इंसान यदि चाहे तो वह प्रकृति से और पशु-पंछियों से बहुत कुछ सीख सकता है बस उसे जरुरत है तो इच्छा शक्ति की। खास बात यह है कि चमगादड़ अंधेरे में भी अपना शिकार खोज लेते हैं। ऐसा इसलिए नहीं कि उन्हें कुछ नजर नहीं आता है बल्कि इसलिए कि उनके पास खास हुनर होता है, जिसे कॉल लोकेशन कहते हैं इको यानी आवाज का गूंजना चमगादड़ सोनार साउंड पैदा करके जो आसपास की चीजों से टकराकर उसके पास लौटती हैं और वह समझ जाते हैं कि शिकार कहां है।
ठीक इसी प्रकार यही हुनर डॉल्फिन के पास भी होता है काश, कितना अच्छा होता कि अगर इंसान भी इस तरकीब का फायदा उठा सकता। इसका लाभ खासकर दृष्टि की समस्या वाले लोगों को मिल सकेगा, दुनिया में 28.5 करोड़ लोग दृष्टिहीन के शिकार हैं। उनमें से करीब 4 करोड़ लोग पूरी तरह दृष्टिहीन हैं, जबकि 24.5 करोड़ लोग कम देख पाते हैं। बता दें कि इस अंधेपन के शिकार 82 प्रतिशत से ज्यादा लोग 50 साल की उम्र में हो जाते हैं और करीब 90% कमजोर वर्ग से आते हैं लेकिन यह स्थिति कभी भी किसी के सामने आ सकती हैं।
टॉम 18 साल का है और दृष्टिहीन है लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। 2002 में जब 5 साल का था तो ड्राइवर वाइल्ड में उसका ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन हुआ था, वह बताता है कि ऑपरेशन के बाद एक दिन के अंदर में अंधा हो गया। यह अचानक हुआ, मुझे मानसिक समस्याएं भी थी, मेरे साथ यह बहुत ही बुरा हुआ था, मुझे पैरानोया हो गया था।
एक दिन टॉम को पता चला कि वह दुनिया को फिर से महसूस कर सकता है वह दूर से ही बता देता है कि उसके सामने एक मीटर और 2 मीटर की दूरी पर क्या है। इस विधि से वह आसपास की चीजों को अपनी जिंदगी कुछ कठिन घडी को आसान कर पाया और कुछ समय बाद में वह फिर इस तकनीक के सहारे बाहर भी जाने लगा, बिना कोई स्टिक लिए।







