- बाबू वीर कुंवर सिंह का 160वां विजयोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न
- 5 मिनट के भव्य लेजर शो का भव्य आयोजन किया गया
पटना, 25 अप्रैल 2018: मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र के बापू सभागार में बाबू वीर कुंवर सिंह के 160वें विजयोत्सव पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने बाबू वीर कुंवर से जुड़े चार पुस्तकों ( 1857 : कुंवर सिंह का लांग मार्च, शौर्य के 160 वर्ष : वीर कुंवर सिंह, कुंवर सिंह और वीर कुंवर सिंह चित्रकथा) का लोकार्पण किया। देश के विभिन्न हिस्से से आए बुद्धिजीवियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया था कि बाबू वीर कुंवर सिंह के 160वें विजयोत्सव पर राजकीय समारोह का आयोजन किया जाएगा। उसी सिलसिले में 23 अप्रैल से त्रिदिवसीय कार्यक्रम चल रहा है। आज राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है, यह अपने आप में विशिष्ट है।
श्री कुमार ने कहा कि हम लोगों ने पिछले वर्ष चंपारण शताब्दी समारोह का आयोजन किया था। 10-11 अप्रैल को बापू के विचारों पर राष्ट्रीय विमर्श का आयोजन किया गया था, जिसमें देश के बुद्धिजीवियों, लेखकों एवं विचारकों ने उसमें हिस्सा लिया था। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित भी किया गया था। गांधी जी जहां-जहां गए थे, सभी जगहों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। गांधी जी का पेशी के वक्त कोर्ट में दिया गया वक्तव्य, जिसका पूरे देश पर असर पड़ा था, इन सब चीजों पर चर्चा की गई। वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के महत्व को इस बात से समझा जा सकता है कि 30 वर्षों के अंदर ही देश आजाद हुआ। घर-घर तक दस्तक देकर साहित्य के माध्यम से बापू के विचारों को पहुंचाया जा रहा है। बापू के विचारों को अगर 10 से 15 प्रतिशत लोग आत्मसात कर लें तो समाज और देश बदल जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनवरी 2017 में गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का 350वां प्रकाश पर्व मनाया गया एवं दिसंबर 2017 में शुकराना समारोह का आयोजन किया गया। इससे देश एवं दुनिया से आए सिख श्रद्धालुओं की बिहार के प्रति अच्छी भावना बनी। आजादी की पहली लड़ाई में बाबू वीर कुंवर सिंह की भूमिका की सीमित चर्चा होती है। देश में उनकी भूमिका की विस्तृत चर्चा नहीं होती है। अगस्त 1857 से 9 महीने का लौंग मार्च करते हुए 22 अप्रैल को वीर कुंवर सिंह जगदीशपुर लौटे। वर्तमान सड़क मार्ग से यह दूरी 2380 किलोमीटर है, जबकि आज की तरह पहले सड़कें नहीं हुआ करती थीं, अतः यह दूरी उबड़ खाबड़ रास्ते के द्वारा उससे दुगनी हो जाएगी। लौंग मार्च के दौरान कुंवर सिंह देश के विभिन्न क्षेत्रों में गए। लौंग मार्च की चर्चा से यह अभिप्राय है कि कुंवर सिंह ने बिहार के बाहर जो देश भर में किया, उसकी चर्चा आवश्यक है। बाबू वीर कुंवर सिंह ने अनेक जगहों पर अंग्रेजों से युद्ध लड़ा और उनकी पकड़ में नहीं आए, इसके लिए उन्होंने छापामार युद्ध की रणनीति को अपनाया। आजादी की पहली लड़ाई में कुंवर सिंह की भूमिका पर कुछ पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है। नई पीढ़ी इसके द्वारा पूरी बातों को जानेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी इच्छा है कि इस संगोष्ठी से खास बात निकलकर सामने आए और उन सब चीजों को पाठ्यक्रम में शामिल कर बिहार के स्कूलों में बच्चों को कुंवर सिंह के बारे में जानकारी दी जाए, जिस तरह बापू के विचारों को कथावाचन के माध्यम से स्कूलों में बच्चों को बताई जा रही है। पढ़ने के दौरान ही