एक्सपर्ट कमेंट: रविंद्र सुधालकर
भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 अप्रैल 2018 को जारी अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया है। दरअसल विदेशी ब्रोकरेज संस्थान, बैंक ऑफ अमेरिका मेर्रिल लिंच ने यहां तक भविष्यवाणी की है कि अगर मानसून अच्छे हुए तो अगस्त 2018 में होने वाली समीक्षा बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों को और भी घटा सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक की आर्थिक नीतियां, ब्याजदरों में बृद्धि नहीं होना, मुद्रास्फीति में गिरावट के साथ -साथ इस साल जीडीपी में बेहतर वृद्धि, घर खरीदने वालों के लिए शुभ संकेत हैं।पिछले तीन -चार वर्षों में कीमतों में गिरावट और समय पर घर मिलने के कारण, पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अपने सपने के घर में निवेश का सुनहरा मौका है। रविंद्र सुधालकर, कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रिलायंस होम फाइनांस एवं सह अध्यक्ष नेशनल कॉउन्सिल ऑन अफोर्डेल हाउसिंग, एसोचैम का कहना है कि सरकार अनुकूल नीतियों के कारण आवास में निवेश में उछाल आया है, जिसकी प्रतीक्षा लंबे समय से थी। 2022 तक सबके लिए आवास योजना के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार ने आवासीय क्षेत्र की नीतियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अचल संपत्ति विनियमन और विकास अधिनियम (रेरा) जिसके तहत उम्मीद की जा रही है कि बड़े पैमाने पर तैयार घरों, खासतौर पर प्रीमियम और लक्जरी सेगमेंट के घरों की कीमत पहले से कम होगी।

रेरा यह भी सुनिश्चित करता है कि तय की गई समय सीमा के अन्तर्गत उपभोक्ता को वह सब मिल जाए जो उससे वादा किया गया है। रेरा के बाद बिल्डर और रियल इस्टेट कंपनियां पहले की तुलना में अपने उपभोक्ताओं की सुरक्षा का ज्यादा ख्याल कर रही हैं। कई राज्यों की सरकारें अपनी नीतियों में ऐसे परिवर्तन कर रही हैं जिसका फायदा उपभोक्ता को मिल सके। दिल्ली, झारखंड,राजस्थान और हरियाणा की सरकारें तो महिलाओं को स्टाम्प ड्यूटी में आंशिक रूप् से छूट भी दे रही हैं। इसी तरह सस्ते आवास के लिए नीतिगत ढांचे को भी लागू किया जा रहा है।
सस्ते आवास के लिए आदर्श ढांचे को लाने वाले राज्यों में राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश अव्वल थे। इस बीच महाराष्ट्र आवासीय क्षेत्र विकास प्राधिकरण ( म्हाडा) की पुनर्विकास परियोजनाएं और झोपड़ पट्टी पुनर्विकास प्राधिकरण (एसआरए ) की योजनाओं को महाराष्ट्र सरकार द्वारा रेरा के अंतर्गत लाने से मुंबई की बहुसंख्यक आबादी, जो झोपड़पट्टी में रहती है और जिनकी संपत्ति पुनर्विकास में चली गई या जाने वाली है, को लाभ मिलने की उम्मीद है। एक अनुमान के अनुसार मुंबई की 41 प्रतिशत आबादी झोपड़पट्टी में रहती है और 85 प्रतिशत निर्माण, पुनर्विकास में शामिल हैं।
रविंद्र सुधालकर बताते है कि किफायती आवास के लिए आधारिक संरचना और बिल्डर एवं उपभोक्ता दोनों को करों में तरह तरह की रियायत की पेशकश से उम्मीद की जाती है कि आवासीय परियोजाओं में बढ़ोतरी होगी। किफायती आवास पर केंद्रित आवासीय परियोजनाओं के कारण उपभोक्ता अब अपने बजट के अनुसार अचल संपत्ति में निवेश कर सकते हैं। हाल ही में सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसइस ) में पहली बार खरीदे गए घर पर जीएसटी में चार प्रतिशत की कटौती की घोषणा की है। कटौती की इस घोषणा का लाभ पहली बार घर खरीदने वाले उन ग्राहकों को होगा जिनके घर का अधिकतम आकार 1615 वर्गफीट है और जिनका वार्षिक पारिवारिक आय अधिकतम 18 लाख रुपए है।
इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी की वार्षिक पारिवारिक आमदनी 18 लाख रुपए है और उसने सीएलएस इस के अंतर्गत 1615 वर्गफीट का चार खरीदा है तो 2.7 लाख रुपए का फायदा हुआ। लेकिन जो खरीददार सीएलएस इस की सीमा में नहीं आते उन्हें 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। जीएसटी में यह छूट उन किफायती आवासों पर भी लागू होगा जिनका अधिकतम कारपेट एरिया 646 वर्गफीट होगा। पहली बार घर खरीदने वाली शर्त यहां लागू नहीं होती। जीएसटी में छूट के साथ क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम, रेरा के अंतर्गत उपभोक्ता को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां के कारण अब आर्थिक रूप से पिछड़ावर्ग, निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोगो ंको अब आवासीय परियोजनाओं में निवेश करने के लिए सही समय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब आबादी का एक बड़े हिस्से का अपने घर का सपना साकार करने में कोई परेशानी नहीं होगी।








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