माननीया सांसद मिश्रिख डा. अन्जू बाला ने छात्रों के हित में पहली बार लोकसभा में उठाया BBAU में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा
नई दिल्ली 19 दिसम्बर। प्रश्नकाल के दौरान सोमवार को पहली बार लोकसभा में बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितताओं व अनुसूचित जाति /जनजाति के छात्रों के ऊपर हो रहे अत्याचार के खिलाफ का मुद्दा उठा जिसे माननीया सांसद मिश्रिख डा. अन्जू बाला ने उठाया और भारत सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग) के अंतर्गत केंद्रीय विश्वविद्यालयों की लेखापरीक्षा से सम्बंधित विषय में जानकारी मांगी, बताया जाता है जो जानकारी उन्हें उपलब्ध कराइ गयी उससे माननीया सांसद महोदया बिलकुल भी संतुस्ट नहीं है। जिससे एक बार फिर विवि में राजनीति गरमा गयी।

बताते चले कि BBAU में आंतरिक राजनीति के चलते यहाँ के दलित छात्रों के खिलाफ सामाजिक भेदभाव, अनियमितता और भ्रष्टाचार चरम पर है यही कारण है कि विवि भी जेएनयू की राह पर आंदोलित हो गया और आये दिन यहाँ के मुद्दे अख़बारों और सोशल साइट्स पर छाए रहते है मामले को तूल पकड़ता देख सवाल उठने लगे, जब इसी विषय में मिश्रिख की सांसद डा. अन्जू बाला ने भारत सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्चतर शिक्षा विभाग ) के अंतर्गत केंद्रीय विश्वविद्यालयों की लेखापरीक्षा के विषय में जानकारी मांगी तो BBAU में चर्चा और तेज हो गई। फिलहाल MHRD ने जो जवाब उपलब्ध कराया है उससे सांसद महोदय बिलबुल भी संतुस्ट नहीं है।
छात्रों का कहना है कि जवाब में MHRD ने बिल्कुल भी सन्तोषजनक नही दिया। मंत्रालय ने गोल -गोल बातों में घुमाकर तथ्यपूरक सवालों के जवाबों को अलग ही दिशा देने की कोशिश की। जबकि सभी जानते है कि विवि में एक हिटलरशाही माहौल है। जहां न्यायसंगत कोई कार्य नही किया जा रहा है।
जो सवाल लोकसभा में पूछे गए?
- क्या सरकार को बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के कुलपति द्वारा नियुक्क्तीओं में किये गये भ्रष्टाचार की शिकायतें प्राप्त हुयी है और यदि हाँ, तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है तथा इस सम्बन्ध में सरकार द्वारा क्या कार्यवाई कि गई है?
- क्या सरकार ने बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ सहित 10 केंद्रीय विश्विद्द्यालयों के कार्यकरण के सम्बन्ध में प्राप्त शिकायतों के बारे में उनकी लेखापरीक्षा कराने के लिए विवि में अनुदान आयोग को निर्देश दिया है और यदि हाँ, तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है?
- क्या बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में संग्राहलय को पूरा कर लिया गया है और यदि हाँ, तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है और
- क्या सरकार को बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति /अनु. जनजाति के कर्मचारियों पर अत्याचार के सम्बन्ध में शिकायतें प्राप्त हुयी है और यदि हाँ, तो तत्सम्बन्धी ब्यौरा क्या है? तथा सरकार कि इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
मुझे तो पर्सनली टारगेट किया कुलपति ने: सुनीता चंद्रा
जातिवाद और भ्रस्टाचार हावी है BBAU में

लखनऊ 19 दिसम्बर। बात अगस्त 2016 की है जब BBAU के कमल जैसवार (बोर्ड ऑफ़ मैनेजमेंट के मेंबर, फाइनेंस कमेटी मेंबर) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमे उन्होंने में कहा कि जैसा कि दूसरे विवि में 27 परसेंट आरक्षण मिलता है उसी प्रकार हमारी यूनिवेर्सिटी में भी SC/ST का 50% का आरक्षण काटकर अदर को मिलना चाहिए जैसा कि सब जानते है कि BBAU स्पेशल स्टेटस यूनिवर्सिटी है यहाँ पर 50% परसेंट आरक्षण SC/ST बच्चों के लिए सुरक्षित है और पार्लियामेंट से भी आरक्षण अप्रूवड है।
तो इसको लेकर ऐज ऐ रजिस्ट्रार मैंने भी केस डिफेंड किया चूकि मै तो रजिस्ट्रार थी और रजिस्ट्रार का काम ही होता है विवि के मामलों को प्रोटेक्ट करना जिसे हमने किया और हम केस जीत गये और शायद यही जीत उनकी रंजिश का कारण बना!
इसके बाद कुलपति ने इस मामले को पर्सनल ले लिया जब उन्हें कुछ नहीं मिला तो उन्होंने मेरे डेपुटेशन को ही चैलेंज कर दिया और इशू यह बनाया कि BHU में अप्रोच होल्ड करते हुए डेपुटेशन से रजिस्ट्र्रार के पद पर कैसे आ सकती है जबकि मेरे से पहले जो आये थे वह भी डेपुटेशन पर ही आये थे। इसमें उन्होंने अपने पावर ऑफ अटार्नी का इस्तेमाल करते हुए मेरा अपॉइंटमेंट कैंसिल कर दिया और इसमें वॉइस चांसलर साहब ने कही न कही इस मामले में उनको सपोर्ट कर दिया और भूमिका यही बनायीं कि मै BHU में जॉइंट रजिस्ट्र्रार हूं और मै जॉइंट रजिस्ट्र्रार होते हुए यहाँ पांच साल की एकमीडिक्शन नहीं होल्ड कर सकती हूं तो इन्ही सब कारणों के चलते मै भी जातिगत राजनीति का शिकार हुईं।







