आदत है कि जाती नहीं?

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हमारे देश मे अधिकतर लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत नही रहते इसलिये लोग बीमार रहकर अपने कमाई का बड़ा हिस्सा इलाज करने में खर्च कर देते है और स्वास्थ ठीक न रहने के कारण रोजी रोजगार करने में भी व्यवधान उत्पन्न होना स्वाभाविक सी बात है। इस उद्देश्य से देश की मोदी सरकार द्वारा साफ-सफाई के प्रति देश के लोगों के अंदर चेतना पैदा करने के लिये “स्वछ भारत” स्वच्छता अभियान जैसी कदम उठा कर देश के लोगों की आदतों में स्वछता शामिल करने और साफ-सफाई के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से सम्पूर्ण देश मे इस अभियान की शुरुआत हुई थी।

विशेषतः गावं के लोगों को खुले में सौच न करने देने के उद्देश्य से देश के प्रत्येक घर मे एक शैचालय का निर्माण के लिये 25 हजार प्रति शौचालय देने का प्राविधान किया गया था, जिसमे एक कच्चे सोखता वाले शौचालय का निर्माण करना था यदि आपको उसे और भी अच्छा या पक्के टंकी वाले शौचालय का निर्माण करना है तो आपको स्वयं बाकी के रुपये उसमे लगाने पड़ते ऐसे में  लोगों ने 25 हजार रुपये तो ले लिये लेकिन शौचालय के स्थान पर शौचालय जैसा ही कांडा लकड़ी इत्यादि रखने का एक छोटा सा भण्डार गृह का निर्माण करवा लिया।

इस योजना में भी लोगों ने जम कर रुपये इधर से उधर किये अन्तोगत्वा आज भी देश के ज्यादातर जगहों पर लोगों विशेष कर गांवों में अभी भी लोग खुले में शौच जाते हुए दिख जायेंगे। जब जन्म काल से किसी मनुष्य की खुले में शौच की आदत पड़ चुकी हैं तो यह उस आदत को अचानक से बदला नही जा सकता है।

इस अभियान में कुछ लोग तो राजनीतिक कारणों से प्रेरित हो कर और कुछ लोग गंदगी के प्रति लापरवाह होने के नाते इस अभियान की ऐसी की तैसी कर के रख दिया हैं।

हम यहां केवल शौचालय की बात न कर देश के अधिकसंख्यक लोगों की आदतों की बात करें तो हमें यह आज भी आसानी से देखने को मिल जयेगा कि लोग सड़कों पर या कहीं पर भी बिना कुछ सोचे समझे थूकने से परहेज नही करते है जैसा कि हमें पूरे हिंदुस्तान में कहीं पर भी थूकने का मौलिक अधिकार प्राप्त हो और पूरा का पूरा देश ही एक थूकदान सदृश है। जहां विश्व मे हमारे देश की गिनती विश्व शक्ति कहलाने की ओर धीरे-धीरे अग्रसर हैं और हमारे देश की गिनती विकासशील देशों में होती है।

ऐसे में आज हम यदि सम्पूर्ण भारतबर्ष में घूमें कर देखें तो देश के प्रत्येक राज्य के अधिकतर जगहों पर पान मसाला, पान और तंबाकू के शौकीन लोगों के जगह-जगह पर थूकने जैसी करतूतें करते आसानी से दिख जायेंगे। विशेषकर पान खा कर भरे चौराहे और भीड़-भाड़ वाले रास्तों पर अनेकों जगह पान और पान मसलों के पिक से लाल रंजीत हुये पड़े दिखाई देंगे कियूंकि हम लोग आजाद देश के स्वत्रंत नागरिक होने के अलावा क्या कहीं पर भी थूकना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है? -प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती 

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