प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फैसले ने छीन लिया 15 लाख लोगों की नौकरियां

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ चलाए गए नोटबंदी के फैसले से भारत में लगभग 15 लाख लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी हैं और 60 लाख से ज्यादा लोगों को रोटी के लिए परेशान होना पड़ा है। सेन्टर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई) ने सर्वे में यह खुलासा हुआ है।
इस सर्वे में कहा गया है कि तब 401 मिलियन यानी 40.1 करोड़ लोगों के पास रोजगार था। यह आंकड़ा मई-अगस्त 2016 के बीच बढ़कर 403 मिलियन यानी 40.3 करोड़ और सितंबर-दिसंबर 2016 के बीच 406.5 मिलियन यानी 40.65 करोड़ हो गया। इसके बाद जनवरी 2017 से अप्रैल 2017 के बीच रोजगार के आंकड़े घटकर 405 मिलियन यानी 40.5 करोड़ रह गए। इससे पता चलता है कि पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले के करीब 15 लाख लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा। सर्वे के अनुसार नोटबंदी की सबसे ज्यादा मार उन लोगों पर पड़ी हैं जिस कमाऊ शख्स पर घर के चार लोग आश्रित थे तो अगर इस लिहाज से देखा जाए तो नोटबंदी के फैसले से 60 लाख से ज्यादा लोगों को रोटी के लिए परेशान होना पड़ा है। सर्वे में त्रैमासिक वार नौकरियों का आंकड़ा पेश किया है।

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