23 साल जेल में। कोई जमानत नहीं। कोई पेरोल नहीं। फिर जयपुर हाई कोर्ट ने उन्हें सोमवार को बेगुनाह बताया। इसमें कोटपूतली की एक अदालत एक को सजा ए मौत और एक को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इनमें से पांच कश्मीरी और एक आगरा के हैं। ये अपने घर, दोस्त, समय सब कुछ भूल चुके हैं।
1996 में राजस्थान के दौसा में एक बस में बम ब्लास्ट हुआ जिसमें 14 लोग मारे गये और 37 घायल हुए! पुलिस कुछ लोगों को शक या यूँ कहें पूर्वाग्रह के तहत उठा लेती है! बिना ट्रायल, बिना पैरोल, बिना ज़मानत उनको जेल में रखा जाता है! 16 साल बाद 2011 में ट्रायल शुरू होता है! और पूरे 23 साल बाद उनको निर्दोष बरी किया जाता है कोर्ट द्वारा!
जयपुर हाई कोर्ट ने कहा कि समलेटी ब्लास्ट के मुख्य आरोपी डॉ. अब्दुल हामिद है, और उसे मौत की सजा मिलनी तय हुई। लेकिन डॉ. हामिद के साथ पांच लोग लतीफ़, अली, मिर्ज़ा निसार, अब्दुल और रईस पर अभियोजन की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि प्रॉसिक्यूसन अपने लगाए इल्ज़ामों का सबूत नहीं दे सका है।
छूटने वाले 6 इंसान ये हैं: लतीफ अहमद बाजा (42) अली भट्ट (48) जावेद खान, मिर्जा निसार (39) अब्दुल गनी (57) और रइस बेग (56)! रईस बैग एक डॉक्टर थे और उन्हें फ़िरोज़बाद से उठाया था।
मिर्ज़ा निसार तो नौवीं में पढ़ रहा था जो उस वक़्त 16 साल का था लेकिन पुलिस ने उसे वयस्क (18) लिखकर गिरफ़्तार किया था! परिवार के कई सदस्य गुज़र गये! इस बीच इनके घर में पैदा हुए किसी नये बच्चे को ये लोग पहचान तक नहीं पाते! आतंकवादी होने का झूठ धब्बा ऊपर से!
समलेटी ब्लास्ट केस में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब तक इनमें से सात बरी किए जा चुके हैं। एक को 2014 में बरी किया गया और बाकी बचे लोगों को अब जाकर बरी किया गया है। इन छह में से पांच तो रिहा हो गए। बाकी इनसे अलग जावेद खान अभी भी तिहाड़ जेल में बंद है। जावेद लाजपत नगर ब्लास्ट केस में भी आरोपी है।
यहाँ तक तो बात एक बार फिर भी समझ में आती है कि आप शक में किसी को गिरफ़्तार कर लेते हैं लेकिन उनको कई अन्य बम ब्लास्ट में भी आरोपी बना देना, 16 साल तक ट्रायल तक शुरू नहीं होना और 23 साल लग जाना उनके निर्दोष साबित होने को कोई कैसे समझेगा? ज़ाहिर है यहाँ पूर्वाग्रह, झूठ, नफ़रत, बेईमानी, लापरवाही सब शामिल था न्याय व्यवस्था में!
– पंकज चतुर्वेदी की वॉल से






