- बसव की नीतियों की पुस्तक का हुआ लोकार्पण
- प्राचीन गणतांत्रिक धरोहरों की रक्षा से मजबूत होगा लोकतंत्र
पटना, 28 जून। पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार ने कहा है कि यह ऐतिहासिक संयोग है कि ईसा के छठी शताब्दी पूर्व वैशाली के गणतंत्र और 12वीं सदी के बसव गणतंत्र का मंचन आज महान पाटलिपुत्रा की धरती पर हो रहा है। वैशाली गणतंत्र और दक्षिण का बसव गणतंत्र दोनों में प्रशासनिक निर्णयों में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान था। पटना में वैशाली- बसव गणतंत्र मंथन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज कल गणतांत्रिक मूल्यों का धीरे- धीरे ह्रास हो रहा है। गणतंत्र हाल के कुछ दिनों में धनतंत्र में तब्दील होते जा रहा है।
यह गणतंत्र की मूल आत्मा पर करारा प्रहार है। इसलिए आज के इस कार्यक्रम और इसमें उपस्थित तमाम लोगों का दायित्व बनता है कि गणतंत्र की रक्षा के लिए जोरदार कदम उठायें। श्री कुमार ने कहा कि गणतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए ऐसे आयोजनों का होना आवश्यक है। गणतंत्र मंथन का यह उत्सव भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों को और मजबूत करेगा।
इससे पहले श्री कुमार ने कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत दीप प्रज्जवलित कर की। समारोह को संबोधित करते हुए अरविंद जत्ती ने कहा कि बिहार क्रांति की भूमि रही है। भगवान महावीर व बुद्ध की यह भूमि गणतंत्र की प्रयोग भूमि भी है। भारत के कई महत्वपूर्ण बदलाव की शुरूआत बिहार की धरती से हुई है। चाहे वो चंपारण सत्याग्रह हो या विनोवा भावे का भूदान आंदोलन। इसलिए आज वो समय आ गया है, जब हम एक बार फिर बिहार की धरती से एक क्रांति कर सकते हैं। इसके लिए वेद, त्रिपीटक आदि पर एक जगह चर्चाएं हो। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के बसवेश्वर के वचन और नीतियों के प्रचार-प्रसार की शुरुआत भी बिहार से कर रहे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार ने कहा कि सामाजिक मूल्यों में निरंतर गिरावट आने की वजह से गणतांत्रिक मूल्यों में भी गिरवाट आ रही है। आज का यह कार्यक्रम संदेश देता है कि अपने प्राचीन गणतांत्रिक धरोहरों को याद करके आधुनिक समाज के नव निर्माण में हम अपनी महती भूमिका तय करें और उसे निभायें।
कार्यक्रम में डॉ जयश्री मिश्र, भंते सुमन, बाबा गुरूमिंदर सिंह, नंदन पटेल, अरविंद भंते, डॉ विलासवती खूबा, इंद्रजीत बरेल, जर्नादन पाटिल, डॉ धनकर ठाकुर, सूर्य नारायण सहनी, शारदा, इंद्रजीत पटेल, मो. इकबाल हसन और नंदन पटेल ने भी गणतंत्र और उसके मूल्यों को लेकर समारोह को संबोधित किया।







