पुण्यतिथि पर विशेष
एक धमाका हुआ और देश में सन्नाटा। मां भारती खून से लथपथ थी। रेडियो पर खबर आई, देश की पलकों पर दुखों का सैलाब ले आई। भारत मां ने न सिर्फ पूर्व प्रधानमंत्री बल्कि अपना लाडला बेटा खो दिया था। विपक्ष के नेता वाजपेयी जी भी भावुक हो गए थे।
जी के चक्रवर्ती
वैसे तो हमारे देश की राजनीति मे अनेको राज नेताओं ने जन्म लेकर अपने कारनामों से देश को गौरान्वित किया है ऐसे ही कुछ नेताओं में राजीव गांधी का नाम भारत वर्ष के राजनीतिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया। कुछ नेता जिन्होंने देश और देशवासियों के लिए ऐसे कार्य करके चले गये जिसके कारण वे सदा सदा के लिये हिन्दुस्तान की जनता के दिलों पर राज करते हुये अमर हो गये।
कांग्रेस के राजीव गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व के व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल ज़मीन पर, बल्कि हिन्दुस्तान की जनता के दिलों पर भी राज किया। आज भले ही वे हमारे बीच इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन वे देशवासियों के दिलों में आज भी जीवित हैं। राजीव गांधी एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने भारत के लिये उन्नीसवीं सदी में ही इक्कीसवीं सदी के भारत का सपना देखाने वाले व्यक्ति हुये।
राजीव गांधी एक आधुनिक सोच रखने वाले एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिनकी निर्णय लेने की क्षमता अद्भुत होने के साथ ही साथ भारत को दुनिया की नजरों में उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे। अपने इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने देश को अनेकों क्षेत्रों में जैसे संचार क्रांति, कम्प्यूटर क्रांति, शिक्षा का प्रचार- प्रसार के साथ 18 वर्ष के भारतीय युवाओं को उनके मताधिकार का प्रयोग करने, पंचायती राज व्यवस्था लागू करने जैसे मुद्दे को जमीनी हक़ीक़त में उतारने के लिए उन्हें याद किया जाएगा।
आज राजीव गांधी हमारे देश में कम्प्यूटर क्रांति के जनक के रूप में जाने जाते हैं। वे भारतीय युवाओं के लोकप्रिय नेता हुआ करते थे। उन्होंने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में कई ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए जिसका प्रभाव आज देश के विकास में हमे देखने को मिल रहा है। आज देश के बच्चे-बच्चे के हाथों तक में दिखने वाला मोबाइल उन्हीं की देन है।

मात्र 40 वर्ष की उम्र में ही भारत देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने वाले सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री होने का गौरव उन्हें प्राप्त है। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त, 1944 को मुंबई में हुआ था। वे दुनिया के उन युवा राजनेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने इतनी कम उम्र में सरकार की अगुवाई की और देश के इतिहास में सबसे अधिक जनादेश हासिल करने वाले राज नेता बने। एक महीने की लंम्बी चुनावी मुहिम में संलग्न रह कर वे पृथ्वी की परिधि के डेढ़ गुना के बराबर की दूरी तय करते हुए देश के लगभग सभी हिस्सों में पहुंच कर 250 से भी अधिक जनसभाएं कर देश के लाखों लोगों से मुलाक़ात कर चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत से जीत दिलवाकर आने आपको एक नेता साबित किया जिसके कारण उस वर्ष कांग्रेस पार्टी ने रिकॉर्ड 401 सीटें प्राप्त किया था।
