ईरान संग तनाव चरम पर: कूटनीति पर विराम, सैन्य कार्रवाई के संकेत तेज
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अब शांति वार्ता के लिए समय खत्म हो चुका है। उन्होंने 22 अप्रैल की तय डेडलाइन के बाद संघर्षविराम बढ़ाने से इनकार करते हुए संकेत दिए हैं कि आगे का रास्ता सख्त कदमों की ओर जा सकता है।
बता दें कि सीएनबीसी मीडिया को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि “अब और समय नहीं है, डेडलाइन खत्म हो रही है और हम इसे आगे नहीं बढ़ाएंगे।” जब उनसे संभावित सैन्य कार्रवाई पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इशारों में कहा कि हालात उसी दिशा में बढ़ रहे हैं। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका इस समय वार्ता में बेहद मजबूत स्थिति में है।
पाकिस्तान की पहल भी बेअसर
इस बीच पाकिस्तान ने 14 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव रखकर तनाव कम करने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता पर भी अब अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर भी विरोधाभासी खबरें सामने आ रही हैं।
रूस की चेतावनी, चीन पर आरोप
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक रूस, चीन और ईरान मौजूद हैं, तब तक ट्रंप वैश्विक प्रभुत्व स्थापित नहीं कर पाएंगे। उधर, चीन पर ईरान को समर्थन देने के आरोप भी तेज हो गए हैं।
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खाड़ी में बड़ा घटनाक्रम: जहाज जब्त
तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी कंटेनर जहाज को कब्जे में ले लिया। दावा है कि यह जहाज चीन से आ रहा था और उस पर मिसाइल निर्माण से जुड़े रसायन या ‘डुअल-यूज’ सामग्री लदी हो सकती थी।
पूर्व अमेरिकी गवर्नर निकी हेली ने भी आरोप लगाया कि जहाज ने कई बार रुकने के आदेशों की अनदेखी की, जिसके बाद कार्रवाई की गई। जब्त पोत ‘टोस्का’ ईरानी शिपिंग कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिस पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लागू हैं।
फिलहाल कूटनीतिक प्रयासों के कमजोर पड़ने और सैन्य गतिविधियों के तेज होने से साफ है कि अमेरिका-ईरान टकराव एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। आने वाले दिन इस संकट की दिशा तय करेंगे।






