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    Home»ब्लॉग

    उपलब्धियों के राज्यपाल रामनाईक

    By January 8, 2018Updated:January 8, 2018 ब्लॉग No Comments6 Mins Read
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    श्याम कुमार 

    आज राजभवन, लखनऊ में ऐसा लग रहा था, जैसे मोतीलाल वोरा एवं आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री का दौर लौट आया। उस दौर में राज्यपाल जिस प्रकार औपचारिकताओं से दूर होकर सबसे मिलते थे और जन-जन के हृदय में बस गए थे, बिलकुल वही अनुभूति वर्तमान राज्यपाल राम नाईक के समय में हो रही है। उन्होंने राजभवन में ‘उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षाः महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम’ विषयक पत्रकारवार्ता का आयोजन किया। राज्यपाल राम नाईक की विशेषता रही है कि उन्होंने अबतक जो भी पत्रकारवार्ताएं आयोजित कीं, वे सभी अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं सारगर्भित हुईं। उच्च शिक्षा एवं नारी सशक्तिकरण के संदर्भ में उनकी इस पत्रकारवार्ता ने भी यह प्रमाणित किया कि राम नाईक का दिल-दिमाग रचनात्मक दिशा में कितना अधिक सक्रिय रहता है। उनकी इस रचनात्मकता ने उनके कार्यकाल में प्रदेश का पूरा माहौल बदल दिया।

    विश्वविद्यालयों में जो क्रांतिकारी सुधार हुए हैं, वे राम नाईक की इसी प्रवृत्ति का फल हैं। हर दिशा में उनका दृष्टिकोण सार्थक एवं सुधारवाला होता है। अनेक राज्यपाल आते हैं और चले जाते हैं, किन्तु अपनी कोई छाप नहीं छोड़ पाते। लेकिन राम नाईक को मैं ‘जीवन्त राज्यपाल’ कहा करता हूं। कोई व्यक्तित्व अपने कार्यों में किस प्रकार बड़ी सादगी से अमरत्व प्राप्त कर लेता है, राम नाईक इसके ज्वलन्त उदाहरण हैं।

    पत्रकारवार्ता के उपरान्त राज्यपाल राम नाईक पत्रकारों के साथ अन्नपूर्णा कक्ष में गए, जहां बड़े अनौपचारिक रूप से उन्होंने खड़े-खड़े पत्रकारों से वार्तालाप किया। उन्होंने कहा भी कि यदि वह पीछे रखे सोफों पर जाकर बैठ जाएंगे तो उनके साथ अधिकारीगण बैठेंगे, जिससे अनौपचारिक माहौल नहीं रह पाएगा। पत्रकार भी चाय-नाश्ता छोड़कर राज्यपाल से बातें करने लगे। उनके साथ पत्रकारों ने बड़े उत्साह से फोटो खिंचाई और खींची भी।

    एक पत्रकार ने राम नाईक की प्रशंसा करते हुए उनसे यह कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस’ मनाने के लिए सरकार को राजी करने में उनका बहुत बड़ा योगदान है तो राम नाईक मेरी ओर इशारा कर बोले कि आधा श्रेय इन्हें है। वैसे तो यह साधारण बात है, लेकिन इससे राम नाईक के हृदय की विशालता परिलक्षित होती है। मैंने तैंतीस वर्ष पूर्व जब इलाहाबाद के परी भवन में पहला ‘उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस’ आयोजित किया था तो उसमें मुख्य अतिथि हिन्दी की महान साहित्यकार महादेवी वर्मा थीं तथा अध्यक्षता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरिश्चंद्रपति त्रिपाठी ने की थी। तब से प्रतिवर्ष मैं वह आयोजन करता आ रहा हूं तथा बाद में जब मैं लखनऊ रहने आ गया तो यहां वह उक्त आयोजन करने लगा। इलाहाबाद में ‘उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस’ आयोजन की नींव डालते समय मुझे कल्पना भी नहीं हो सकती थी कि कभी राम नाईक-जैसे राज्यपाल का सहयोग प्राप्त हो जाएगा, जिनके प्रयास से उत्तर प्रदेश की सरकार न केवल राजधानी लखनऊ में, बल्कि प्रदेश के सभी जनपदों में बड़े उत्साह से ‘उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस’ आयोजन करेगी।

    मैंने पत्रकारवार्ता में राज्यपाल से प्रश्न किया कि उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अवकाशप्राप्त शिक्षकों को नियुक्त करने का जो फैसला किया गया है, उस पर उनका क्या मत है? राज्यपाल ने उत्तर में जो बात कही, वह पूर्णतः सही है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए तत्काल अनुभवी शिक्षकों की आवश्यकता है, जिसकी पूर्ति सेवानिवृत्त शिक्षकों की तुरन्त भरती द्वारा की जा सकती है। यह निर्णय विद्यार्थियों के लिए बहुत लाभप्रद सिद्ध होगा। जो अध्यापक लम्बे समय तक अध्यापन-कार्य कर चुकते हैं, उन्हें बहुत व्यापक अनुभव होता है तथा वे अध्यापन में गुणात्मक परिणाम प्रस्तुत कर सकते हैं।

