उपेन्द्र नाथ राय
छत्तीसगढ़, 07 दिसम्बर। कई लेयर में एंबुस बनाया, फिर गांव वालों को धान काटते हुए, खेत घुमते हुए, राह में जाते हुए एक-एक कर पकड़ लाये। एक जगह इकट्ठा किया और सभी को एक बाड़े में कैद कर दिया, फिर शुरु हुआ ठांय-ठांय। कोटेनार गांव की तरफ से माओवादियों को दौड़ाना शुरु किया। एक्वा गांव, गुंडा, कचनार पोटेनार सहित चार गांवों के लगभग 250 लोगों को जवानों पहले ही एक जगह इकट्ठा कर अपनी सुरक्षा में रख लिया था। इस मुठभेड़ में कंपनी नंबर दो साफ हो गयी।
आगे से पहले ही जवानों ने घेराबंदी कर रखी थी। सबसे पहले तीन दिसम्बर को सुबह सात बजे ही तीन माओवादियों को ढेर कर दिया। दूसरी बार लगभग दो बजे शाम को एक्वा गांव के पास पांच नक्सलियों को ढेर कर दिया। यह मुठभेड़ तीन दिसम्बर को शुरु हुई और चार दिसम्बर तक चली। पहला जवान 10 से 11 बजे के बीच शहीद हुआ, दूसरा जवान दो से ढाई बजे के बीच शहीद हुआ और तीसरा जवान शाम को चार बजे शहीद हुआ।
पहले आमजन की सुरक्षा, फिर मुठभेड़
मुठभेड़ अब नये मार्डन पद्धति पर होती है। इसका आधार है कार्डन, सर्च एंड कील। पहले एक टुकड़ी सर्च अभियान पर निकलती है। माओवादियों की उस इलाके में रहने की पुष्टि होते ही उस इलाके की जनता को एक जवानों की टुकड़ी इकट्ठा करती है और एक जगह कैद कर देती है, जिससे किसी गांव वाले को क्षति न पहुंचे और सुरक्षित ढंग से माओवादियों को मुठभेड़ के लिए ललकारा जा सके।
पांच किमी के दायरे को घेर रखा था जवानों ने
बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा पर थाना मिरतुर के गांव हकवा, हल्लूर के बीच पहाड़ी एरिया में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ का दायरा पांच किलो मीटर से अधिक था। एक ऐसी जगह जहां पैदल चलना भी मुश्किल काम है, वहां जवानों ने सात से आठ किलो मीटर के दायरे में एंबुस बनाकर माओवादियों को ललकारा। पीछे से उन्हें खदेड़ते गये और माओवादी आगे जवानों द्वारा लगाये गये एंबुस में फंसते गये। हालांकि इसमें तीन जवान भी अपनी जान से हाथ धो बैठे, लेकिन 18 माओवादियों को मारने में सफलता मिली। यह तो उन माओवादियों की सूचना है, जिनका शव पुलिस ने बरामद किया। इसके अतिरिक्त कुछ माओवादियों के शव लेकर भगने में भी माओवादी सफल रहे होंगे। यह सफलता इतनी बड़ी है कि इसमें माओवादियों की कंपनी नंबर दो का लगभग सफाया हो गया। यदि एक-दो बचे भी हैं, तो वे सिर उठाने की जुर्रत नहीं कर सकते।
नीचे से ज्यादा गोलियां पेड़ों पर चलाते हैं जवान
जब भी जंगल में मुठभेड़ होता है। जवान सामने ही गोली नहीं मारते, सामने से ज्यादा वे ऊपर पेड़ों पर गोलियों का निशाना बनाते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि हमेशा डर बना रहता है कि माओवादी पेड़ों पर चढ़कर भी जवानों की निगहबानी करते हैं। ऐसे में नीचे के साथ ही ऊपर से भी डर बना रहता है। ऐसा एक्वानार की पेड़ों पर भी गोलियों के निशान बता रहे हैं कि पुलिस की तैयारी पूरी थी।
यूबीजीएल सेल
यूबीजीएल सेल यानि अंडर बैरल ग्रेनेट लांचर। एके-47 के नीचे लगाया जाता है। इसके माध्यम से ग्रेनेट को लांच करते हैं। इसके ब्लास्ट होने पर काफी क्षति पहुंचती है। इसके अलावा डेटोनेटर लेकर भी चलते हैं, जिसके माध्यम से विस्फोट कराते हैं। एक्वानार के जंगल में भी माओवादियों ने यह लेकर चल रहे थे। कई यूबीजीएल जंगल में मुठभेड़ के बाद देखे गये हैं, जो विष्फोट नहीं हो पाये और वे टूटकर गिर गये हैं। कारतूस के खोखे भी गिरे हुए हैं। एक्वानार में आखिरी मुठभेड़ चार दिसम्बर को हुई और सुबह चार माओवादी मारे गये।
