ई वित्त मंत्री ससुरे सब इतने बड़े चोर क्यों होते हैं ?

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दयानंद पांडेय  

अब अगर वित्त मंत्री वकील होगा तो वह अपनी चार सौ बीसी से बाज भी कैसे आएगा। चिदंबरम हो चाहे अरुण जेटली दोनों ही चोर। लेकिन जेटली ने तो अब की अजब पाकेटमारी भी दिखा दी । टैक्स स्लैब तो नहीं ही बढ़ाया पी एफ निकालने पर भी टैक्स भिड़ा दिया। 
जैसे कुछ बैंक लोन जल्दी वापस करने पर भी पेनाल्टी लगा देते हैं। एक यशवंत सिनहा इतने होशियार थे कि हर चीज़ पर सर्विस टैक्स , सेज टैक्स अदि लगा दिया। ऐसे ही एक बेईमान विश्वनाथ प्रताप सिंह बतौर वित्त मंत्री अनाप-शनाप टैक्स लगा कर वेतन भोगियों पर डाका डाल गए थे । पहले गैस पेट्रोल के दाम में आग लगाई फिर प्रधान मंत्री बन कर मंडल की आग लगाई। 
समझ नहीं आता ई वित्त मंत्री ससुरे सब इतने बड़े चोर क्यों होते हैं ? आप ही बताईए कि मध्य वर्ग का वेतनभोगी का इनकम टैक्स वेतन से ही कट जाता है उस के बाद भी यह टैक्स , वह टैक्स , सर्विस टैक्स ,रोड टैक्स , टोल टैक्स का नरक भी वही भुगतता है। इस टैक्स का पैसा नेताओं , अफसरों , ठेकेदारों की ज़ेब में चला जाता है । ठेका , कमीशन , रिश्वत आदि रुप धर कर । बाक़ी तो सब चोर होते हैं ताक तुक कर टैक्स-वैक्स सब बचा लेते हैं। इन के आंकड़ों में किसान, कामगार ख़ुश दीखता है , धरती पर ख़ुदकुशी करता है । बजट के आंकड़ों में देश खुशहाल रहता है पर महंगाई में बेलगाम रहता है । दाल आप ख़रीद नहीं सकते , सब्जी आप ख़रीद नहीं सकते , आटा , चावल भी तश्तरी में सजा कर नहीं रखा । आप खाएंगे क्या ? अंबानी और अडानी को ? जिन की सालाना ग्रोथ हज़ार प्रतिशत सालाना हो रही है ? ई सब कौन सी चक्की का आटा खा रहे हैं भाई ? जो ग़रीब आदमी का जीना मुहाल हो गया है । यह बजट है कि ग़रीब आदमी की पिटाई का पिटारा है ?
सरोकारनामा से साभार

(Monday, 29 February 2016 को प्रकशित)

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