लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक सनसनीखेज घटना ने पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता लाल सिंह, जो दलित समुदाय से हैं, पर स्थानीय भाजपा नेता मुन्ना बहादुर सिंह ने उनके कार्यालय में घुसकर कथित तौर पर जूतों से हमला किया और जातिसूचक गालियां दीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे दलित और पिछड़े वर्ग के अभियंताओं में भारी रोष फैल गया। लाल सिंह ने रसड़ा थाने में मुन्ना बहादुर सिंह के खिलाफ मारपीट, अभद्र भाषा और सरकारी कार्य में बाधा डालने की प्राथमिकी दर्ज कराई है।
उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने इस घटना को ‘जातीय आतंक’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.पी. केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, महासचिव अनिल कुमार, संगठन सचिव हरिश्चंद्र वर्मा, और अन्य पदाधिकारियों ने इसे निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन दलित अभियंताओं का लगातार उत्पीड़न कर रहा है, और फील्ड में काम करना उनके लिए असुरक्षित हो गया है। एसोसिएशन ने 1992 बैच के दलित अभियंताओं जैसे राम शब्द, महेंद्र सिंह, लोकेश कुमार और प्रशांत सिंह के साथ प्रबंधन की ओर से कथित अन्याय का भी जिक्र किया, जिनमें से कुछ इस माह रिटायर होने वाले हैं।
आपात बैठक में एसोसिएशन ने फैसला लिया कि 25 अगस्त 2025 को पूरे प्रदेश में दलित और पिछड़े वर्ग के अभियंता काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध करेंगे। एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और सभी दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सोशल मीडिया पर इस घटना ने तूल पकड़ लिया है। कई यूजर्स ने इसे ‘जातीय अत्याचार’ करार देते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा, तो कुछ ने इसे ‘शोले’ के वीरू-बसंती जैसे नाटकीय तमाशे से जोड़कर देखा, लेकिन गंभीरता से इसका विरोध किया। एक यूजर ने लिखा, “ये फिल्मी ड्रामा नहीं, दलितों पर हमला है। सरकार चुप क्यों है?”