माओवादी भी रखते हैं वायरलेस, कोडवर्ड में ही करते हैं बात
माओवादी वायरलेस पर भी बात करते हैं। उस पर भी संकेतक भाषा का प्रयोग होता है, जिससे वायरलेस सेट पर भी पुलिस उनकी बातों को समझ न सके। जैसे गोंडी में दुश्मन वाया मुंतोर अर्थात् दुश्मन आ रहा है बताना है तो इसके लिए सिर्फ प्याज 25 केजी बोलने से अगला समझ जाएगा कि दुश्मन आ रहा है। इसी तरह दुश्मन अननोर अर्थात दुश्मन जा नहीं रहे के लिए कोड वर्ड- प्याज 28 केजी। दुश्मन अत्तातोर अर्थात दुश्मन अड़े हुए हैं, बताना है तो प्याज 27 केजी। दुश्मन मेट्टाटोर यानि दुश्मन पहाड़ चढ़ रहे अर्थात प्याज 29 केजी। गोंडी में दुश्मन डाउट मंटा अर्थात दुश्मन को पता है प्याज 30 केजी। दुश्मन गंभीर मंता अर्थात दुश्मन काफी ताकतवर है- प्याज 21 केजी। दुश्मन पूना कैंप आपतोर या प्याज 32 केजी। त्रिया मुतोर यानि मुखबिर घुम रहे हैं अर्थात पेपर नौ रिमा। सीआरडीओ अर्थात सीआरडी वाले घुम रहे हैं अर्थात पेपर 10 रिमा। इस तरह से कोड वर्ड प्रयोग करते हैं और यह पूरी बटालियन को दिया जाता है, जिससे वे रटकर इसी भाषा में बात करें।
सोलह माओवादियों की पहचान, सभी पर थे आठ लाख के इनाम
यह मुठभेड़ डीआरजी दंतेवाड़ा–बीजापुर, एसटीएफ एवं कोबरा, सीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा सर्च ऑपरेशन के दौरान शुरु हुआ। थाना भैरमगढ़-नेमेड क्षेत्रान्तर्गत हुए कचीलवार-पोटेनार मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी। इसमें नौ महिला माओवादी साहित कुल 18 माओवादी ढेर हुए। इसमें सिर्फ दो की पहचान नहीं हो पायी, जिनकी पहचान हुई, वे सभी आठ लाख रुपये के इनामी नक्सली हैं। अधिकांश माओवादियों के पीएलजीए कंपनी नम्बर दो से जुड़े रहे हैं। मारे गये माओवादियों में कंपनी नंबर दो का कमांडर मोड़ियम वेल्ला भी शामिल है। इसमें कुछ माओवादी कंपनी नंबर 13 से भी जुड़े हुए हैं।
कंपनी नंबर दो और 13 की थी सूचना
इस मुठभेड़ से पहले पुलिस को सूचना मिली थी कि बीजापुर पश्चिम बस्तर डिवीजन क्षेत्र के थाना भैरमगढ़, जांगला एवं नैमेड के सरहदी क्षेत्रान्तर्गत पोटेनार एवं कचीलवार के जंगल क्षेत्र में PLGA कंपनी नम्बर 02 के कमांडर मोड़ियम वेल्ला, डीव्हीसीएम मोटू कवासी, प्लाटून नम्बर 13 कमांडर झितरू एवं PLGA कंपनी नम्बर 02 व प्लाटून नम्बर 13 के अन्य 25-30 माओवादी उपस्थित हैं। मारे गये माओवादियों में वेल्ला पर 10 लाख रुपये का इनाम था।
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यह सामान हुआ बरामद, ये माओवादी हुए गिरफ्तार
मुठभेड़ स्थल पर सर्च के दौरान एलएमजी, एके 47 राइफल्स, एसएलआर, इंसास, .303 राइफल व अन्य हथियार बरामद हुए हैं। मुठभेड़ में मारे गये माओवादियों के प्रारंभिक तौर पर शिनाख्त में निम्नलिखित माओवादी कैडरों के नाम सामने आये है।
इसमें DVCM वेल्ला मोड़ियम, पदनाम- PLGA कंपनी नम्बर 02 इंचार्ज, ईनाम 10.00 लाख रूपये।
आपराधिक विवरण :- जिला बीजापुर के अलग-अलग थानों में DVCM वेल्ला मोड़ियम के विरूद्ध कुल 44 अपराधिक मामले पंजीबद्ध है।
बड़ी घटना जिसमें शामिल रहा है :-
• वर्ष 2013- झीरम घाटी में हुए हमला में शामिल
• वर्ष -2019 केशकुतुल पुलिस पार्टी पर हमला करने की घटना में शामिल
• वर्ष -2020 मिनपा जिला सुकमा कैम्प अटैक में शामिल
• वर्ष -2021 टेकलगुड़ियम मुठभेड़ में शामिल
• वर्ष -2024 धरमाराम कैम्प अटैक में शामिल
