विदित हो कि बिहार सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष दिए जाने वाले पुरस्कारों में एक संवर्ग महिला कलाकारों का भी है, इस क्रम में वर्ष 2018/19 का पुरस्कार नीतू सिन्हा को वहीं 2019/20 का पुरस्कार संगीता सिन्हा को दिए जाने की घोषणा हुई है।
बता दें कि यह पुरस्कार बिहार की पहली समकालीन महिला कलाकार कुमुद शर्मा के नाम पर है। हमारी पीढ़ी के कई कलाकारों को कुमुद जी का सान्निध्य और मार्गदर्शन मिला है। कह नहीं सकता कि आज की पीढ़ी उनके योगदान से परिचित है भी या नहीं। बहरहाल संलग्न चित्रों में से एक चित्र में बायें से हैं संगीता सिन्हा और उनके साथ हैं नीतू सिन्हा। तस्वीर थोड़ी पुरानी है और यह महज संयोग है कि इन दोनो को एक साथ पुरस्कार के लिए चुना गया है।
बात नीतू सिन्हा की करें तो इन्होंने कला की औपचारिक शिक्षा कला महाविद्यालय पटना से मूर्तिकला विषय में वर्ष 92/97 में हासिल की है। छात्र जीवन से ही कॉलेज की वार्षिक प्रदर्शनी में भागीदारी से शुरू हुआ इनका सर्जनात्मक सफर आज भी नियमित तौर पर जारी है। इस क्रम में दर्जनों प्रदर्शनियों में भागीदारी के साथ साथ कई कला शिविरों में शामिल होने का अनुभव इनके पास है तो साथ ही विभिन्न संग्राहकों तक इनकी कलाकृतियां अपनी पहुंच बना चुकी हैं।
वर्ष 2019/20 के लिए चयनित संगीता सिन्हा ने बैचलर ऑफ फाइन आर्ट की पढ़ाई कला एवम् शिल्प महाविद्यालय , पटना से 1995 में पूरी की। उसके थोड़े अंतराल के बाद मास्टर डिग्री की पढ़ाई वर्ष 2003 में खैरागढ़ से की। बिहार में कला के उच्च शिक्षा के नहीं होने की वजह से मास्टर डिग्री के लिए राज्य से बाहर जाना वैसे भी हमारी नियति दशकों से बनी हुई है। बहरहाल बात संगीता की कला यात्रा की करें तो कला प्रदर्शनियों में भागीदारी की शुरुआत वर्ष 1987 से ही हो चुकी है यानि स्कूली दिनों से ही। ऐसे में जैसा की स्वाभाविक है वर्ष 2020 आते आते दर्जनों प्रदर्शनियों में भागीदारी इनके खाते यानि बायोडाटा में दर्ज है।






