रक्षा गलियारे पर कारगर कदम

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
रक्षा सामग्री के निर्माण में भारत को कई दशक पहले ही बड़े प्रयास करने चाहिए थे। लंबे समय से भारत हथियारों, रक्षा सामग्री का आयातक बना रहा। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का निर्णय किया था। उनका कहना था कि भारत को केवल हथियार निर्माता ही नहीं , निर्यातक भी बनाया जाएगा। रक्षा गलियारा ने उम्मीद जगाई है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से रक्षा कॉरिडोर आकर लेने लगा है। कुछ दिन पहले अलीगढ़ में समिट का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में आज देश का पहला डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरीडोर लॉन्च किया गया। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने और निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यूपी के अलीगढ़ सहित छह जिलों में इसकी शुरूआत की गई है। माना जा रहा है कि इससे प्रदेश में करीब बीस हजार करोड़ निवेश होगा और करीब ढाई लाख नए रोजगार पैदा होंगे। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में डिफेंस कॉरीडोर की विधिवत शुरूआत हुई । इस बजट में देश में दो डिफेंस कॉरीडोर बनाने की घोषणा की गई थी।  एक उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में और दूसरा तमिलनाडु में। उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ के साथ साथ आगरा, कानपुर, झांसी, चित्रकूट और लखनऊ में इसका विस्तार किया जायेगा।  करीब चार हजार हैक्टियर जमीन इसके लिए चिन्हित की गई है।
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इक्कीस फरवरी को डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा की थी। सात हजार  करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश हुए हैं। एमएसएमई के सर्वाधिक उद्यम उत्तर प्रदेश में हैं। ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा यहीं से होकर जाता है। अलीगढ़ सिर्फ ताला ही नहीं, हार्डवेयर की दुनिया मे पहचान है। पर एक मंच इसे कभी नहीं मिला। आगरा से झांसी तक बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बनेगा। वहां भी जमीन का निर्धारण हो चुका है।  अलीगढ़ में ढाई सौ  हेक्टेयर से ज्यादा  जमीन चिह्नित हो चुकी हैं। प्रत्येक  निवेशक को सुरक्षा की गारंटी  और  सिंगल विंडो पोर्टल से निवेशकों को सुविधा प्रदान की जाएगी। रक्षा मंत्री से अनुरोध किया गया कि नवंबर में होने वाले एयर शो यूपी में कराए जाएं। प्रदेश सरकार इसका पूरा इंतजाम करेगी।
 रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण भी इस कार्य को आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास कर रही है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यन्त द्वारा बनाई जा रही अनुकूलता को वह कारगर मानती है। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा डिफेंस कॉरिडोर को लेकर कार्यक्रम होते रहेंगे। जितना रक्षा बालों आपूर्ति कर रहे हैं, उतना निर्यात भी किया जाए। दस वर्ष   तक आपको ऑर्डर मिलते रहेंगे। टेस्ट के बाद क्वालिटी ठीक होने पर हम भी आपका उत्पाद लेंगे। भारतीय सेना द्वारा पूरा मार्केट सपोर्ट हमको मिलना चाहिए।
मेक इन इंडिया के जिन पच्चीस  सेक्टर को लिया है, उसमें डिफेंस भी है। आने वाले समय में स्टेट रेवोलुशन होने जा रहा है। अलीगढ़ एमएसएमई के लिए पूरे देश में जाना जाता है। अलीगढ़ में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाएं, इससे देश को बढ़ावा मिलेगा।
 देश की पहली डिफेंस कॉरिडोर में अत्याधुनिक तकनीक से हथियार बनाए जाएंगे। इन्वेस्टर समिट में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण तीन साल का रोडमैप भी उद्यमियों के बीच रखा।  यहां सेना के लिए वाहन इंफैंट्री व काम्बैट, मिनी ऑटोमेटिक माउजर से लेकर टी सत्तर टैंक और तोप तक बनाई जाएंगी। कॉरिडोर की आधारशिला नवंबर में टप्पल से ही रखे जाने के संकेत हैं।
 एचएएल बाराह सौ करोड़  का निवेश करेगा ।एनकेयू नौ सौ करोड़ रुपये का निवेश करेगी। कानपुर व नोयडा में कारखाना लगायेगे। आयुध निर्माणी बोर्ड ने सैन्य क्षेत्र को मजबूत बनाने में अहम योगदान दिया है। आर्टिलरी गन पूरी तरह देशी हैं। ट्रायल सफल रहा है। इसे कानपुर ने बनाया है। जल्द उत्पादन शुरू करेंगे। बोफोर्स ने आर्टिलरी की मांग की है। उन्होंने कहा कि यहां निवेश किया जाएगा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के सीएमडी ने कहा कि रक्षा मंत्रालय की नवरत्न कंपनी हैं। आगरा में दो साल में नया कार्यालय खोलेंगे। भेल ग़ाजिय़ाबाद में ही दो सौ करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।
इसे प्रोत्साहन देने के लिए अनेक इंतजाम किए गए है। रक्षा इकाई स्थापना में बैंक कर्ज में छूट,
केंद्रीय जीएसटी से बाहर रहने की  छूट, जमीन खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी की छूट, पेटेंट करने हेतु शुल्क में छूट, अनुसंधान में लगने वाले ब्याज में छूट, तकनीक लाने की लागत में पचहत्तर  प्रतिशत की प्रतिपूर्ति, माल परिवहन में छूट, और निवेश हेतु ली गई भूमि मूल्य में पच्चीस प्रतिशत छूट दी जाएगा। इसमें लाइसेंस की प्रक्रिया को काफी सरल किया जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार दो हजार तेईस तक तक हम रक्षा उत्पाद निर्यात करने की स्थिति में होंगे।

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