2. CyPC रैनु ओयाम कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख रूपये
3. DVCM सन्नू अवलम, कंपनी नम्बर 07, ईनाम 08.00 लाख रूपये
4. PPCM नन्दा मीड़ियम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
5. PPCM लालू ऊर्फ सीताराम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
6. PPCM राजू पूनेम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
7. PPCM, कामेश कवासी, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
8. PPCM लक्ष्मी ताती, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
9. PPCM बंडी माड़वी, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
10. PPCM सुखी लेकाम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
11. PPCM सोमड़ी कुंजाम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
12. PM चन्दु कुरसम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
13. PM मासे ऊर्फ शांति, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
14. PM रीना मरकाम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
15. PM सोनी माड़वी, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
16. PM संगीता पदम, PLGA कंपनी नम्बर 02, ईनाम 08.00 लाख
शेष मारे गये 02 अन्य माओवादियों की शिनाख्त कार्यवाही जारी है ।
-मुठभेड़ स्थल से बरामद हथियार एवं अन्य सामग्री विवरण:-
1. 01 नग LMG
2. 04 नग AK 47
3. 04 नग 7.62 SLR
4. 01 नग 5.56 INSAS
5. 02 नग .303 रायफल
6. 04 नग Single Shot Rifle,
7. 02 नग BGL Launcher
8. 01 Muzzle Loading rifle
रेडियो, स्केनर, मल्टीमीटर, हेण्ड ग्रेनेड,सेफ्टी फ्यूज, माओवादी साहित्य, पोच, माओवादी वर्दी, मेडिकल सामग्री एवं अन्य सामग्री
पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ0 जितेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि- वर्ष 2025 में जिले में हुए अलग-अलग मुठभेड़ों में 161 माओवादी को मार गिराने में सुरक्षा बलों को सफलता मिली है । वही अलग अलग थाना क्षेत्रों में चलाये गये अभियान में 546 माओवादी गिरफ्तार हुए एवं 560 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। जनवरी 2024 से अब तक जिले में चलाये गये माओवादी विरोधी अभियान में कुल 219 माओवादी मारे गये, 1049 माओवादी गिरफ्तार हुए एवं 790 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए ।
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ये जवान हुए शहीद
बीजापुर पश्चिम बस्तर डिवीजन क्षेत्र सुरक्षा बलों एवं माओवादियों के बीच हुए मुठभेड़ में डीआरजी बीजापुर के तीन जांबाज़ जवान बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। इसमें शहीद 1. प्रधान आरक्षक, मोहन बड़दी, DRG बीजापुर — मूल निवासी ग्राम उसकालेड, थाना मादेड़ , जिला बीजापुर। 2. शहीद आरक्षक दुकारूराम गोंदे, DRG बीजापुर — मूल निवासी बोदली, थाना नेलसनार, जिला बीजापुर। 3. शहीद जवान रमेश सोढ़ी, DRG बीजापुर — मूल निवासी ग्राम पुन्नुर, थाना आवापल्ली, जिला बीजापुर हैं।
शहीद हुए वीर जवानों के पार्थिव देह को रक्षित केन्द्र बीजापुर स्थित शहीद वाटिका में पूर्ण सम्मान के साथ गार्ड आफ आनर अर्पित की गई। मुठभेड़ में DRG बीजापुर के तीन जवान एएसआई जनार्दन कोरम, आरक्षक सोनदेव यादव, आरक्षक रामलू हेमला घायल हुए, जिन्हे तत्काल Evacuate कर बेहतर चिकित्सा हेतु हेलीकाप्टर के माध्यम से रायपुर रवाना किया गया,जवान खतरे से बाहर है तथा स्वास्थ्य बेहतर हैं।







