60 प्लस की उम्र के कलाकारों ने कराओके में मंत्रमुग्ध कर दिया दर्शकों को, दूसरी कराओके महफिल का हुआ भव्य आयोजन
लखनऊ, 3 अप्रैल। गीत-संगीत की दुनिया में उम्र कोई बाधा नहीं होती, इसे साबित कर दिया लखनऊ के वरिष्ठ नागरिकों ने। फेस्का फिल्म्स एवं नटराज रिकॉर्डिंग स्टूडियो के संयुक्त तत्वावधान में दूसरी कराओके महफिल का आयोजन आइस एंड स्पाइस रेस्टोरेंट में किया गया।
इस खास महफिल में ज्यादातर 60 प्लस उम्र के प्रतिभागियों ने अपने सुरीले स्वर में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने क्लासिक गीतों की प्रस्तुति की, जो पूरे कार्यक्रम को बेहद रोचक और भावुक बना गया।
फेस्का फिल्म्स के निर्देशक राजीव प्रकाश ने बताया कि प्रतिभागियों के बीच कराओके महफिल अब सरताज बन चुकी है। कार्यक्रम में कुल 20 प्रविष्टियां रखी गईं, जिनके साथ 10 अतिथियों को भी आमंत्रित किया गया था। प्रतिभाओं को सूचीबद्ध और निर्देशित करने की जिम्मेदारी राकेश श्रीवास्तव ने निभाई, जबकि नकुल श्रीवास्तव ने गीतों को क्रमबद्ध कर स्क्रीन पर लाने का काम संभाला।
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और राष्ट्रीय गान से हुई। फीचर फिल्म लाल दाना के प्रस्तुतकर्ता राजेश श्रीवास्तव, देवेंद्र मोदी, सीएसआर सिंह, शशि मोदी, आभा प्रकाश सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में सभी ने अपने अनुभव और विचार साझा किए।
अंत में कार्यक्रम के संचालक पंकज सक्सेना ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इन गीतों ने छेड़ी पुरानी यादें:
कार्यक्रम में गायकों ने दिलकश अंदाज में कई यादगार गीत पेश किए, जिनमें शामिल थे
- :“छूकर मेरे मन को…”
- “रहें न रहें हम…”
- “तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया…”
यह कराओके महफिल साबित करती है कि संगीत की मधुरता उम्र की सीमाओं को पार कर जाती है और वरिष्ठ नागरिक भी आज भी मंच पर अपनी कला से दर्शकों को बांधने की क्षमता रखते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग:
राजीव प्रकाश, राजेश श्रीवास्तव, राकेश श्रीवास्तव, नकुल श्रीवास्तव, पंकज सक्सेना आदि।
बता दें कि यह आयोजन लखनऊ में वरिष्ठ नागरिकों की रचनात्मकता और जीवंत ऊर्जा का सुंदर उदाहरण बन गया।