    जिन अध्यापकों की शिक्षा में गहराई से एवं वास्तविक रुचि होती है, उनकी योग्यता का दायरा भी बहुत बड़ा हो जाता है। वैसे, यह बात अन्य सेवा-वर्गों पर भी लागू होती है। मेरी जानकारी में अनेक ऐसे बहुत ही काबिल आईएएस अधिकारी रहे हैं, जो सेवानिवृत्ति के बाद निष्क्रिय हो गए, जबकि उनकी योग्यता का किसी रूप में लाभ उठाया जाता तो शासन एवं जनता, दोनों का भला होता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अवकाश प्राप्त आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र की योग्यता को पहचानकर उन्हें जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी, उससे प्रधानमंत्री को बहुत मदद मिली। इसी प्रकार सेवानिवृत्त शिक्षकों की योग्यता को भी व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए और विद्यार्थियों के हित में उसका अधिकाधिक उपयोग किया जाना चाहिए। एक पत्रकार ने राम नाईक से जब यह प्रश्न किया कि इससे युवा वर्ग को आगे बढ़ने के अवसरों में बाधा उपस्थित होगी तो राम नाईक ने शंका को निराधार बताते हुए कहा कि युवाओं के लिए आगे बढ़ने के तमाम नए-नए अवसर बनते जा रहे हैं।

    राज्यपाल राम नाईक ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के मामले में गत वर्षों में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष १९५१ में देश में पुरुषों की साक्षरता-दर २७.७६ एवं महिलाओं की साक्षरता-दर मात्र ८.८६ थी, जो वर्ष २०११ में बढ़कर पुरुषों की साक्षरता-दर ८२.१४ एवं महिलाओं की साक्षरता-दर ६५.४६ प्रतिशत हो गई। इसी क्रम में राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश के सदर्भ में बताया कि यहां वर्ष २०११ में पुरुषों की साक्षरता-दर ७९.२४ प्रतिशत व महिलाओं की साक्षरता-दर ५९.२६ प्रतिशत हो गई है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल २८ विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति/कुलाध्यक्ष/अध्यक्ष भी होते हैं। राम नाईक ने बताया कि प्रदेश का राज्यपाल बनते समय उन्होंने संकल्प किया था कि यहां के विश्वविद्यालयों का शैक्षिक सत्र वह नियमित कराएंगे तथा समय पर दीक्षांत-समारोह कराएंगे, ताकि शिक्षा पूर्ण करनेवाले विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां यथासमय उपलब्ध हो जाएं और उन्हें रोजगार या व्यवसाय के अवसर ढूंढ़ने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। राज्यपाल ने संतोष व्यक्त किया कि उन्होंने अपना संकल्प लगभग पूरा कर लिया है।

    राज्यपाल ने उल्लेख किया कि इसी प्रकार दीक्षांत समारोहों की वेशभूषा के संदर्भ में अंग्रेजों के समय से चली आ रही गाउन व हैट की रूढ़िवादी परम्परा को समाप्त करने के उनके सुझाव को सभी विश्वविद्यालयों ने स्वीकार किया तथा वहां अब दीक्षांत समारोहों में भारतीय वेशभूषा में विद्यार्थी उपाधियां ग्रहण कर रहे हैं। दीक्षांत समारोहों में छात्राओं की बढ़-चढ़कर आगे आने की झलक दिखाई दे रही है। ५७ प्रतिशत संख्या में छात्राओं ने दीक्षांत समारोहों में उपाधियां प्राप्त कीं तथा ६६ प्रतिशत पदकों पर छात्राओं ने कब्जा किया। इसी प्रकार अन्य अनेक आंकड़े देते हुए राज्यपाल ने उल्लेख किया कि उच्च शिक्षा में छात्राएं जिस प्रकार तेजी से आगे बढ़ रही हैं, वह महिला-सशक्तिकरण का सबसे बड़ा प्रमाण है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं शोध-कार्यों में उत्तरोत्तर सुधार के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं तथा और सुधार की आवश्यकता पर भी ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। यह बताए जाने पर कि अनेक जगह फर्जी शोध पर डॉक्टरेट की उपाधियां बांटी जा रही हैं, राज्यपाल ने कहा कि ऐसी जानकारी मिलने पर वह कार्रवाई करते हैं तथा उन्होंने अश्वस्त किया कि यदि निश्चित मामले उन्हें उपलब्ध कराए जाएंगे तो वह अवश्य कार्रवाई करेंगे।

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