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    बुरा मानो या भला मनायेंगें ‘एंटी ब्लैक मनी डे’

    By October 27, 2017Updated:October 27, 2017 ब्लॉग No Comments5 Mins Read
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    जी. के.चक्रवर्ती

    बुरा मानो या भला 8 नवम्बर को भाजपा एक बार फिर अपनी पीठ थपथपा कर जश्न मनाने जा रही है इस बार उपलब्धि वह नोटबंदी के फायदे गिना कर करने जा रही है। दरअसल, नवम्बर 2016 को पूरे देश में केंद्र की भाजपा की मोदी सरकार ने काले धन के विरुद्ध पहल करते हुए नोट बंदी की घोषणा की थी जिसे वर्ष 8 नवम्बर 2017 को पूरे एक साल होने को है। इस विशेष अवसर पर भाजपा की सरकार द्वारा पूरे देश में ‘एंटी ब्लैक मनी डे’ के रूप में मानने का फैसला किया है।

    यहाँ यह प्रश्न उठाना लाजमी है कि देश में नोट बन्दी ऐलान होने के बाद से देश के बैंको में कितना कला धन वापस आया ? इसके उत्तर में यदि हम रिजर्व बैंक के इस घोषणा पर बात करें तो उसके अनुसार देश के सभी बैंकों के माध्यम से कुल भारतीय अर्थ व्यवस्था का दो प्रतिशत ही ब्लैक मनी का स्वरूप वापस आया। ठीक इसके साथ – साथ यह बात भी सामने आयी कि कुछ लोगों द्वारा बैंक के अधिकारियों की मिली भगत से बैंक के पिछले दरवाजे से पुराने नोटों की बदली की गई जिसमे की कुछ एक बैंक अधिकारी भी निलंबित किये गए जिससे यह बात उभर कर आती है कि क्या सरकार द्वारा केवल इस 2 प्रतिशत काले धन राशि के लिए नोट बन्दी जैसे कठोर निर्णय लेना पड़ा यह बात गले से नीचे उतरने वाली बात नहीं हैं।

    इस नोट बंदी के दौरान देश के लोगों को एक बार फिर से आपात काल जैसे समय की याद ताजा हो गई थी , देश में चारो तरफ अफरा तफरी का माहौल नजर आया। दरअसल इस अफरा तफरी के माहौल का फायदा कुछ कार्पोरेट घराने के लोगों ने जम कर उठाया। ऐसे लोगो ने अपने पुराने नोटों को सफेद में बदल कर बैंक के पिछले दरवाजे से बाहर निकल गए।

    जहाँ तक काले धन का सवाल है तीन साल पहले जब केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली मोदी सरकार के चुनावी घोषणा पत्र में विदेशों में जमा काले धन को पुनः देश में वापस लाने का संकल्प लिया गया था। ऐसी घोषणा पत्र में उल्लेख पार्टी ने किस आधार पर क्यों किया गया यह तो पार्टी ही जाने लेकिन यह बात तो स्पष्ट है कि केंद्र में भाजपा की सरकार बने वर्त्तमान समय तक तीन वर्ष से अधिक का समय गुजर चुका है इस मुद्दे पर यही कहना पड़ता है कि यह बात ‘गूलर के फूल’ जैसी ही प्रतीत हो रही है। अभी कुछ ही वर्षो पहले अन्ना हजारे से लेकर बाबा राम देव जैसे लोगो ने दिल्ली में धरना प्रदर्शन कर इसे एक आंदोलन स्वरुप देश में खड़ा किया।

    इस आंदोलन से एक बात हमारे सामने आया कि भारत जैसे गरीब देश के कुछ एक लोगों की इतनी बड़ी रकम देश के बहार विदेशी बैंकों में जमा है कि इस संपूर्ण धन के देश में वापस आ जाने पर देश की सभी मुसीबतें छूमंतर हो जाने से देश की काया पलट हो सकती है। लेकिन इस बात में सबसे बड़ी बाधा यह है कि एक तरफ जहाँ विदेशी बैंक वाले काला धन जमा करने वालों के नाम पते गुप्त रखने की गारंटी देते हैं, ठीक हमारे देश की सरकारें भी इसकी गोपनीयता बरक़रार रखने की पुरजोर कोशिश में लगी रहती हैं, इसलिए काले धन एवं काले धन वालों की पुख्ता जानकारी के साथ ही साथ उनके धन राशि की सठिक आंकलन हमारे पास उपलब्ध है ही नहीं अभी विगत वर्ष में ही इसी मुद्दे पर रामजेठ मलानी द्वरा एक जन हीत याचिका दायर किया गया। उनके द्वारा याचिका में काले धन का जो आंकड़ा अंकित किया गया है उसके अनुसार यह रकम करीब 70 लाख करोड़ रुपया है। लेकिन देश के पूर्व CBI निदेशक के अनुसार यह धनराशि लगभग 500 अरब डॉलर के बराबर है । यदि केंद्र में सत्ता सिन कोई भी सरकार आज तक निषपक्ष भावना एवं सच्चे मन से इसको जानने का प्रयास करती तो शायद वर्त्तमान समय में जो इस बात पर अस्पस्टतता की स्थिति बनी हुई है तो ऐसा न होता।

    ऐसे ही कुछ कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की खिंचाई करते हुए यहाँ तक कह दिया हैं कि यदि देश के आजादी के बाद से अब तक बनी सरकरों द्वारा विदेशी बैंकों में जमा काले धन को देश में वापस लाने के लिए पुरजोर कोशिशें किया ही नहीं गया अन्यथा अब ऐसे प्रयासों की निगरानी करने के लिए अलग से एसआईटी जैसे संगठन का गठन करने का आदेश देने की जरुरत ही नहीं पड़ती। मौजूदा समय में इस संगठन की अगुआई सुप्रीम कोर्ट के सेवा निवृत दो जजों द्वारा किया जा रहा है। इस काम में सरकार द्वारा जहाँ संगठन की सहयोग करने की आवश्यकता थी वहाँ पर इस संगठन के गठन के विरोध में कोर्ट में दलीलें पेश की गई। अदालत से लेकर सड़क तक जारी सक्रियता के बावजूद काले धन को पुनः देश में वापस लाने के मुद्दे पर कुछ ख़ास होता नजर नहीं आ रहा है। लगता है कि इस काले धन की अस्तित्व और विस्तार को एक लंबे समय तक बनाये रखने में देश की वागडोर सँभालने वालों के हितों की रक्षा की जा सकती है।

    जश्न तो मने इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन इस दिनों भारत के लोगों के साथ एक और भद्दा मज़ाक हो रहा है वह यह कि अब लोगों के मोबाइल पर SMS आ रहे है जिसमे उनके बैंक अकॉउंट में लाखो -करोङो रूपए जमा होने के मैसेज आने शुरू हो चुके हैं बैंक डिटेल चेक करने पर उन्हें सिर्फ ठेंगा ही मिल रहा हैं तो क्या इसे भी नोट बंदी के फायदे से जोड़ कर देखना चाहियें?

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