पाकिस्तान ने भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की
इस्लामाबाद, 9 अगस्त 2025: बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोही संगठनों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ अभूतपूर्व हमले तेज कर दिए हैं, जिससे सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के हवाले से पता चला है कि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूच लिबरेशन फ्रंट (BLF) जैसे सशस्त्र समूहों ने कई इलाकों में जबरदस्त हमले किए, जिसके चलते पाकिस्तानी सेना को अपनी कई चौकियों को छोड़कर भागना पड़ा। विशेषज्ञ इसे हाल के दशकों में सेना के लिए सबसे बड़ा झटका मान रहे हैं।
बलूचको झंडे फहराते देखा गया
पिछले कुछ दिनों में, बलूच विद्रोहियों ने क्वेटा, ग्वादर, और तुरबत जैसे शहरों में समन्वित हमलों को अंजाम दिया। 7 अगस्त को मच जिले में एक सैन्य काफिले पर हुए हमले में 10 सैनिकों के मारे जाने की खबर है। इसके अलावा, पंजगुर और केच में सैन्य ठिकानों पर रॉकेट हमले और गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में विद्रोहियों को सैन्य चौकियों पर नियंत्रण लेते और बलूच झंडे फहराते देखा गया।
इंटरनेट बंद, मानवाधिकार संगठन का “सूचना ब्लैकआउट” करार
हमलों के बाद, पाकिस्तान सरकार ने पूरे बलूचिस्तान में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर रोक लगा दी, जिसे स्थानीय लोग और मानवाधिकार संगठन “सूचना ब्लैकआउट” करार दे रहे हैं। यह प्रतिबंध 5 अगस्त से लागू है और कम से कम 25 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। इस कदम की व्यापक आलोचना हो रही है, क्योंकि यह आम नागरिकों को प्रभावित कर रहा है और क्षेत्र में अशांति को और भड़का रहा है।
पाकिस्तान का आरोप: भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश
पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन हमलों के लिए विदेशी ताकतों, खासकर भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की है। हालांकि, बलूच विद्रोही नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह उनकी स्वतंत्रता की लड़ाई है, जो स्थानीय लोगों के दशकों के उत्पीड़न और संसाधनों की लूट के खिलाफ है।
लूट और जबरन गायब करने की घटनाएं बढ़ी
बलूचिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों की लूट, जबरन गायब करने की घटनाएं, और सैन्य दमन ने विद्रोह को और हवा दी है। हाल की एक स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में अब तक 250 से अधिक हमले हुए हैं, जिनमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में अपनी नीतियों को नहीं बदला, तो यह क्षेत्र और अस्थिर हो सकता है।
बता दें कि यह घटनाक्रम न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस संकट पर ध्यान देने और मानवीय स्थिति में सुधार की मांग की जा रही है।