अगर बच्चों को इन सब चीजों को सीखने का मौका मिलेगा तो यह बहुत अच्छी बात है। जब कुंवर सिंह शासन चला रहे थे तो सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की थी। उन्होंने हर तबके का सहयोग प्राप्त किया। उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में जिस तरह का संघर्ष किया, गोली लगने पर हाथ काट लिया, इन सब चीजों को नई पीढ़ी को जानने की जरुरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन का संदेश जाना चाहिए ताकि सब लोगों के बीच प्रेम और सद्भाव का माहौल बरकरार रहे। समाज में कटुता एवं तनाव का माहौल खत्म कर प्रेम, शांति एवं सद्भाव का वातावरण बनाए रखें। वीर कुंवर सिंह के संघर्ष की कहानी से युवाओं में आत्मबल बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंवर सिंह ने नर-नारी समानता की बात की थी। राज्य में नारी सशक्तिकरण के लिए अनेक काम किए गए। महिलाओं को नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। प्राथमिक शिक्षक के नियोजन में 50 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया। लड़कियों की शिक्षा में सुधार के लिए साइकिल योजना एवं पोशाक योजना चलायी गई। लड़कियों को समूह में साइकिल चलाते हुए स्कूल जाते हुये देखने से लोगों की मानसिकता बदली। राज्य में बालिका शिशु मृत्यु दर में सुधार के लिए काम करना है। बेटी की भी उतनी ही चिंता करनी है, जितना बेटे की। बाल विवाह एवं दहेज प्रथा के खिलाफ एवं शराबबंदी के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कन्या उत्थान योजना के तहत लड़की के जन्म लेने पर 2,000 रुपए की राशि दी जाएगी। एक साल में आधार से लिंक करने पर 1,000 रुपये, संपूर्ण टीकाकरण कराने पर दो साल में 2000 रुपये की राशि उपलब्ध करायी जाएगी। पोशाक योजना के लिए सभी वर्ग की बालिकाओं की राशि बढ़ा दी गई है। 12वीं उत्तीर्ण अविवाहित लड़कियों को 10,000 रूपये की राशि प्रदान की जाएगी। जबकि ग्रैजुएट उत्तीर्ण चाहे विवाहित हो या अविवाहित उन्हें 25,000 रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। 7वीं से 12वीं कक्षा की लड़कियों को सेनेटरी नैपकिन के लिये दी जाने वाली राशि 150 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए कर दी गई है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को पोशाक के लिए मिलने वाली राशि 250 रूपए से बढ़ाकर 400 रुपए कर दी गई है। हमारी नई पीढ़ी चाहे लड़का हो या लड़की खूब पढ़े, आगे बढ़े।
वहीं बापू सभागार में आयोजित संगोष्ठी में ख्याति प्राप्त इतिहासकार प्रो. सलिल मिश्रा, डॉ पी के शुक्ला, डॉ शशांक सिन्हा, डॉ रश्मि चौबे, प्रो. आई के चौधरी, प्रो. निहार नंदन सिंह, प्रो रत्नेश्वर मिश्र, डॉ अशोक अंशुमान ने बाबू वीर कुंवर सिंह पर आयोजित व्याख्यान में भाग लिया और उनकी वीरता के बारे में विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा सांस्कृतिक संध्या में श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल पटना में सविता सिंह नेपाली, श्री भरत सिंह भारती, श्री सत्येंद्र कुमार संगीत, श्री मोर्हरम राठौर, श्री अजीत झा, डॉ नीतू, कुमारी नवगीत ने बाबू वीर कुंवर की शौर्य गाथा से श्रोताओं को सराबोर कर दिया। इन कलाकारों ने एक के बाद एक कई शानदार प्रस्तुति दी, जिसने हॉल में उपस्थित तमाम दर्शकों में देशभक्ति का संचार कर दिया। वहीं, बाबू वीर कुंवर सिंह पार्क में विजयोत्सव के आज अंतिम दिन भी 25 मिनट के भव्य लेजर शो का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बाबू कुंवर की सिंह की वीरता को लेजर लाइट और साउंड के माध्यम से दिखाया गया।







