पटना, 28 नवंबर 2025 : तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर साफ़ कर दिया- बिहार में अब सिर्फ़ सत्ता नहीं, बदला भी चलेगा!
लालू प्रसाद का 28 साल पुराना सरकारी बंगला (10 सर्कुलर रोड) खाली कराने का आदेश जारी होते ही तेजस्वी ने लिखा:
“छोटे भाई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई के बंगले को खाली करने का आदेश दे दिया।
बिहार की सियासत में एक बार फिर “भाईचारा” टूटा, और अब बदले की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है। 10 सर्कुलर रोड का आइकॉनिक बंगला – जो 19 साल से लालू प्रसाद यादव परिवार का राजनीतिक केंद्र रहा वह अब खाली करने का आदेश आ गया। इस मामले को लेकर तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला: “छोटे भाई (नीतीश) ने CM पद की शपथ ली और बड़े भाई (लालू) के बंगले को खाली कराने का फरमान सुना दिया। 28 साल का भावुक रिश्ता एक नोटिस में खत्म! इतिहास नीतीश के हाथों में कालिख पुतवाएगा।”
बता दें कि 25 नवंबर को नितीश कुमार सरकार ने पूर्व CM राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड से हटाने का नोटिस जारी किया। नया आवास 39 हार्डिंग रोड आवंटित किया गया। तेज प्रताप यादव को भी एम स्ट्रैंड रोड का बंगला खाली करने को कहा गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट के 2019 फैसले के मुताबिक, पूर्व CM को आजीवन बंगला नहीं मिल सकता। RJD की 2025 विधानसभा हार (केवल 25 सीटें) के बाद राबड़ी का विधान परिषद में LoP पद खतरे में है, जिससे बंगला जाना तय।
लालू जी और उनका परिवार अब इस घर में नहीं रहेगा। जिस घर से लाखों कार्यकर्ताओं का भावुक रिश्ता जुड़ा था, उसे एक नोटिस ने खत्म कर दिया।
किन हालातों में बनी ये विपरीत परिस्थितियाँ?
एक फैक चेक के मुताबिक : बिहार की राजनीति हमेशा से गठबंधनों की रेत पर बनी रही, लेकिन नितीश-लालू का “भैयारी” रिश्ता सबसे ज्यादा टूटा-जुड़ा।
2005: नितीश ने NDA के साथ सत्ता संभाली, लालू परिवार को 1 एनी मार्ग (CM आवास) से हटाया। लालू को फॉडर स्कैम केस में जेल हुई, राबड़ी को 10 सर्कुलर रोड मिला।
2015: महागठबंधन (RJD-JD(U)-कांग्रेस) की जीत। नितीश CM, तेजस्वी डिप्टी CM बने। 5 देशरत्न मार्ग तेजस्वी को मिला।
2017: CBI-ED के केस (IRCTC होटल घोटाला) में तेजस्वी नाम आए। नितीश ने NDA में वापसी की, तेजस्वी को बंगला खाली करने को कहा।
पटना HC ने 2019 में फैसला दिया – पूर्व CM को बंगला असंवैधानिक।
2022: नितीश फिर महागठबंधन में लौटे। तेजस्वी डिप्टी CM बने, लेकिन 10 सर्कुलर रोड राबड़ी के पास रहा (LoP के नाते)।
2025 चुनाव: NDA की भारी जीत (202/243 सीटें)। नितीश ने BJP के दबाव में होम पोर्टफोलियो छोड़ा। RJD की करारी हार के बाद राबड़ी का LoP पद कमजोर, बंगला हटाने का रास्ता साफ।
माना जा रहा है कि ये विपरीत हालात BJP की मजबूत पकड़ से बने। नितीश को NDA में BJP का वर्चस्व स्वीकार करना पड़ा – पुराने “भाई” लालू को निशाना बनाकर नया “भाई” (मोदी) खुश करने की कोशिश। लेकिन ये बदले की राजनीति बिहार को और अस्थिर कर सकती है।

जनता का फायदा? शायद नहीं क्योंकि फिर विकास के वादे फिर लटक जाएंगे। इतिहास में नितीश को “पलटू राम” कहा जाता है; ये कदम उनकी छवि को और काला कर सकता है। RJD इसे “राजनीतिक अपमान” बता रही, जो 2029 चुनावों में वोटबैंक जुटा सकता है। कुल मिलाकर, सत्ता की कुर्सी पर टिकने के चक्कर में नैतिकता दांव पर लग गई।
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अन्य राजनीतिक दलों का क्या कहना है?
BJP (NDA का मुख्य सहयोगी): इसे नियमों का पालन बता रहे। प्रवक्ता नीरज कुमार बोले, “सरकारी बंगला किसी का पैतृक संपत्ति नहीं। खाली कराना कानूनी है।”
गृह मंत्री गिरिराज सिंह ने चेतावनी दी – “न खाली किया तो पुलिस कार्रवाई।”
बता दें कि इस घर के जाने के साथ नीतीश जी और लालू जी के बीच का भैयारी वाला नैतिक रिश्ता भी हमेशा के लिए खत्म हो गया।
गिरना अलग बात है, लेकिन इतना नीचे नहीं गिरना चाहिए था।
राजद खेमे में गुस्सा साफ़ है –
“जब नीतीश जी मुश्किल में थे, तब लालू जी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।
आज सत्ता मिली तो उसी परिवार को घर से बेघर करने का आदेश!
ये बदले की राजनीति की सबसे गंदी मिसाल है।”
दूसरी तरफ़ जदयू का जवाब:
“कानून सबके लिए बराबर है। सरकारी बंगला नियम के मुताबिक खाली होना ही था।”लेकिन सियासी गलियारों में सिर्फ़ एक बात गूंज रही है –
बिहार की राजनीति में “भाईचारा” खत्म हो चुका है, अब सिर्फ़ “बदला” बाकी है।
छल-कपट और बदले की ये आग कहाँ तक ले जाएगी?
बिहार देख रहा है… और इंतज़ार कर रहा है अगले वार का!
सत्ता मिली तो “भाई” बना दुश्मन। बंगला सिर्फ बहाना है, असली खेल है – लालू परिवार को पूरी तरह खत्म करने का।
बिहार की राजनीति फिर साबित कर रही है: यहाँ दोस्ती नहीं, सिर्फ मौका चलता है।






