क्या ऐसे ही होते हैं आज के प्रधान सेवक, नौकर और अकबर ?

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दयानंद पांडेय  
एक बार वीरबल ने अकबर को महाभारत पढ़ने के लिए दिया । अकबर ने महाभारत पढ़ा । दरबार लगाया । फिर बताया कि वीरबल ने उन्हें महाभारत पढ़ने को दिया था । पढ़ा है और मुझे महाभारत बहुत पसंद आया है । अब मैं चाहता हूं कि मेरे लिए भी एक महाभारत लिखी जाए । पूरा दरबार बहुत सुंदर , बहुत बढ़िया ! आदि से गूंज गया । हर कोई वाह-वाह में लग गया । लेकिन वीरबल चुप थे । अकबर को यह अच्छा नहीं लगा । और वीरबल से कहा कि तुम ने ही महाभारत दिया मुझे पढ़ने के लिए दिया और तुम्हीं चुप हो । सब कुछ न कुछ कह रहे हैं, तुम भी कुछ कहो । 
वीरबल ने कहा , जहांपनाह कुछ कहने से पहले मैं महारानी से एक सवाल पूछने की इज़ाज़त  चाहता हूं। अकबर ने कहा , इज़ाज़त है । वीरबल ने महारानी से पूछा कि क्या आप अपने लिए पांच पति पसंद करेंगी ? महारानी भड़क गईं । बोलीं , क्या बेहूदा सवाल है ? अकबर भी नाराज हो गए । बोले, यह क्या बेवकूफी की बात कर रहे हो वीरबल ?
गुस्ताखी माफ़ हो जहांपनाह ! पर इसी लिए इज़ाज़त ले कर सवाल पूछा था ।  वीरबल ने कहा । लेकिन अकबर की समझ में सब कुछ तुरंत ही आ गया । उन्हों ने तुरंत फ़ैसला दिया और कहा कि मेरे लिए कोई महाभारत नहीं लिखी जाएगी । और दरबार बर्खास्त कर दिया। अकबर समझ गए कि महाभारत की बुनियाद में द्रौपदी के पांच पति भी हैं । अकबर ने वीरबल की बात को दिल पर भी नहीं लिया ।
लेकिन आज की तारीख़ के अकबर क्या कर रहे हैं ? आज के अकबर के पास न तो कोई वीरबल है, न वीरबल या किसी की बात को , सच बात को भी बर्दाश्त करने की क्षमता है । कल की तारीख़ में कांग्रेस की सोनिया गांधी ने भी यही किया था । किसी की नहीं सुनी थी । नतीज़तन कांग्रेस नेस्तनाबूद हो गई। आज की तारीख़ में नरेंद्र मोदी भी यही कर रहे हैं । नतीज़ा सामने है । बिहार में भाजपा नेस्तनाबूद हो गई है । मोदी ने न आर के सिंह की सुनी , न शत्रुघन सिनहा की । आडवाणी , जोशी , यशवंत सिनहा आदि तो खैर पहले ही से हाशिए पर थे । पर आज भाजपा सांसद भोला सिंह की जो आह भरी बातें निकल रही हैं और वह जो कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी ने प्रधान मंत्री की प्रतिमा को तोड़ दिया है । तो समझिए कि बात बहुत ज़्यादा बिगड़ चुकी है । इतनी कि भाजपा के गार्जियन मोहन भागवत तक निशाने पर हैं । भागवत , मोदी और अमित शाह की अब हर कोई ख़बर ले रहा है । पार्टी से लगायत सहयोगी पार्टियां तक इन पर फाट पड़ी हैं । मतलब बिहार के भूकंप में बहुत कुछ ढह गया है , ध्वस्त हो गया है । इतना कि हाशिए पर फेंक दिया गया मार्ग दर्शक मंडल भी आक्रामक हो गया है यकबक !
क्या यह वही नरेंद्र मोदी नाम का आदमी है जो संसद की सीढ़ियों पर माथा रख कर घुसा था । यह वही आदमी है जो कहता था कि मैं प्रधान सेवक हूं। अगर प्रधान सेवक है तो जब पूर्व गृह सचिव और सांसद आर के सिंह जब कह रहे थे कि पैसे ले कर टिकट दिया जा रहा है तो यह आवाज़ समय रहते क्यों नहीं सुनी गईं ? रही बात शत्रुघन सिनहा कि तो वह तो खैर पुराने ब्लैकमेलर हैं । उन की बात का कोई मतलब नहीं है । लेकिन प्रधान मंत्री की लफ्फाजी का कोई मतलब है क्या ? अच्छे दिन की प्रत्याशा में और इस की जुमलेबाज़ी में भींगी जनता के इस प्रधान सेवक ने महंगी दाल , प्याज और गाय के विवाद में उलझने-उलझाने के अलावा देश को और क्या दिया है फ़िलहाल ।
हाल यह है कि आज अपने बेटे के चुनाव क्षेत्र राघवपुर में नाव से पहुंच कर बिलकुल नरेंद्र मोदी अंदाज़ , उसी तेवर और उसी ड्रामेबाज़ी में डूब कर कहा कि हम आप के नौकर हैं , हमारा बेटा आप का नौकर है ! आप लोग हमारे मालिक हैं । तो यह सब सुन कर देश के प्रधान सेवक की याद आई और घिन भी आई । इस लिए भी कि इस राघवपुर का प्रतिनिधित्व लालू भी कर चुके हैं और उन की पत्नी राबड़ी भी । अब बेटा आ गया है प्रतिनिधित्व करने । लेकिन एक सड़क और पुल नहीं मिल पाया है राघवपुर को । कि लालू को आज भी वहां नांव से आना पड़ा। क्या ऐसे ही होते हैं आज के प्रधान सेवक , नौकर और अकबर ? जिन के पास न कोई वीरबल होता है , न कोई हया , न कोई शर्म !

सरोकारनामा से साभार

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