संकटा देवी मंदिर में संस्कारी बच्चों को मिला सम्मान

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लखनऊ, 30 मई 2019: गीता परिवार की ओर से चल रहे छह दिवसीय अर्जुन भव संस्कार पथ शिविर का शुक्रवार को समापन हुआ। इस मौके पर प्रतियोगिता के विजयी बच्चांे को पुरस्कृत किया गया। चौपटिया के संकटा देवी मंदिर में रामायण के पात्रो के नाम मेें अनिका वर्मा, ध्यान में सोहन अग्रवाल, ध्रुव साधना में दिली कश्यप, भगवद्गीता में शिखर सैनी, आदर्श शिविरार्थी में तेजस्वी रस्तोगी ने बाजी मारी। इस अवसर पर सुरेश कुमार श्रीवास्तव (विधायक), डा. आशु गोयल (गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), श्याम मिश्रा, राजकुमार मेहरोत्रा, दिलीप मिश्रा, मीनू अवस्थी, अनिल खरे, विष्णु लंकेश (पूर्व पार्षद), संकेत मिश्र, सुरेश चन्द्र पांडेय तथा गणमान्य लोग उपस्थित थे।

मुख्य अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। समापन अवसर पर मुख्य अतिथियों के समक्ष संस्कारी बच्चों ने शिविर में सिखाये गये क्रियाकलापों एवं सत्रों का मनमोहक प्रस्तुति दी। शिविर का निर्देशन सूर्या गुप्ता, कशिश, समापन संचालन शिवेन्द्र मिश्रा किया।

इस मौके पर सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि श्रीमद्भगवद गीता सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थ है व ज्ञान का भण्डार है इसलिए भारत के प्रधानमंत्री जहां कहीं भी विदेशों में जाते है वह गीता सदैव भेंट करते हैं वह कोई भी बहुमूल्य वस्तु भेंट कर सकते है मगर वह गीता ही भेंट करते है क्योंकि उन्हें मालूम है इसमें जीवन का सार छिपा हुआ है। वह हमंे जीवनचर्या, संस्कारों का ज्ञान कराती है संस्कार के बिना मनुष्य पशु के समान है। जिससे देश में अपराध, भ्रष्टाचार बढ़ता है। पहले बच्चों को सोलह संस्कार दिये जाते थे। छोटे बच्चों को महापुरुषों को जीवन का आदर्श व उनके दिखलाये मार्ग चलना चाहिए तभी उन्नति के मार्ग में चल सकते है। तभी फिर से भारतवर्ष विश्वगुरु बनेगा।

डा. आशु गोयल ने बच्चों को अच्छी बातों का ग्रहण करने एवं बुरी आदतों को छोड़ने का संकल्प दिलवाया। शिवेन्द्र मिश्रा ने गीता परिवार का परिचय एवं कार्य पद्धति के विषय में महत्वपूर्ण बातों को बताया तथा मुख्य अतिथियों को एक वाकया भी बताया कि जब पिछले वर्ष संस्कार महाकुंभ में महामहिम राज्यपाल श्री रामनाईक आये थे तो उन्होंने छोटे-छोटे बच्चों को गीता के श्लोकों का शुद्ध उचारण करते देख आश्चर्यचकित रह गये वह बीच-बीच में हाथ में चिकोटी का काट यह देख रहे थे यह कोई स्वप्न नहीं था। इससे पता चलता है कि बच्चों में गीता श्लोकों को पढ़ने के लिए कितने जिज्ञासु है क्योंकि वह जान गये जीवन का सार इसी में छिपा हुआ है।

मीडिया प्रभारी ने बताया कि वहीं दूसरी ओर लक्ष्मण नगरी के कई स्थानों पर तीन दिनी शिविरों का भी समापन शुुक्रवार को किया गया। जिनमें दिन प्रतिदिन ग्रीष्मकालीन शिविरों में खेलों के माध्यम से छोटे-छोटे बच्चे अपना व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ संस्कारों का ज्ञार्नाजन निरन्तर कर रहे है।

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