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    चीन से त्रस्त दुनिया

    ShagunBy ShagunSeptember 23, 2020 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    Post Views: 495

    लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव लगातार ‘बढ़ रहा है। गलवान घाटी से लेकर पैंगोंग झील तक चीन को मुंह की खानी पड़ी है। भारत सरकार द्वारा ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही साथ दक्षिण चीन सागर पर युद्धपोतों की तैनाती हो चुकी है। भारत सरकार चीन पर राजनैतिक, कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर शिकंजा कसने का प्रयास कर रही है। चीन और चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स की तिलमिलाहट सहज समझी जा सकती है।

    भारत पूर्वोत्तर के राज्यों के विकास की तरफ अधिक ध्यान दे रहा है जिससे चीन को पीड़ा हो रही है। चीन आर्थिक मदद देकर भारत के मित्र पड़ोसी देश श्रीलंका, म्यांमार और नेपाल को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रहा है। भारत सरकार को इस दिशा में सोचना होगा और इन छोटे देशों को अधिक आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। दुनिया के लगभग सभी बड़े देश कोरोना महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार मानते हैं।

    आज पूरी दुनिया चीन और चीन की विस्तारवादी विनाश नीति से परेशान है। चीन से उसके सभी पड़ोसी देश परेशान हैं। इसके विपरीत भारत दुनिया का एकमात्र राष्ट्र है जिसमें कभी विस्तारवादी प्रवित्ति नहीं रही है। भारत सदैव शांतिवत विकासवाद का समर्थक रहा है। जमीन से लेकर पहाड़ तक और नदियों से लेकर समंदर तक चीन अवैध कब्जा करना चाहता है। चीन की नीति विस्तारवाद की रही है जिस कारण उसके सारे पड़ोसी देश उससे परेशान हैं। अत्यधिक विस्तारवाद विनाश को आमंत्रित करता है। यही कारण है कि आज दुनिया के लगभग सारे देश भारत के पक्ष में खड़े हैं और चीन के साथ पाकिस्तान जैसे कुछ देश ही हैं। निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा जून में चीन के 59 मोबाइल एप्स पर प्रतिबंध लगाया गया जिसमें टिकटॉक भी था। अकेले ‘टिकटोक’ के भारत में 20 करोड़ यूजर्स थे।

    इस डिजिटल स्ट्राइक से इस ऐप की मालिक ‘बाइटडांस’ को 6 बिलियन डॉलर तक का नुकसान झेलना पड़ा। जुलाई के अंत में 47 और चीनी ऐप्स पर भारत सरकार ने रोक लगा दिया। 2 सितम्बर को एक बार फिर भारत सरकार ने 118 ऐप्स पर रोक लगा दिया गया।

    आजादी के बाद से भारत का विदेशी व्यापार संतुलन नकारात्मक रहा है। यही हाल हमारा चीन के साथ भी है। भारत निर्यात की अपेक्षा आयात ज्यादा करता है। चीन के साथ तनातनी भारत को अवसर और नवीन ऊर्जा प्रदान कर रही है। भारत का ध्यान ‘स्वदेशीकरण’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्ट अप इंडिया’ पर केंद्रित होना चाहिए और इसको चरितार्थ करना चाहिए। भारत में बने हुए खासकर मेडिकल उपकरणों में लोगों का भरोसा अधिक है। ग्लोबलाइजेशन के दौर में किसी देश के आयात को रोका नहीं जा सकता क्योंकि भारत दुनिया के विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संस्थाओं और समूहों का सदस्य है। हम चीन से बने हुए सामानों को आयात करने से नहीं रोक सकते हैं और ना यह फायदेमंद होगा लेकिन हम देश में निर्मित वस्तुओं को खरीदने के लिए देशवासियों को प्रेरित जरूर कर सकते हैं।

    बिना कोई आर्थिक प्रतिबंध लगाए भारत चाहे तो चीन के बने सामान का पूर्ण बहिष्कार कर सकता है। इसके पहले बहुत सारे देशों में ऐसा हो चुका है। आर्थिक प्रतिबंध की स्थिति में भी नुकसान चीन को ही होगा। वर्ष 2018- 19 के आंकड़ों के अनुसार भारत से चीन को 16.7 बिलीयन डॉलर का निर्यात हुआ था जबकि भारत ने चीन से 70.3 बिलियन डॉलर का आयात किया था। भारत को वर्ष 2018-19 में 53.6 बिलीयन डॉलर का व्यापारिक नुकसान हुआ। वर्ष 2019-20 में भारत ने चीन को निर्यात 16.6 बिलीयन डॉलर का किया था और चीन ने भारत को निर्यात 65.2 बिलीयन डॉलर का किया जिस वजह से भारत को व्यापारिक घाटा वर्ष 2019-20 में 48.6 बिलियन डॉलर का हुआ। वर्ष 2004 में भारत का चीन से व्यापारिक घाटा 1.1 बिलियन डॉलर था जो कि बढ़कर वर्ष 2018-19 में 53.6 बिलीयन डॉलर हो गया। बेहतर होगा कि भारत दूसरे देशों के साथ
    ‘अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को और सुदृढ़ बनाए।

    जहां तक चीन के निवेश की बात है, भारत में वर्ष 2014 में 1.6 बिलियन डॉलर का चीनी निवेश आया जो वर्ष 2020 के प्रारंभ तक लगभग 26 बिलीयन डॉलर हो चुका था। कुछ स्टार्ट अप कंपनियां पेटीएम, फ्लिपकार्ट, स्विग्गी, ओला, गाना जैसी कंपनियों को चीनी निवेश प्राप्त हुआ। भारत दूसरे मित्र देशों से निवेश के अवसर तलाश सकता है। आज भारत का फॉरेक्स रिजर्व 530 बिलियन डॉलर से अधिक है जो भारत के 18 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। चीन भारत के लिए कोई बड़ी और लाभप्रद बाजार नहीं है। भारत अपने कुल निर्यात का लगभग 5% चीन को करता है जबकि अपने कुल आयात का 14% चीन से करता है। भारत दुनिया का एक बड़ा बाजार है। चीन के लिए इतना बड़ा बाजार ढूंढ़ना असंभव है। आर्थिक नुकसान चीन को ही है।

    भारत को कूटनीतिक स्तर पर चीन को दुनिया से अलग-थलग करना चाहिए। भारत के सामरिक क्षमता तेजस विमानों के आने से बढ़ गई है। देश को चीन पर सीधा आर्थिक प्रतिबंध लगाने से भी नहीं हिचकिचाना चाहिए। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्रों के विकास पर भारत को अधिक ध्यान देना चाहिए। भारत को पड़ोसी छोटे देशों को अधिक आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए जिससे वे चीन के चंगुल में ना फंसे। चीन को लेकर विदेश नीति में आक्रामकता आनी चाहिए। भारत चीन के लिए सबसे बड़ा बाजार है। स्वदेशीकरण, मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल के मंत्र से चीन को आर्थिक तौर से कमजोर बनाया जा सकता है। मेक इन इंडिया, मेक फॉर वर्ल्ड, वोकल फॉर लोकल, एमएसएमई, और स्टार्ट अप इंडिया को बढ़ा कर हम चीन की आर्थिक शक्ति को घटा सकते हैं।

    Shagun

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