बड़ा खेल खेलेंगे असीम मुनीर, जरदारी की जगह खुद बनेंगे राष्ट्रपति !
नई दिल्ली, 10 जुलाई : पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर उथल-पुथल मची हुई है। हाल के दिनों में ऐसी खबरें जोर पकड़ रही हैं कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाकर सत्ता पर कब्जा करने की योजना बना रहे हैं। इन अफवाहों ने मुल्क के सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। क्या पाकिस्तान एक और फौजी तख्तापलट की ओर बढ़ रहा है? आइए, इस सियासी तूफान के पीछे की सच्चाई को समझने की कोशिश करते हैं।
मुनीर की तरक्की से सियासी हलचल
मई 2025 में पाकिस्तानी सरकार ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया, जब जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल की रैंक दी गई। यह पाकिस्तान के इतिहास में दूसरी बार हुआ, जब किसी सैन्य अधिकारी को यह प्रतिष्ठित रैंक मिली। इससे पहले 1959 में जनरल अयूब खान ने खुद को फील्ड मार्शल बनाया था, जब देश में सैन्य शासन था। मुनीर की यह तरक्की भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आई, जिसे पाकिस्तान ने अपनी सैन्य सफलता के रूप में प्रचारित किया, हालांकि कई विश्लेषकों ने इसे विवादास्पद बताया। इस तरक्की ने सवाल उठाए कि क्या यह सिर्फ एक औपचारिक सम्मान है या सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति?
अमेरिका दौरा और बढ़ती ताकत
जून 2025 में असीम मुनीर ने अमेरिका का दौरा किया और वहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐतिहासिक थी, क्योंकि पहली बार किसी पाकिस्तानी सेना प्रमुख को व्हाइट हाउस में बुलाया गया। इस घटना ने सियासी हलकों में हंगामा मचा दिया। कई जानकार इसे मुनीर की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ताकत और सियासी महत्वाकांक्षा का संकेत मानते हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह मुलाकात अमेरिका की ओर से मुनीर को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखे जाने का सबूत है, जिससे उनकी घरेलू सत्ता और मजबूत हुई।
जरदारी पर खतरा और तख्तापलट की अफवाहें
पाकिस्तानी पत्रकार एजाज सईद ने दावा किया है कि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को हटाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। उनके मुताबिक, सियासी जोड़-तोड़ शुरू हो चुका है और कई ताकतवर लोग चाहते हैं कि जरदारी इस्तीफा दे दें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी ऐसी खबरें वायरल हैं। एक यूजर ने लिखा, “सूत्रों का कहना है कि असीम मुनीर जरदारी के खिलाफ खामोश तख्तापलट की योजना बना रहे हैं, क्योंकि जरदारी चीन के ताइवान नीति का समर्थन करते हैं, जबकि मुनीर ने अमेरिका के साथ गुप्त समझौता किया है।”
इसके अलावा, बिलावल भुट्टो जरदारी के हालिया बयानों ने भी तनाव बढ़ाया है। बिलावल ने एक अंतरराष्ट्रीय साक्षात्कार में मुनीर की आलोचना की और कहा कि पाकिस्तान को आतंकियों जैसे हाफिज सईद और मसूद अजहर को भारत को सौंपने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इस बयान ने सियासी और सैन्य हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उकसाई।
क्या है ‘खामोश तख्तापलट’?
विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई पारंपरिक सैन्य तख्तापलट नहीं होगा, बल्कि एक ‘सॉफ्ट’ या ‘खामोश तख्तापलट’ हो सकता है, जहां मुनीर संवैधानिक बदलावों के जरिए सत्ता पर कब्जा कर सकते हैं। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना और कुछ सियासी ताकतें मौजूदा संसदीय व्यवस्था को बदलकर राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने की कोशिश कर रही हैं, जिसमें मुनीर राष्ट्रपति की भूमिका निभा सकते हैं। यह कदम सेना की सत्ता को और मजबूत कर सकता है, जैसा कि पहले जनरल जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ के दौर में देखा गया।
फिलहाल पाकिस्तान की सियासत में यह तूफान अभी शांत होने के आसार नहीं दिख रहे। असीम मुनीर की बढ़ती ताकत, जरदारी की कमजोर स्थिति, और सियासी दलों के बीच तनाव ने मुल्क को एक नए दौर की ओर धकेल दिया है। क्या यह तख्तापलट होगा या सियासी समझौता, यह आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान की सत्ता का खेल एक बार फिर सेना के इर्द-गिर्द घूम रहा है।







