वर्ष 2019-20 के राधामोहन पुरस्कार के युवा संवर्ग में कलाकार पिंटू प्रसाद का चयन निर्णायकों द्वारा किया गया है। पटना के उपेन्द्र महारथी संस्थान में आप जब कभी भी जाएंगे तो टेराकोटा एवं अन्य मूर्तिशिल्पों से भरे एक कक्ष में आपकी मुलाकात इस युवा कलाकार से हो जाएगी। हालांकि यहीं आपकी मुलाकात देशज शैली के प्रख्यात टेराकोटा मूर्तिकार लाला पंडित जी से भी होगी।
बहरहाल बात यहां पिंटू कुमार की तो इनकी कला शिक्षा की बात करें तो वर्ष 2008 में कला एवं शिल्प महाविद्यालय, पटना से बैचलर डिग्री के बाद डा. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा से वर्ष 2010 में मास्टर डिग्री हासिल की है। इनके बनाए मूर्तिशिल्पों में पोट्रेट व लाइफ साइज प्रतिमाओं की बात करें तो दिल्ली के राष्ट्रपति भवन संग्रहालय के लिए देश के भूतपूर्व राष्ट्रपतियों की प्रतिमा का जिक्र जहां लाजिम है। वहीं कुछ वर्ष पूर्व स्वतंत्रता दिवस की झांकी के लिए बनाए गए पद्मश्री से सम्मानित मिथिला चित्रकला के चितेरियों की आवक्ष प्रतिमाएं भी उल्लेखनीय हैं। कला प्रदर्शनियों में भागीदारी और पुरस्कृत होने के सिलसिले की बात करें तो वर्ष 2005 से यह निरंतरता के साथ जारी है। इन पुरस्कारों में महाविद्यालय की वार्षिक प्रदर्शनी से लेकर आईफैक्स अवार्ड (2009), एससीजेडसीसी, नागपुर (2010) तथा वेॅ 2015 में मिला उद्योग विभाग, बिहार सरकार का राज्य पुरस्कार भी शामिल है।
मालूम हो कि इनके मूर्तिशिल्पों में यूं तो सदियों से चली आ रही हमारी मूर्तिकला परंपरा का विस्तार दिखता है, किन्तु अपने मूर्तिशिल्पों के साथ कुछ अनूठे नवाचार भी पिंटू बरतते हैं। मसलन एक प्रतिमा है जिसमें गणेश अपने परंपरागत वाहन चूहे की बजाए मोटरबाइक की सवारी करते नजर आ रहे हैं। वहीं एक और गणेश प्रतिमा है जिसमें बाल गणेश लकड़ी के परंपरागत तिपहिया के साथ हैं। गणेश को लेकर पिंटू का यह खास लगाव ही है कि खाट पर लेटी हुई प्रतिमा से लेकर छतरी थामे हुए गणेश भी यहां मौजूद हैं।
समसामयिक विषयों पर उनके बनाए मूर्तिशिल्पों की बात करें तो पिछले दिनों केरल में जब पटाखा युक्त अनानास खाने से गर्भवती हथिनी की मृत्यु हुई तो इस घटना ने पूरी मानवता को हिलाकर रख दिया था। दुनिया भर में इसको लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आयीं । इसी क्रम में पिंटू प्रसाद ने अपने मूर्तिशिल्प के माध्यम से उस हथिनी को श्रद्धांजलि पेश की थी। – सुमन सिंह







