- क्योंकि घरेलू काम के बोझ की वजह से 71 फीसदी महिलाएं कम सोती हैं
- अवार्ड विनिंग मूवमेंट के चौथे संस्करण में समान नींद के लिए #ShareTheLoad लॉन्च किया
एरियल ने #ShareTheLoad का चौथा एडिशन लॉन्च किया है। एक स्वतंत्र तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा किए गए सर्वे में चौंकाने वाली और असहज करने वाली सच्चाई सामने आई – भारत में 71*% महिलाएं घर के काम की वजह से अपने पति से कम सो पाती हैं।
एरियल ने महसूस किया कि पुरुषों द्वारा काम के लोड को साझा नहीं करने का असर कहीं अधिक गहरा और मजबूत है। कपड़े धोने जैसे घरेलू काम का असमान विभाजन महिलाओं की पर्याप्त नींद और आराम करने के रास्ते में बाधक बन रहा है। वास्तव में, कई घरों में महिलाएं सबसे पहले जागने और सबसे आखिरी में सोने वाली होती हैं। इस बार की बातचीत महिलाओं के सुबह से देर रात के बीच उन बेहिसाब घंटों के बारे में है, जो आमतौर पर उन कामों को पूरा करने में खर्च होते हैं जो वे दिन के दौरान पूरा नहीं कर सकतीं! पुरुष जब उनके काम के बोझ को साझा नहीं करते हैं, तो सबसे बुनियादी और रोजमर्रा की जो चीज सबसे ज्यादा प्रभावित होती है! वह है – नींद! महिलाओं की नींद का पूरा न होना घर के भीतर असमानता का एक संकेतक की तरह है।

बता दें क़ि सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफार्म्स पर लॉन्च की गई नई फिल्म, पत्नियों की भलाई के लिए पर घरेलू काम के असमान विभाजन के प्रभाव को उजागर करने का प्रयास करती है, और पुरुषों से इसको लेकर तत्काल कदम उठाने का आग्रह करती है। पिछले 5 वर्षों के दौरान, एरियल लाखों पुरुषों के विचार को प्रभावित करने में सक्षम रहा है। 2014 में 79**% पुरुष मानते थे कि कपड़े धोने का काम सिर्फ महिलाओं का है, उनकी संख्या में लगातार गिरावट आई है। 2019 में सिर्फ 41*% पुरुष ऐसा मानते हैं। हालांकि आज भी सिर्फ 35*% पुरुष ही घर के काम में हाथ बंटाते हैं। एरियल ने 2020 में इस संख्या को ऊपर उठाने की जिम्मेदारी ली है।
सर्वे में अधिकांश पुरुष इस बात से सहमत हैं कि मशीन से कपड़े धोना उनके लिए पत्नी का हाथ बंटाने का सबसे आसान तरीका है।
फिल्म का कांसेप्ट बीबीडीओ द्वारा डेवलप किया है और एक छोटी लड़की की आंखों से दिखाया गया है, जो रात में सोते वक्त अपनी मां को बिस्तर पर नहीं पाती है। वह लगातार नोटिस करती है कि उसकी थकी हुई और निद्राग्रस्त माँ रात के समय कई काम कर रही है। बच्ची अपनी मां को मिस कर रही है, पिता द्वारा इस बात का एहसास करने के साथ फिल्म अपना संदेश छोड़ने सफल रहती है।







