BBAU टॉपर को भी नहीं मिल रहा विवि में प्रवेश, अन्य छात्रों के भी प्रवेश रोकने की साजिश

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”पिछले साल भी विवि प्रशासन ने इतिहास विभाग पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में टॉप करने वाले छात्र श्रेयात बौद्ध और संदीप शास्त्री का एडमिशन नही लिया था। जिससे दोनों छात्रों का एक साल बर्बाद हो चुका है ”


विवि द्वारा जारी किया गया तुगलकी फरमान, व्यक्ति के शिक्षा के मौलिक अधिकार जो भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 (A) का खुला उल्लंघन

लखनऊ, 3 सितम्बर। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ के इतिहास विभाग की एम फिल की प्रवेश परीक्षा में टॉप करने वाले बसंत कनौजिया को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। इसके आलावा जयवीर सिंह, अश्विनी कुमार रंजन एवं छात्रों के प्रवेश पर भी रोकने की साजिश हो रही है। छात्र बसंत का आरोप है कि मनुवाद का समर्थन करने वाले शिक्षकों को हमारी यह सफलता पच नही पा रही है। इस वजह विवि की अनुशासन समिति ने आनन.फानन में प्रोक्टोरियल बोर्ड की मीटिंग करवाकर एक नोटिस जारी किया है कि इन लोगों के ऊपर विवि प्रशासन द्वारा FIR दर्ज है इसलिए इन लोगों का एडमिशन नही होगा।
उधर छात्रों का आरोप है कि विवि प्रशासन ऐसा कर रहा है तो सबसे ज्यादा तो भ्रस्टाचार और रेप के आरोप यहाँ के प्रोफेस्सर कमल जायसवाल पर है जिन्हे तत्काल बर्खास्त कर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

 आखिर FIR दर्ज क्यों है ?

इस सवाल के जवाब में छात्रों का आरोप है कि विवि के ये होनहार छात्र BBAU में हो रही अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। इसलिए ऐसी साजिश की जा रही है, इस विवि में अनुसूचित जाति के छात्रों का शोषण चरम पर है इस वजह छात्रों के ऊपर हो रहे शोषण के कारण छात्र संवैधानिक दायरों में रहकर अपनी मांगे पूरी करने के लिए विवि प्रशासन के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन करके अपना विरोध जताते हैं।

लेकिन विवि प्रशासन की अनुशासन समिति किसी भी छात्र को नियम के अनुसार कोई कारण बताओ नोटिस जारी नही करती है और न ही कोई जांच समिति बनाती है और न ही कोई चेतावनी वाला नोटिस जारी करती है। विवि प्रशासन उनकी मांगें न मानकर सीधे पुलिस प्रशासन की मदद से उक्त छात्रों के खिलाफ FIR करवा देती है।

जिनमें अभी हाल में ही विवि स्थित अम्बेडकर भवन के गेट का कांच अपने आप गिरकर टूट गया। कांच के अपने आप टूटने की वीडियो रिकॉर्डिंग उक्त छात्रों के पास मौजूद है तथा प्रदेश पुलिस के LIU अधिकारी के सामने की बात जिसके वो गवाह भी हैं लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों के खिलाफ झूठी FIR करवा दी। इस वजह से विवि में पढ़ने वाले अधिकतर अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र डरे सहमे रहते हैं और उनका भविष्य अंधकारमय बनाने के लिए षड्यंत्र करते हैं।

विवि में हो रही अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज को कोई नही सुनता तो छात्र अपने विचारों को सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा लिखते हैं तो उनको सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी छीनने के कोशिश करते हैं। जिससे पब्लिक को विवि के अंदर चल रही अनियमिताओं और भ्रष्टाचार के बारे में पता न चल सके।

ज्ञात हो विगत जून 2017 में भ्रष्टाचार के आरोप में विवि के एक प्रोफेसर को सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हांथों पकड़ लिया था। विवि के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों पर हैं ‘यौन शोषण’ पीएचडी स्कॉलरर्स का शोषण करने एवं भ्रष्टाचार के आरोप लेकिन उनके खिलाफ अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

छात्रो का आरोप है कि जो प्रशासनिक अधिकारी छात्रों के ऊपर उपद्रवी और गुंडे होने के आरोप लगा रहे हैं उन प्रशासनिक अधिकारियों में ऊपर यौन शोषण अपनी शोध छात्राओं के साथ छेड़खानी बदतमीजी पीएचडी स्कॉलरर्स को परेशान करने तथा उनको पीएचडी छोड़कर जाने के लिए मजबूर किये जाने और छात्रों को गाली गलौज करने का आरोप हैं। लेकिन विवि प्रशासन ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही करता बल्कि उनको उल्टे उच्च पद दिया जाता जिससे वह अपनी मनमानी करें और अपने जैसा अपराधी छात्रों को बनाएं।

जिस तरह से विवि प्रशासन छात्रों को झूठे मामले में फंसाकर अपनी मनमानी कर रहा है उससे विवि की गरिमा को बहुत ठेस पहुंच रही है तथा छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। क्योकि पिछले साल भी विवि प्रशासन ने इतिहास विभाग पीएचडी की प्रवेश परीक्षा में टॉप करने वाले छात्र श्रेयात बौद्ध और संदीप शास्त्री का एडमिशन नही लिया था। जिससे दोनों छात्रों का एक साल बर्बाद हुआ है।

छात्रो काआरोप है कि अब हम बहुजन छात्र अपने न्याय के हाईकोर्ट अनुसूचित आयोग यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय का दरवाजा खटखटाने जा रहे है।