अब ‘भड़ास कैफे’ आधुनिक इंदौर की नई पहचान

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  • इंदौर शहर का आइडल बन गया है भड़ास कैफे
  • इंडिया के 49 शहरों में शीघ्र खुलेंगें नए ‘भड़ास कैफे’

इंदौर में आजकल भड़ास कैफे की चर्चा चल रही है। भड़ास भारत का पहला ऐसा कैफे है जहां आप अपने तरीके से अपने गुस्से उससे जुड़ी निराशा जलन चिड़चिड़ाहट इत्यादि नकारात्मक भावों को व्यक्त कर सकते हैं। वह भी पूरी सुरक्षा व गोपनीयता के साथ ताकि आपके व्यावसायिक पारिवारिक रिश्तों पर असर न हो।

प्रत्येक शहर की अपनी पहचान होती है। यह पहचान उसकी कुछ विशेषता जैसे एतिहासिक स्मारक, खान पान, मार्केट या अन्य कुछ खासियत से बनती है। इंदौर को मालवा का गोरव और मिनी मुंबई कहा जाता है पर इस शहर का दिल आज भी राजवाड़ा में धड़कता है। राजवाड़ा सिर्फ होल्कर कालीन महल नहीं है यहां के चैक में शहर के बाशिंदों की जान बसती है। जश्न मनाना हो, विरोध प्रकट करना हो। दुःख हो या सुख हो सभी अवसरों पर राजवाड़ा पूरे शबाब पर होता है फिर चाहे आधी रात का भी समय होतो उत्साह कम नहीं होता है।

 

आधुनिक इंदौर में भड़ास कैफे शहर ही पहचान बन गया है। यह भारत का पहला ऐसा कैफे है जहां गुस्से को व्यक्त करने की विशेष सुविधा है। यहां पर आप तोड़फोड़ कर, चिल्लाकर अथवा रोकर तो अपना गुस्सा व्यक्त कर सकते हैं परन्तु भड़ास की एक और सुविधा ने इसे विश्व का पहला ऐसा कैफे बना दिया है जहां गुस्से को शान्तिपूर्ण तरिके से दूसरी सकारात्मक दिशाओं में मोड़ा जा सकता है।

भड़ास में सुरक्षा व्यवस्था के साथ आप अकेले में आॅफिस, परिवार दोस्त या प्रिय के प्रति अपने गुस्से को व्यक्त करने के लिए उससे संबंधित सामान पूरी ताकत से तोड़ सकते हैं। रोने, चिल्लाने व अपशब्दों का प्रयोग भी करे तो कोई दूसरा नहीं सुनेगा और मन की भड़ास निकल जाएगी, मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि गुस्सा सबसे अधिक एर्नजी वाला नेगेटिव इमोशन है और इसे सही दिशा में मोड़ दिया जाए तो रचनात्मक एर्नजी बन सकती है। भड़ास में आप संगीत के वाध यंत्र बनाकर पेंटिंग्स करके, बचपन के खेलो से या अन्य पसंदीदा काम करके अपनी एर्नजी को सकारात्मक मोड दे सकते हैं। यकिन मानिए इतनी सारी खूबियों के साथ भड़ास आधुनिक इंदौर की पहचान बन गया है जैसे राजवाड़ा के बिना इंदौर की कल्पना नहीं की जा सकती है वैसे ही आने वाले समय में भड़ास के बिना इंदौर अधूरा लगेगा। अपने शहर की इस नई पहचान को देखने और बाहर से आने वालों को दिखाने का तो आपका हक बनता है।
जब कोई भड़ास पर आता है तो स्वयं ही अपने गुस्से को बाहर निकालने के लिए तत्पर हो जाता है। अभी तक इंदौर में आने वाली कई बड़ी हस्तियों ने भड़ास का अवलोकन किया और इसे इंदौर की नई पहचान बताया है।

'भड़ास कैफे'अब इंदौर शहर का आइडल कैफे बन गया है: अतुल मालिकराम

कैफे के ओनर अतुल जी का कहना हैं ‘भड़ास कैफे’ इंडिया में अपनी तरह का पहला अनूठा एक्सपेरिमेंट है जहॉ कोई भी आकर अपने गुस्से को जाहिर कर सकता हैं वास्तव में यह कैफे एक मैडिटेशन का काम करता है जहाँ आप अपनी अंदर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर कर सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करते हैं और कुछ समय बाद आप काफी हलकापन महसूस करते हैं। अब यह प्रयोग यहाँ के लोगों को बहुत पसंद आ रहा हैं और लोग इसे दूर दूर से देखने भी आ रहे हैं।

लगभग चार हज़ार स्क्वायर फिट में बने इस कैफे में आप पूरी तरह से आप अपने मानसिक तनाव को अपने गुस्से के रूप में, तोड़फोड़कर,चिल्लाकर रोकर, या जैसे चाहे वैसे निकाल सकते हैं और तनाव कम होने के बाद अच्छा खानपान कर और मनपसंद संगीत सुनकर मन को खुश कर सकते है, लोगों का मानना है की इन्ही सब वजह से आज ‘भड़ास कैफे’ अब इंदौर शहर का आइडल कैफे बन गया है।

अतुल जी कहते हैं इस अनूठे प्रयोग की प्रेरणा मुझे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से मिली, जहां इस तरह के प्रयोग काफी प्रचलित हैं। मैंने इंडिया में इसकी शुरुआत इंदौर शहर से की जो बेहद पसंद किया गया और अब भड़ास कैफे को इंडिया के 49 शहरों में खोलने की तैयारी बड़ी तेजी से चल रही हैं।