टोक्यो ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने देशवासियों का दिल जीतने से भी बड़ा कारनामा कर दिखाया है। भाला फेंक में उनके इस पराक्रम से कला जगत में भी हर्ष और उत्साह का माहौल है। तमिलनाडु तिरुनेलवेली के विजयनारायणन स्थित केंद्रीय विद्यालय के आर्ट टीचर नयन नगरकर ने नीरज चोपड़ा का जीवंत रेखाचित्र बनाया है।
नयन ने यह चित्र नीरज चोपड़ा और भारत देश को विश्व पटल पर मिली शानदार जीत के लिए समर्पित किया है। उनका मानना है कि कलाविदों को भी खिलाड़ियों के चित्र बनाकर उन्हें सम्मानित महसूस कराना चाहिए।
खिलाड़ियों की गति को नयन स्कैच से देते हैं अभिव्यक्ति
प्रख्यात चित्रकार नयन नगरकर मुंबई के जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स से कला स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने एनीमेशन कोर्स करके बॉलीवुड के क्रिएटिव फील्ड में भाग्य आजमाया। लेकिन उन्हें इस कार्य में अपेक्षित सफलता नहीं मिली और वह अपने गृह जनपद नासिक लौट आए। यहां रहकर उन्होंने केके वाघ कॉलेज ऑफ फाईन आर्ट्स में करीब सात वर्षों तक अध्यापन कार्य किया। बाद में उनका चयन चेन्नई के केंद्रीय विद्यालय में बतौर आर्ट टीचर हो गया।

वर्तमान में नयन तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित केंद्रीय विद्यालय में बच्चों को कला की बारीकियां सीखा रहे हैं। अद्भुत रेखाचित्रों के सृजन में विशेषज्ञता रखने वाले नयन ने बीते वर्षों में मेजर ध्यानचंद, मिल्खा सिंह, सुनील क्षेत्री और पेले जैसे तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मशहूर खिलाड़ियों के स्कैच बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। नयन ने लंदन के लिवरपूल फुटबॉल क्लब के खिलाड़ियों के लिए भी प्रभावी रेखाचित्र बनाये और उन्हें क्लब को भेंटस्वरूप प्रदान किया। डायरी विधा और एनीमेशन के सुंदर समन्वय से बनी इस कलाकृति की क्लब के सदस्यों ने भरपूर सराहना की।
धन्यवाद स्वरूप लिवरपूल क्लब के सभी फुटबाल खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाला प्रशस्ति पत्र नयन नगरकर को डाक से भेजा गया। वर्तमान में उनके बनाए स्कैच लिवरपूल क्लब की शोभा बढ़ा रहे हैं। नयन नगरकर खिलाड़ियों की गति से खासे रोमांचित होते हैं, इसलिए उन्होंने गतिमान स्कैच के सृजन में दक्षता हासिल की।

मैंने तो उनसे गोल्ड मेडल मांगा था: कोच नसीम अहमद
नीरज के कोच रहे नसीम अहमद कहते हैं, ” यह पल हजारों खिलाड़ियों को तराशने के बाद एक कोच को नसीब होता है। मैं खुशनसीब हूं कि मैं देश को नीरज चोपड़ा जैसा एथलीट दे पाया। मैंने ओलिंपिक में भी उनसे गोल्ड मेडल मांगा था!”







