भाजपा का प्रचंड जनादेश और बसपा की मजबूती

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जीके चक्रवर्ती

यूपी निकाय चुनाव 2017 में भाजपा को प्रचंड जनादेश मिला है। प्रदेश के 16 नगर निगमों में से 14 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। वहीं, दो नगर निगमों अलीगढ़ व मेरठ में बसपा ने भी अपना परचम लहराया। इन चुनाव से आम आदमी पार्टी ने भी यूपी में दस्तक दी है। प्रदेश में कई जगह आप उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कुल मिलाकर यूपी विधानसभा चुनाव के आठ माह बाद हुए नगरीय निकाय चुनावों की पहली परीक्षा में भाजपा और भाजपा के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस परीक्षा में फर्स्ट डिवीज़न पास हुए है। इसके साथ ही बीएसपी ने भी अपनी हाथी की चाल को और तेज किया और फाइट करते हुए दूसरे स्थान पर रही, इधर समाजवादी पार्टी को अपनी अंदुरुनी अंतरकलह से भरी नुकसान हुआ और वह तीसरे स्थान पर जा पहुंची। कांग्रेस ने भी मथुरा और मुरादाबाद में करारी टक्कर दी है उसे 19 सीटे मिली लेकिन उसे अभी और आत्ममंथन की आवश्यकता है।

भाजपा ने शहरों में अपना दबदबा बरकरार रखा है। लेकिन यह चुनाव खासकर भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल था पिछले चुनाव में भाजपा ने अन्य दलों पर अपना वर्चस्व कायम करते हुए बहुमत से बड़ी जीत हासिल किय था मौजूद नगर निकाय चुनाव सभी दलों के लिए विशेष कर भाजपा के लिए एक कसौटी के रूप में था क्योकि अब 2019 में लोकसभा चुनाव होंगे इसलिए यह चुनाव आने वाले समय में पार्टियों का भविष्य के दर्पण के समान होंगे इस चुनाव से भारतीय जनमानस के विचारों के धरातल पर कौन सी पार्टी खरी उतरी है यह आज के चुनाव में घोषित परिणामों को देख कर अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है।

शाम होते होते फाइनल हो गया कि अधिकतर सीटों पर भाजपा पर कब्ज़ा हो गया और उसे प्रचंड बहुमत मिल गया। मेयर की सोलह सीटों में चौदह सीटों भाजपा के कहते में और दो बीसपी के खाते में गयी। जिसमे सबसे ज्यादा कौतुहल का विषय लखनऊ की सीट का था जहां सयुंक्ता भाटिया बीजेपी की तरफ से विजयी रही। इस बार निकाय चुनाव होने से पहले ही परिणाम के पूर्व आंकलन करने वाले के लोग तरह -तरह के कयास लगाते रहे ज्यादातर लोगों के पूर्व आंकलन धराशाई हो गए यह चुनाव छोटा अवश्य था लेकिन सभी पार्टियों के भविष्य में होने वाले चुनाव के परिणामो के रुख का अंदाजा इसके परिणामो को देख कर लगाया जा सकता है। यह बात अलग है कि इस चुनावों के परिणामो को देख कर भविष्य की भविष्य वाणी नहीं की जा सकती है। इस बार यह जरूर देखने को मिला कि नोटीबंदी और जीएसटी को मुद्दा बनाकर भाजपा कि खिलाफ हवा बनाने लोगो का आकलन भी धराशायी हो गया । जनता के मूड का अंदाज एक्जिट पोल वालो को समझने में भारी चूक हुई। मौजूदा नगर निगम चुनाव में भाजपा अपने विपक्षियों को कड़ी टक्कर देने की एवं अपने बहुमत से जीत को पुनः दोहराने की कड़ी चुनौती थी, लेकिन जैसे जैसे नगर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आते गए उससे भाजपा के हाथ सफलता हाथ लगती गयी। इस तरह एक बार भाजपा ने जीत हासिल कर यह साबित कर दिया की पीएम मोदी की विज़न की जीत हुई है और हारने वाले ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ते रहे।

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