्य किलों तक जाती हैं।
- सुरंगों की खतरनाक स्थिति: कई सुरंगें पुरानी होने के कारण जर्जर हो चुकी हैं, और इनमें प्रवेश करना जानलेवा हो सकता है। कुछ सुरंगों में हवा की कमी या अचानक ढहने का खतरा रहता है।
- स्थानीय किंवदंतियाँ: कहा जाता है कि इन सुरंगों में खजाने के साथ-साथ अलौकिक शक्तियाँ भी निवास करती हैं। कुछ लोगों ने दावा किया है कि सुरंगों में प्रवेश करने के बाद उन्हें अजीब अनुभव हुए, जैसे किसी के पीछा करने की आहट या अचानक ठंडक महसूस होना।
अजबगढ़ का किला, राजस्थान के सरिस्का जंगल में स्थित, अपनी रहस्यमयी कहानियों के लिए जाना जाता है। हालांकि यह भानगढ़ किले जितना प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय लोगों और कुछ पर्यटकों के बीच इसकी डरावनी कहानियाँ प्रचलित हैं। नीचे दो ऐसी प्रचलित कहानियाँ दी गई हैं, जो लोगों में डर पैदा करती हैं। ये कहानियाँ स्थानीय लोककथाओं और मौखिक परंपराओं पर आधारित हैं, जिनकी कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है।
1. रात में सुनाई देने वाली रहस्यमयी चीखें
कहानी: स्थानीय लोगों के अनुसार, अजबगढ़ किले के आसपास रात के समय अजीब और डरावनी चीखें सुनाई देती हैं, जो मानव या किसी जानवर की नहीं लगतीं। कुछ गाँववासियों का दावा है कि ये चीखें किले की गुप्त सुरंगों से आती हैं। एक प्रसिद्ध कहानी के अनुसार, एक बार कुछ साहसी युवा रात में किले के पास गए थे, ताकि इन चीखों का कारण पता कर सकें। जैसे ही वे किले की दीवारों के पास पहुंचे, उन्हें तेज चीखें सुनाई दीं, और अचानक एक ठंडी हवा का झोंका आया। डर के मारे वे भाग खड़े हुए। बाद में उनमें से एक युवक ने बताया कि उसे लगा जैसे कोई अदृश्य शक्ति उनका पीछा कर रही थी।
डर का कारण: इस कहानी ने लोगों में यह धारणा बनाई है कि किले में कोई अलौकिक शक्ति निवास करती है, जो रात में सक्रिय हो जाती है। यह कहानी इतनी प्रचलित है कि लोग सूर्यास्त के बाद किले के आसपास जाने से कतराते हैं।
2. गायब हुए लोगों का रहस्य
कहानी: एक अन्य प्रचलित कहानी के अनुसार, कई साल पहले कुछ लोग किले की गुप्त सुरंगों में खजाना ढूंढने के लिए गए थे। इनमें से कुछ लोग कभी लौटकर नहीं आए। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये लोग या तो सुरंगों में भटक गए या किसी अलौकिक शक्ति का शिकार हो गए। एक विशेष घटना में, एक व्यक्ति जो किले की सुरंगों का नक्शा बनाने की कोशिश कर रहा था, अचानक गायब हो गया। उसके साथियों ने बताया कि वह सुरंग में अकेले गया था, और कुछ देर बाद उन्हें उसके चीखने की आवाज सुनाई दी, लेकिन जब वे वहाँ पहुंचे, तो वहाँ कोई नहीं था।
डर का कारण: इस कहानी ने अजबगढ़ की गुप्त सुरंगों को और भी रहस्यमयी और खतरनाक बना दिया है। लोग मानते हैं कि इन सुरंगों में कोई बुरी शक्ति है, जो वहाँ प्रवेश करने वालों को निगल लेती है। इस कारण लोग अकेले या बिना गाइड के किले में जाने से डरते हैं।
लोग अकेले जाने से क्यों डरते हैं?
भानगढ़ से निकटता: भानगढ़ किला, जो भारत का सबसे भूतिया किला माना जाता है, अजबगढ़ से मात्र 25 किलोमीटर दूर है। भानगढ़ की डरावनी कहानियाँ अजबगढ़ को भी प्रभावित करती हैं, जिससे लोग इसे भी उसी तरह डरावना मानते हैं।
जंगल का एकांत: सरिस्का के घने जंगलों में स्थित होने के कारण यहाँ एकांत और सन्नाटा डर पैदा करता है। रात में जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।
स्थानीय कहानियाँ: स्थानीय लोग बताते हैं कि किले के आसपास रहस्यमयी घटनाएँ होती हैं, जैसे अचानक ठंडी हवा का झोंका, बिना कारण के डर का एहसास, या असामान्य आवाजें।
क्या है सच?
अगर सही मायने में कहा जाये तो अजबगढ़ के रहस्यों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है। कई इतिहासकार और पुरातत्वविद मानते हैं कि किले की डरावनी कहानियाँ स्थानीय लोककथाओं और भानगढ़ की प्रसिद्धि से प्रभावित हो सकती हैं। गुप्त सुरंगें और खंडहर वास्तव में किले की रणनीतिक बनावट का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इनके साथ अलौकिक कहानियाँ जोड़ दी गई हैं। फिर भी, किले का एकांत और इसकी जर्जर हालत इसे रहस्यमयी और डरावना बनाती है।
अगर आप वास्तव में रोमांच और रहस्य के शौकीन हैं, तो अजबगढ़ का किला आपके लिए एक रोमांचक जगह हो सकता है, लेकिन सलाह दी जाती है कि आप इसे दिन के समय और समूह में ही देखें। सूर्यास्त के बाद यहाँ जाना खतरनाक हो सकता है, न केवल अलौकिक कहानियों के कारण, बल्कि जंगली जानवरों और जर्जर संरचनाओं के कारण भी। -प्रस्तुति : सुशील कुमार







