देवरिया स्टेशन पर वायरल वीडियो ने छेड़ी कानून और अनुशासन पर बहस
पटना, 09 अक्टूबर 2025: बिहार में सरकारी शिक्षिका खुशबू मिश्रा, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया की रहने वाली हैं, का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह मामला 4 अक्टूबर 2025 के आसपास रांची-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन में हुआ, जब शिक्षिका AC कोच में बिना वैध टिकट के यात्रा कर रही थीं। ट्रेन में टिकट चेकिंग के दौरान TTE ने खुशबू मिश्रा से AC कोच का टिकट मांगा। उनके पास टिकट नहीं था, और वे देवरिया उतरने वाली थीं। TTE के बार-बार अनुरोध पर भी उन्होंने टिकट दिखाने से इनकार किया और TTE पर “महिला को परेशान करने” का आरोप लगाया।
बहस बढ़ने पर शिक्षिका ने TTE को “फालतू आदमी” कहा, जिसके जवाब में TTE ने कहा, “फालतू हम नहीं, आप हैं। आप शिक्षिका हैं, फिर भी बिना टिकट यात्रा कर रही हैं।” TTE ने इस बहस को अपने मोबाइल पर रिकॉर्ड किया, जिसके बाद शिक्षिका ने फोन छीनने की कोशिश की। अंततः TTE ने उन्हें मेमो जारी किया और ₹990 का जुर्माना लगाया। मामला यहीं नहीं थमा। देवरिया स्टेशन पर शिक्षिका ने फोन कर अपने पिता और रिश्तेदारों को बुला लिया। वायरल वीडियो में दिखा कि उनके परिवार ने TTE को घेरकर बहस की और धमकी दी।

शिक्षिका ने TTE पर “वीडियो वायरल करने” का आरोप लगाया, जबकि उनके पिता ने आक्रामक तरीके से कहा कि TTE ने “कपड़े फाड़ दिए।” RPF और पुलिस मौके पर मौजूद थीं, जिन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया। कोई शारीरिक चोट या FIR की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन TTE के साथ बदतमीजी और धमकी का माहौल साफ दिखा। भारतीय रेलवे नियमों के अनुसार, बिना टिकट AC कोच में यात्रा करने पर ₹500 से अधिक का जुर्माना लग सकता है, जो यहां लागू हुआ। TTE के साथ दुर्व्यवहार रेलवे अधिनियम की धारा 147 या 153 के तहत कार्रवाई के दायरे में आ सकता है, लेकिन इस मामले में केवल जुर्माना ही लगा।
शिक्षिका के पेशे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है, क्योंकि एक सरकारी शिक्षक से कानून और अनुशासन का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। कुछ लोगों ने बर्खास्तगी की मांग की, लेकिन इसके लिए बिहार शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह घटना रेलवे कर्मचारियों की चुनौतियों और कानून के पालन की आवश्यकता को उजागर करती है।
शिक्षिका ने नियम तोड़ा, और परिवार की आक्रामकता ने स्थिति को और जटिल किया। रेलवे और शिक्षा विभाग को इस मामले की पारदर्शी जांच करनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। यह मामला बताता है कि कानून का पालन सभी के लिए बराबर जरूरी है, चाहे उनका पेशा या स्थिति कुछ भी हो।