दरअसल राजीव गांधी राजनीति में आना नहीं चाहते थे लेकिन कुछ कारणों से उन्हें भारतीय राजनीति में उतरना पड़ा जिसके कारण उन्हें राजनीतिक मैंदान में उतरने में देर हुई। उस समय सत्तर करोड़ भारतीयों के नेता के तौर पर उनकी यह शानदार शुरुआत क़ाबिले-तारीफ़ थी।
राजीव गांधी के पास राजनीति या इतिहास से संबंधित न तो पुस्तकें ही थी और न कोई ज्ञान ही था इसके विपरीत उनके पास विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की कई पुस्तकें हुआ करती थीं। हालांकि संगीत में भी उनकी रुचि होने के साथ ही साथ उन्हें फ़ोटोग्राफ़ी और रेडियो सुनने का भी शौक था। हवाई जहाज उड़ाने का उन्हें बड़ा जुनून था, इसलिये इंग्लैंड से घर लौटने के बाद उन्होंने दिल्ली फ़्लाइंग क्लब की प्रवेश परीक्षा में पास होने के बाद पशिक्षण लेकर व्यावसायिक पायलट का लाइसेंस प्राप्त किया। इसके बाद वे वर्ष1968 में घरेलू राष्ट्रीय जहाज़ कंपनी इंडियन एयरलाइंस के पायलट बन गये।
कैम्ब्रिज में उनकी मुलाक़ात इतालवी सोनिया मैनो से हुई थी, वह उस समय अंग्रेज़ी विषय की अध्यन कर रही थीं। उन्होंने वर्ष1968 में नई दिल्ली में सोनिया से व्याह कर लिया और जब उनके दो संतान पैदा हुये तो वे अपने दोनों बच्चों राहुल और प्रियंका के साथ नई दिल्ली में इंदिरा गांधी के निवास पर रहने लगे। 23 जून वर्ष1980 को एक जहाज़ हादसे में उनके भाई संजय गांधी की मौत हो जाने के बाद से सभी पतिस्थितियाँ बदल गई और उन पर राजनीति में पदार्पण कर अपनी मां की सहयोग करने का उन पर दबाव बनने लगा। ठीक उसी समय कई तरह के आंतरिक एवं वाह्य चुनौतियां उनके सामने मुहंवए खड़ी थी पहले- पहल तो उन्होंने इस सबका बहुत विरोध किया, लेकिन उसके पश्चात उन्हें अपनी मां की बात स्वीकार कर न चाहते हुए भी सियासत में प्रवेश किया।
अपने प्रधानमंत्रीत्व काल में राजीव गांधी ने भारत के नौकरशाही में सुधार लाने का भरपूर प्रयास करते हुये देश की अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के लिये अनेको कारगर क़दमों को भी उठाया लेकिन पंजाब और कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को नाकाम करने की उनके प्रयासों का बुरा प्रभाव पड़ा। भारतीय राजनीति को भ्रष्टाचार से मुक्त देखने के इरादे से वे लगातार प्रयासरत रहे लेकिन यह दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि उन्हें भ्रष्टाचार के कारण सबसे अधिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
उन्होंने अपने प्रधानमंत्रित्व काल मे अनेकों निर्भीक क़दम उठाये जिनमें श्रीलंका में शांति सेना का भेजाना, असम समझौता, पंजाब समझौता, मिज़ोरम समझौता आदि जैसे ज्वलंत समस्याये देश के सामने खड़ी थी, जिसके कारण वे चरमपंथी उनके शत्रु बन गए जिसके परिणामस्वरूप श्रीलंका में सलामी गारद के निरीक्षण करते समय उन पर पीछे से बंदूक के बट से हमला किया गया, लेकिन वे इस घटना मे बाल-बाल बच गये थे।
वर्ष 1989 में उन्होंने प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे देने के बावजूद वे कांग्रेस पार्टी के नेता के पद पर बने रहे। राजीव गांधी देश मे होने वाले आगामी आम चुनाव के प्रचार के लिए 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेराम्बदूर गये हुये थे वहां एक आत्मघाती हमले में उनको मौत की नींद में हमेशा -हमेशा के लिये सुला दिया। उनके मौत की खबर से सम्पूर्ण देश में शोक की लहर दौड़ गई। राजीव गांधी की देशसेवा के लिये उन्हें मरणोपरांत भारतरत्न से भी सम्मानित किया गया है।







